Proofing

This page has not been fully proofread.

श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२७१
 
पृष्ठम्
 
पृष्टम्
 
कर्त्रा चेदमित्येवं
 
२३१
 
इक्षितृत्वं स्वत: सिद्धं
 
१६७
 
कर्मकार्यस्त्वनित्यः
 
२०१
 
ईश्वरत्वेन किं तस्य
 
१७८
 
कर्मस्वात्मा स्वतन्त्रश्चेत्
 
१८३
 
ईश्वरश्वेदनात्मा स्यात्
 
१५७
 
कर्माणि देहयोगार्थ
 
१५३
 

 
कर्मेप्सिततमत्वात्स
 
२२६
 
उत्पाद्याप्यविकार्याणि
 
२०६ कल्प्योपाधिभिरेवैतत्
 
२०२
 
उपलब्धिः स्वयंज्योतिः २१४ कारकाण्युपमृद्राति
 
१५५
 
उल्मुकादौ यथाग्न्यर्थाः २१५ किं सदेवाहमस्मीति
 
२९४
 

 
किमन्यद्राहयेत्कश्चित्
 
२२७
 
एतावद्धयमृतत्वं न
 
१६७
 
कुण्डल्यद्दमिति ह्येतत्
 
२३२
 
एतेनैवात्मनात्मनो
 
१९१
 
कूटस्थेऽपि फलं
 
२२५
 
एवं तच्चमसीत्यस्य
 
२३६
 
कृतकृत्यश्च सिद्धश्व
 
१७५
 
एवं विज्ञातवाक्यार्थे
 
२२३
 
कृपणास्तेऽन्यथैवातो
 
२०९
 
एवं शास्त्रानुमानाभ्यां
 
१७१
 
कृष्णलादौ प्रमाजन्म
 
२३५
 

 
कृष्णायो लोहिताभासम्
 
२२२
 
करणं कर्म कर्ता च
 
१७६
 
कृप्यादिवत्फलार्थत्वात्
 
१५६
 
कर्ता दुःख्यहमस्मीति
 
२३७
 
केवलां मनसो वृत्ति
 
२०४
 
कर्ताध्यक्षः सदस्मीति २२१
 
कोशादिव विनिष्कृष्टः
 
१६८
 
कर्ता भोक्तेति यच्छास्त्रं
 
२१२
 
क्रियोत्पत्तौ विनाशित्वं
 
१९६
 
कर्तृकर्मफलाभावात्
 
क्षणिकं हि तदत्यर्थे
 
१९९
 
कर्तृत्वं कारकापेक्षं
 
१७१ क्षीरात्सर्पिर्यथोद्धृत्य
 
२०७
 
-- 0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGang