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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
रज्जुरप्रस्थदोषादि
 
रज्ज्वज्ञानाद्भाति रज्जौ यथाहि :
 
रविचन्द्रवह्निदीपप्रमुखाः
 
रसगन्धरूपशब्दस्पर्शा
 
राज्यं करोतु विज्ञानी
राज्यान्तराभिगमनाद्रणभङ्गा •
 
रुविरत्रिधातुमजामेदो ०
 
रूपाच्च गुणदोषभ्यां
 
रूपादौ गुणदोषादि ०
 
लब्धश्चेदधिकोऽर्थः पत्न्यादीनां
 
Boar विद्या राजमान्या ततः किं
 
लयविक्षेपयोः संघौ
 
लिङ्गस्य धारणादेव
 
arita त्वयी किमिति
 
लोको नापुत्रस्यास्तीति श्रुत्याय
लोहशलाकानिवहैः स्पर्शा •
 
लोहे हुतभुग्व्यासे लोहा •
 
सि यदा जघान श्रीवत्सः
 
वर्क्स निरीक्ष्य दूराद्वावः
 
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