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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२५९
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
मायामात्रमिदं द्वैतं
 
८२
 
यत्परं सकलवा गगोचरं
 
५२
 
माया मायाकार्य
 
२५
 
यत्र कापि विशीर्ण
 
१०७
 
मिथ्यात्वेन निषिद्धेषु
 
४३
 
यत्र प्रविष्टा विषयाः
 
८८
 
मिश्रस्य सत्त्वस्य
 
२४ यत्र भ्रान्त्या कल्पितं
 
७८
 
नुखादिपीकामिव
 
३१
 
मैत्र जगदाभासो
 
५८
 
मृत्कार्य सकलं घटादि
 
५१
 
यत्सत्यभूतं निजरूप
 
५९
 
मृत्कार्यभूतोऽपि मृदो
 
४६
 
यथा प्रकृष्टं शैवालं
 
६५
 
मेधावी पुरुषो
 
५ यथा यथा प्रत्यगव •
 
५६
 
मोक्षकारणसामन्यां
 

 
यथा सुवर्ण पुटपाक
 
७३
 
मोक्षस्य काङ्क्षा यदि
 
१६
 
यदा कदा वापि विप०
 
६६
 
मोक्षस्य हेतुः प्रथमो
 
१४
 
यदिदं सकलं विश्रं
 
४६
 
३७
 
यदि सत्यं भवेद्विश्वं
 
४७
 
मोहं जहि महामृत्युं
 
१७
 
यद्बोद्धव्यं तवेदानी
 
१४
 
मोह एव महामृत्यु:
 
१७
 
यदुत्तरोत्तराभावः
 
८५
 

 
द्विभाति सदनेकधा
 
५४
 
यः पश्यति स्वयं
 
२५ यस्त्वयाद्य कृतः
 
१४
 
एषु मूढाविषयेषु
 
१५
 
यस्मिन्नस्ताशेष
 
१००
 
यच्चकास्त्यनपरं
 
५४
 
यस्य संनिधिमात्रेण
 
२६
 
यतिरसदनुसंधि
 
६७
 
यस्य स्थिता भवेत्
 
८६
 
यत्कटाक्षशशि
 
९५
 
यावत्स्यारस्वस्य
 
६०
 
यत्कृतं स्वमवेलायां
 
८.
 
याबद्भान्तिस्तावदेव
 
४०
 
-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGang