This page has been fully proofread once and needs a second look.

<page>
<ignore>
८८
 
</ignore>
<ignore>
सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
</ignore>
<verse>
परिमातुं तव मूर्तितिं नालम-

जस्तत्परात्परोऽसि विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३६ ॥
 
</verse>
<verse>
फलमिह नृतया जनुषस्त्वत्पद-
 

सेवा सनातनेश विभो
 

 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३७ ॥
 
</verse>
<verse>
बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुण-
 

रुचितां चिरं प्रदेहि विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३८ ॥
 
</verse>
<verse>
भगवन्भर्ग भयापह भूतप-
 

ते भूतिभूषिताङ्ग विभो ।
 

साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 

शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३९ ॥
 
</verse>
</page>