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॥ श्रीः ॥
 

॥ विषयानुक्रमणिका ॥
 

अपरोक्षानुभूतिः
 

मङ्गलाचरणम्
 

अनुबन्धचतुष्टयम्
 

साधनचतुष्टयकारणानि
 

वैराग्यं नित्यानित्यवस्तुविवेकश्च
 

शमादिषट्कस्वरूपम्

मुमुक्षुत्वमात्मविचारश्च

अज्ञानम्
 

आत्मनः प्रकाशरूपत्वम्

आत्मानात्मनोर्भेदः
 

आत्मनो ज्ञानस्वरूपत्वम्

देहात्मवादनिराकरणम्

देहस्यासत्त्वम्
 

जीवत्वस्य मृषात्वम्

प्रपञ्चस्य ब्रह्मात्मत्वम्

पञ्चमिध्यात्वे दृष्टान्ताः
 

8. P. 11.0
 

१--२१
 

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