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२६२
 
पृष्ठम्
 
अज्ञानस्य निवृत्तिस्तु
 
१८४
 
अज्ञानान्मानसोपाधेः
 
६०
 
अज्ञोऽहमित्यनुभवात्
 
१९०
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
अद्वैतबोधकानां
अद्वैतमेव सत्यं
 
अधिकारिविषयभेदौ
 
पृष्टम्
 
४३
 
४१
 
४३
 
अतः संगच्छते सम्यकू
 
२१५
 
अधिकारी च विषयः
 
१०४
 
अत एतदनिर्वाच्यं
 
१५४
 
अध्यस्त जगतो रूपं
 
२४०
 
अत एव मतं वृत्ति.
 
२२९
 
अध्यस्त नामरूपादि ०
 
२४२
 
अतद्व्यावृत्तिरूपेण
 
६४
 
अध्यारोपापवादक्रम -
 
२२७
 
अतस्तमपरित्यज्य
 
२१८
 
अध्यासदोषात्समुपा०
 
१८२
 
अतिसूक्ष्मतरः प्रश्नः
 
१९४
 
अध्यासबाधागमनस्य
 
१८०
 
अतिसूक्ष्मविमर्शेन
 
२५१
 
अध्यासादेव संसारो
 
१८२
 
अतोऽन्तरङ्गस्थित •
 
११४
 
अध्यासो नाम वल्वेष
 
१८२
 
अतोऽप्रामाणिक मिति
 
१६८
 
अनण्वस्थूलमहस्व •
 
६४
 
अतोऽयं पुत्र आत्मेति
 
१८६
 
अनन्तशक्तिसंपन्नो
 
१५७
 
अत्यन्तं श्रद्धया भक्त्या
 
१६३
 
अनपेक्षः शुचिर्दक्षः
 
१४४
 
अत्यन्त तीव्रवैराग्यं
 
१४०
 
अनवगतकाञ्चनानां
 
४५
 
अत्र ब्रूमः समाधानं
 
२६
 
अनात्मनो जन्मजरा ०
 
१७७
 
अत्रापि चान्यत्र च
 
१०६
 
· अनात्मन्यहमित्येव
 
१८०
 
अथ शुद्धं भवेद्वस्तु
 
२०
 
अनात्मन्यात्मताध्यासः
 
१७८
 
अदृश्यं भावरूपं च
 
२०
 
अनात्मन्यात्मताध्या से
 
१७९
 
अद्वितीयस्वमात्रोऽसौ
 
१५७
 
अनात्मा यदि पिण्डोऽयं
 
२७
 
अद्वैतं सुखरूपं
 
४२
 
अनाद्यविद्यानिर्वाच्या
 
५९