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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७९
 
पृष्ठम्
 
सदसद्विलक्षणासौ परमा ०
 
सदसन्न विरुद्धत्वा •
 
सदाचारमिमं नित्यं
सदाशिवोक्तानि सपादलक्ष •
सदा साक्षिस्वरूपत्वा •
 

 
समस्तेषु वस्तुष्वनुस्यूतमेकं
सरेचपूरैरनिलस्य कुम्भैः
 
सर्व जगदिदं नाह
 
सर्वे ब्रह्मेति यो वेद
 
सर्वे सुखं विद्धि सुदुःखनाशा •
 
सर्वगुणैरुपपन्नः पुत्रः
सर्वशत्वपरोक्षादी०
 
सर्वत्र प्राणिनां देहे
 
सर्वदुःखनिदानेषु
 
सर्वप्रकाशको भानुः
सर्ववेदान्तसिद्धान्तै ०
सर्व सुखानां बीजं
सर्वेन्द्रियावरोधादुद्योग •
 
सर्वेऽपि पुत्रभाजस्तन्मुक्तौ
 
सर्वोपाधिनिर्मुक्तं
सर्पादौ रज्जुसत्तेव
 
१६
 
२०२
 
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११४
 
११७
 
૮૪
 
१८५
 
११७
 
૦૨
 
११३
 
४५
 
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