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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७९
 
पृष्ठम्
 
पृष्टम्
 
न जाग्रन्न मे स्व ०
 
९९
 
न स्वप्नजागरणयो०
 
२२१
 
न ज्ञानकर्मणोर्यस्मात्
 
१३७
 
न हि त्वं देहोऽसा •
 

 
२२३
 
न तथा विद्यते व्याप्तिः
 
१६८
 
न हि दुःखप्रदं वस्तु
 
२०३
 
न तु कृत्यैव सन्या
 
१२९
 
न हि प्रमाणान्तर ०
 
१९३
 
न देशो न कालो
 
२४२
 
नत्र विषयः कश्चित् २०.६
 
न देहो न चाक्षाणि
 
२४२
 
:
 
न धर्कः कुरुते कर्म
 
१७१
 
न प्रमादोऽत्र कर्तव्यो
 
२४४
 
नानात्वेन प्रतीतानां
 
१५४
 
न भूमिर्न तोयं
 
९७
 
नानायोनिसहस्रेषु
 
१६०
 
न माता पिता वा
 
९७
 
नानुभूतः कदाप्या ०
 
१७७
 
न मेऽस्ति देहेन्द्रिय ०
 
२३४
 
नानोपाधिवशादेव
 
५८
 
न वर्णा न वर्णाश्रमाचार०
 
९७
 
नान्तः ः प्रज्ञो नो ब०
 
२३४
 
न वेषभाषाभि०
 
२३५
 
नापेक्षते यदन्यद्य ०
 
४०
 
न शङ्कनीयमित्यायैः
 
२१८
 
नाप्येष धर्मो मनसो ०
 
२०४
 
न शब्दो न रूपं
 
२४१
 
नामरूपे पृथक्कृत्वा
 
२४१
 
न शास्ता न शास्त्रं
 
९८ नामादिविरहितोऽहं
 
५१
 
न शुक्लं न कृष्णं
 
९८
 
नायाति प्रत्यगात्मा
 
७६
 
न द्रव्यजातं
 
२४१
 
नावेद्यमपि परोक्षं
 
३७
 
न सांख्यं न शैवं
 
९८ नाशकत्वं तदुभयोः
 
१८५
 
न साक्षिणं साक्ष्यधर्मा०
 
२४९
 
नाशेषलोकैरनुभूयमानः १५०
 
न सा तत्त्वमसीत्यत्र
 
न सावयव एकस्य
 
२१७
 
नासत: सत उत्पत्तिः
 
१७८ नासीत्पूर्वे न पश्चात्
 
१९५
 
७७