Proofing

✦

This page does not need to be proofread.

२७८
 
देहस्त्रीपुत्रमित्रा ०
 
७०
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
पृष्ठम्
 
द्वैतवर्जितचिन्मात्रे
 
पृष्ठम्
 
२५४
 
देहस्य चेन्द्रियाणां
 
३८
 
ध
 
देहस्यापि प्रपञ्चत्वात्
 
१५
 
धनं भयनिबन्धनं
 
११६
 
देहात्मबुद्धेर्विच्छित्त्यै
 
२३६
 
धनकान्ताज्वरादीनां
 
१२५
 
देहादावहमित्येव
 
१५९
 
धनेन मदवृद्धिः स्यात्
 
११७
 
देहादिः क्षीयते लोको
 
१३१
 
धन्यः कृतार्थस्त्वमहो
 
१४९
 
देहान्यत्वान्न मे जन्म ०
देहेन्द्रियगुणान्कर्मा ०
 
६१
 
धर्माधर्ममयोऽहं
 
५१
 
५९
 
व्यानं समाधिरित्येव
 
२४५
 
देहेन्द्रियमनः प्राणा०
देहेन्द्रियमनोबुद्धि •
 
२८
 
ध्यानपूजादिकं लोके
 
१२४
 
५९
 
व्यानशब्देन विख्याता
 
२४६
 
देहेन्द्रियादयो भावा
 
२७
 
न
 
देहेन्द्रियादिदृश्यव्य०
देहेन्द्रियादिधर्मा •
 
देहोऽयं पितृभुक्तान्न
 
४६
 
न कर्मणा न प्रजया
 
१३२
 
0.
 
३८
 
न कर्म यत्किंचिदपेक्षते हि १३५
 
१७३
 
न कस्यापि स्वसद्भावे
 
१७८
 
देहोऽहमित्ययं मूढो
 
६
 
न केवलज्ञानमयो
 
१९२
 
दैवतदैत्यनिशाचर०
 
५१
 
न कोऽपि सम्यक्त्वधिया
 
११५
 
दैवे च वेदे च गुरौ च
 
१३८
 
नक्लेशपञ्चकमिदं
 
३६
 
दोषोऽपि विहितः श्रुत्या
 
९
 
न च संन्यसनादेव
 
१२९
 
द्रष्टा श्रोता वक्ता
 
१७१
 
न चास्य कश्विजनिता
 
१३०
 
द्रष्टृदर्शनदृश्यानां
 
१७
 
न चैकं तदन्यत्
 
९९
 
द्वयोरुपाध्योरेकत्वे
 
१६७
 
न चोर्ध्वं न चाधो
 
९८