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सुवर्णमालास्तुतिः ।
 
परिमातुं तव मूर्ति नालम-
जस्तत्परात्परोऽसि विभो ।
 
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३६ ॥
 
फलमिह नृतया जनुषस्त्वत्पद-
 
सेवा सनातनेश विभो
 

 
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३७ ॥
 
बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुण-
 
रुचितां चिरं प्रदेहि विभो ।
 
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३८ ॥
 
भगवन्भर्ग भयापह भूतप-
 
ते भूतिभूषिताङ्ग विभो ।
 
साम्ब सदाशिव शंभो शंकर
 
शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३९ ॥