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२६२
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
न मे लोकयात्राप्रवाह ०
नरदेहातिक्रमणात्प्राप्तौ
 
नरपशुविहङ्गतिर्यग्योनीनां
 
नलिनीदलगत जलव ०
 
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पृष्ठम्
 
२३६
 
९०
 
नष्टे पूर्वविकल्पे
 
२२९
 
न संभवति साप्यत्र
 
१९९
 
न हि प्रपञ्च न हि भूतजातं
 
४५
 
नाडीषु पीड्यमानासु
 
५२
 
नादानुसंधान नमोऽस्तु तुभ्यं
 
११८
 
नादाभ्यन्तवर्ति ज्योति ०
 
२३
 
नानात्माभिमतं नैव
 
१९६
 
नानाविधस्त्वं कुम्भानां
 
नानाविधेषु कुम्भेषु
नानाशरीरकष्टैर्धनव्ययैः
 
नाना रूपवती बोधे
 
नानारूपव्यतीतोऽहं
 
नातान्येकरूपत्वं
 
नासन्न सन्न सदसन्न महन्न
नासाग्राद्वदनादा कफं मलं
 
नाहं खादिरपि स्फुटं मरुतल ०
नाई जात न प्रबृद्धो न नष्टो
 
७०
 
७०
 

 
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१९६
 
२२२
 
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६०