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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
देहेन्द्रियप्राणमनो०
 
देहेन्द्रियादिधर्मान्यः
 
देहेन्द्रियादिसाक्षी य०
 
देहो देवालयः प्रोक्तो
 
देहो नाहं प्रदृश्यत्वा •
देहो नाहमचेतनोऽयमनिशं
दैवं यावद्विपुलं यावत्प्रचुरः
दैवात्प्रसूतिसमये शिशुस्ति •
 
दैवात्स्थितं गतं वा यं
दैवादेकशरावे भग्ने किं
 
दौर्भाग्यमिन्द्रियाणां कृष्णे
 
द्रव्यं पल्लवतश्च्युतं यदि भवे ०
 
द्वन्द्वादिसाक्षिरूपोऽहं
 
द्वित्वं भात्यक्षिदोषेण
 
द्वेचैव भाति तस्मात्पतिश्व
 
द्वैतं मय्यखिलं समुत्थितमिदं
 
धातुर्लोकः साधितो वा ततः किं
 
वरदत्त महामिषमन्वै ०
 
ध्यानयोगेन भासैका ०
 
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