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२८०
 
उपदेशसहस्री
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
वस्तु च्छाया स्मृतेरन्यत् २१५
 
विद्यैवाज्ञानहानाय
 
१५४
 
वाक्यार्थप्रत्ययी कश्चित्
 
२१३
 
विमध्य वेदोदधितः
 
२४६
 
वाक्याथों व्यज्यते चैवं
 
२३४
 
विमुच्य मायामय
 
१६१
 
वाक्ये तत्त्वमसीत्यस्मिन् २३५
 
विराड्वैश्वानरो बाह्यः
 
२०८
 
वाचारम्भणमात्रत्वात्
 
२०८
 
विरुद्धत्वादतः शक्यं
 
१५५
 
वाचारम्भणशास्त्राच्च
 
१९४
 
विविच्यास्मात्स्यमात्मानं
 
१८७
 
वाच्यभेदात्तु तद्भेदः
 
२०१
 
विवेकात्मधिया दुःखं
 
२३२
 
वाय्वादीनां यथोत्पत्तेः
 
१६३
 
विशुद्धिश्वात एवास्य
 
१९४
 
वासुदेवो यथाश्वत्थे
 
१८४
 
विशेषणमिदं सर्व
 
१५९
 
विकल्पना चाप्यभवे
 
२४३
 
विशेषो मुक्तवद्वानां
 
१९५
 
विकल्पनाच्चापि
 
२४४
 
विपयग्रहणं यस्य
 
२३१
 
विकल्पना वापि तथा
 
२४२
 
विषयत्वं विकारित्वं
 
२०५
 
विकल्पोद्भवतोऽसत्त्वं
 
१९४
 
विषया वासना वापि
 
१८६
 
विकारित्वमशुद्धत्यं
 
१६०
 
वेदान्तवाक्यपुष्पेभ्यो
 
૨૪૦
 
विक्षेपो नास्ति तस्मान्मे
 
१७३
 
वेदार्थों निश्चिती प
 
१७५
 
विज्ञातुनैव विज्ञाता
 
१७०
 
व्यक्तिः स्यादप्रकाशस्य
 
१८८
 
विज्ञातेयस्तु विज्ञाता
 
१७०
 
व्यञ्जकत्वं तदेवास्या
 
१७६
 
विदिताविदिताभ्यां
 
१८९
 
व्यञ्जकस्तु यथालोको
 
१९०
 
विद्यया तारिताः स्मो यैः २११
 
व्यञ्जको वा यथालोको
 
१७५
 
विद्यायाः प्रतिकूलं हि १५४
विद्याविद्ये श्रुतिप्रो
 
व्यवधानाद्धि पारोक्ष्यं
 
२०५
 
२०२
 
व्यस्तं नासं समस्तं वा
 
१८५
 
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangot