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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२६१
 
पृष्ठम्
 
नगनगरदुर्गदुर्गमसरितः
 
न च प्राणसंज्ञो न वै
 
पञ्चवायु ०
 
न चाकाशो न शब्दश्च
 
न तेषां समुदायोऽसि
 
न त्वं देहो नेन्द्रियाणि
 
न त्वं देहोऽसि दृश्यत्वा •
 
न दृष्टिलक्ष्याणि न चित्तबन्धो
न निरोधो न चोत्पत्तिः
ननु कथमावरणं स्यादज्ञानं
ननु सगुणो दृश्यतनुस्तथै •
नन्वर्क प्रतिबिम्बः सलिलादिषु
नन्वात्मनः सकाशादुत्पन्ना
नन्वच्चावचभूतेष्वात्मा सम
 
न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं
 
न भवानिन्द्रियाण्येषां
 
न मनस्त्वं न वा प्राणो
 
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१०९
 
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१९
 
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३१
 
३२
 
न मनोऽहं न बुद्धिश्च
 
न मृत्युर्न शङ्का न मे जातिभेदः
 
न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ
न मे बन्धो न मे मुक्ति ०
 
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६४
 
१९५
 
१९६
 
८३
 
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६४
 
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