This page has not been fully proofread.

श्लोकानुक्रमणिका ।
 
वेदान्तवाक्येषु सदा रमन्तो
 
वेदान्तश्रवणं कुर्या •
वेदान्तैखद्वयं सम्य•
वेदो नित्यमधीयतां तदुदितं
वैराग्यभाग्यभाजः प्रसन्न•
वैराग्यमात्मबोधो भक्तिश्चेति
व्यालादिदुष्टसत्त्वेभ्यो
 
शक्यः सर्वनिरोधेन
 
शब्दशक्तेरचिन्त्यत्वा ०
शब्दस्याद्यन्तयोः सिद्धं
शरावस्थोदके नष्टे
शरीरस्थितिशैथिल्यं
 
शश्वन्नश्वरमेव विश्वमखिलं
 
शान्तैरनन्यमतिभिर्मधुरस्वभावै.
शिव एव सदा जीवो
शिवायाः शंभोर्वा क्वचिदपि च
 
शुध्यति हि नान्तरात्मा
 
शुद्धचैतन्य रूपोऽह
 
शुद्धे कथमशुद्धः स्या०
 
शोधिते त्पदार्थे हि
 
२७७
 
पृष्ठम्
 
१५९
 
D
 
१०९
 
२०१
 
१२७.
 
१४
 

२०३
 
...
 
...
 
:
 
:
 
:
 
:
 
...
 
...
 
:
 
...
 
...
 
:
 
२३०
 
१०९
 
११०
 
૭૪
 
५२
 
५५
 
१३३
 
७६
 
१३८
 
२६
 
२२१
 
२०१
 
१९८