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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२६३
 
पृष्ठम्
 
पृष्टम्
 
अनापन्नविकारः
 
२७
 
अन्नं देवातिथिभ्यो
 
७४
 
अनायासेन येनास्मा०
 
२६
 
अन्नप्राणमनोमय ०
 
३६
 
अनित्यत्वं च नित्यत्वं
 
१०५
 
अन्नमयादेरस्मादपरं
 
३७
 
अनुकम्पा दया सैव
 
१२३
 
अन्यत्र त्वन्यधर्माणां
 
२०४
 
अनुभवति विश्वमात्मा
 
३७
 
अन्यथा विपरीतं स्यात्
 
१९५
 
अनुभूतिबलाच्चापि
 
१८६
 
अन्य प्रकाशं न किम०
 
२००
 
अनुभूतोऽप्ययं लोको
 
१०
 
अन्योऽन्तर आत्मा
 
१९०
 
अनुसंधानराहित्य •
 
२४७
 
अपञ्चीकृत भूतेभ्यो
 
१५८
 
अनुस्यूतात्मनः सत्ता १९८
 
अपरः क्रियते प्रश्नो
 
२०२
 
अनेनैव प्रकारेण
 
२०
 
अपरोक्षतयैवात्मा
 
२०७
 
अनेनोद्भूतगुणकं
 
१६८ अपरोक्षानुभूतिर्वै
 

 
अन्तःकरणतद्वृत्तिद्रष्टु
 
१७५ अपरोऽहमनपरोऽहं
 
२३८
 
अन्तःकरणतद्वृत्तिसाक्षी
 
२६ अपाणिपादोऽहं
 
२३४
 
अन्तः प्रज्ञत्वादिविकल्पै ० २२६
 
अपि व्यापकत्वाद्धि
 
९९
 
अन्तः शून्यो बहि: शून्यः
 
२५३
 
अशकतया जिह्वा
 
१६९
 
अन्तः सर्वोषधीनां
 
८३
 
अभाव उभयोः सुप्तौ
 
२२२
 
अन्तरङ्गं हि बलवत्
 
१४०
 
अभिभूतः स एवात्मा
 
१५६
 
अन्तरङ्गविहीनस्य
 
१४०
 
अभेद एव नो भेदो
 
१५६
 
अन्तर्बन्धेन बद्धस्य
 
१४३
 
अभ्रेषु सत्सु धावत्सु
 
१३
 
:
 
अन्तर्बहिः स्वयमखण्डि ० २२४
 
अमनस्त्वान्न मे
 
दुःख ०
 
६१
 
अन्तहिश्वापि मृदेव
 
२०९
 
अयं चापि प्रबुद्धाना ०
 
२४६