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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२९५
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
सत्यानन्दस्वरूपं
 
२७
 
समाधौ क्रियमाणे तु
 
१९
 
सत्युपाध्येरभिन्नत्वे
 
१५६
 
सम्मिता इन्द्रियस्थाने ०
 
१७०
 
सत्त्वं चित्त्वं तथानन्द ०
 
२०७
 
सम्यक्प्राबोधयत्तत्त्वं
 
१५३
 
सत्त्वचित्त्वानन्दतादि • २०८ सम्यक्समाधिनिरतैः
 
२२४
 
सत्त्वचिच्चानन्दतादि • १९८
 
सत्त्वप्रधाने चित्तेऽस्मिन् २०४
सत्वापत्तिश्चतुर्थी स्यात २४९
 
सम्यग्विज्ञानवान्योगी
 
स वक्त्यस्य तस्मा ०
 
६३
 
१०५
 
सर्गस्थितिप्रलयहेतु
 
०
 
२५.
 
सदयं वेति
 
२०६
 
सर्पत्वेन यथा रज्जू.
 
१२
 
सदसद्भयामनिर्वाच्य०
 
१५३
 
सर्व पुरुष एवेति
 
७
 
सदा सर्वगतोऽप्यात्मा
 
५९
 
सर्व ब्रह्मेति विज्ञानात्
 
१६
 
सदैव वासनात्यागः
 
४
 
सर्व सर्वगतं शान्तं
 
२५७
 
सदैवात्मा विशुद्धोऽपि
 
११
 
सर्वगं सच्चिदानन्दं
 
६५
 
सद्भावे लिङ्गमेतस्य
 
१५४
 
सर्वज्ञत्वं परेशत्वं
 
२९
 
सद्भिः स एव विज्ञेयः
 
२३१
 
सर्वज्ञत्वेश्वरत्वादि •
 
१५५
 
सन्मानवस्तुनो भावे
 
२३१
 
सर्वज्ञोऽप्रतिबद्ध ०
 
१८३
 
समष्टिः स्यात्तरुगणः
 
१६६
 
सर्वदाप्यासमित्येव
 
१९८
 
समष्टिरूपमज्ञानं
 
२१४
 
सर्वमात्मतया ज्ञातं
 
१४
 
समष्टेरपि च व्यष्टेः
 
१६७ सर्वमेतद्यथा पूर्व
 
१४९
 
समस्तेभ्यो रजोंशेभ्यो
 
१६४
 
सर्ववेदान्तसिद्धान्त •
 
२५८
 
समाधिः कः कतिविधः
 
२२७
 
सर्वस्य दाहको वह्निः
 
१९७
 
समाधिसुप्त्योर्ज्ञानं
 
२३१
 
सर्वस्यानित्यत्वे
 
१०५