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२५४
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
घटकुड्यादिकं सर्वे
 
वटनीरान्नपिष्टाना ०
 
घटमठकुड्यैरावृतमाकाश
 
Parataमहाकाशौ
 
टावभासको भानु०
वनच्छन्नदृष्टिर्धनच्छन्नमर्के
 
चक्षुर्द्वारैव स्यात्परात्मना
चरतरतरङ्गसङ्गात्प्रतिबिम्बं
चरमस्तत्र नृदेहस्तत्रो ०
 
चित्तं चैतन्यमात्रेण
 
चित्तं विषयोपरमाद्यथा
 
चित्तेन्द्रियाणां चिरनिग्रहेण
 
चित्ते सत्त्वोत्पत्तौ तटिदिव
चित्प्रतिबिम्बस्तद्वद्बुद्धिषु
चिदमृतसुखराशौ चित्तफेनं
 
चिदेव देहस्तु चिदेव लोका०
 
चिद्रूपत्वान्न मे जाड्यं
चिन्तामणिरिव दुर्लभ •
 
चिन्मात्रः परमात्मा ह्यपश्य ०
चिन्मात्रैकरसे विष्णौ
 
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