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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
अयं सः सोऽयमितिव ०
 
अयः काष्ठादिकं यद्व०
अयमुत्तमोऽयमधमो
 
अर्थाकारा भवेद्वृत्तिः
 
अविद्याभूतबन्धस्य
अशेषदृश्योज्झितदृङ्मयाना ०
 
अश्रन्ति चेदनुदिनं वन्दिन
 
असङ्गोऽहमसङ्गोऽह•
 
अस्थिमांस पुरीषान्त्र०
अहं नामरो नैव मत्यों
 
अहं निर्विकल्पो निराकाररूपो
अहं नैव बालो युवा नैव
 
अहं नैव मन्ता न गन्ता न वक्ता
 
अहं नैव मेयस्तिरोभूतमाया
 
अहं ब्रह्मास्मि यो वेद
 
अहं ब्रह्मेति विज्ञानं
 
अहंममत्वाद्वयपहाय सर्वे
 
अहं ममेत्ययं बन्धो
 
अहं विष्णुरहं विष्णु ०
 
अहं साक्षीति यो विद्या
 

 
अहमात्मा न चान्योऽस्मि
 
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