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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२५७
 
पृष्ठम्
 
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निरुपममनादितत्त्वं
निर्गुणं निष्कलं सूक्ष्मं
 
९६ पाणिपादादिमान्
 
३२
 
९१
 
पाषाणवृक्षतॄण
 
१०८
 
निर्धनोऽपि सदा
निर्विकल्पकमनल्प
निर्विकल्पकसमाधिना
 
१०५ पुण्यानि पापानि
 
९८
 
५३.
 
पूर्व जनेरपि मृतेः
 
७४ प्रकृतिविकृतिभिन्नः
 
३१
 
२७
 
निष्क्रियो ऽस्म्यविका
 
१०० प्रकृति विकृतिशून्यं
 
८२
 
नेदं नेदं कल्पितत्वान्न
 
५० प्रज्ञानघन इत्यात्म
 
१०७
 
नैवात्मापि प्राण ०
 
३४
 
प्रशावानपि पण्डितोऽपि
 
२३
 
नैवायमानन्दमयः
 
४२
 
प्रतीतिर्जीवजगतोः
 
५८
 
नैवेन्द्रियाणि विषयेषु १०६
 
प्रत्यगेकरसं पूर्णम्
 
९१
 

 
प्रबोधे स्वमवत्सर्व
 
४१
 
पञ्चानामपि कोशानां
 
४३ प्रमादो ब्रह्मनिष्ठायां
 
६५
 
पञ्चानामपि कोशानाम्
 
३१ प्राचीनवासनावेगात्
 
८८
 
पञ्चीकृतेभ्यो भूतेभ्यः
 
१७ प्राणापानव्यानोदान
 
१९
 
पञ्चेन्द्रियैः पञ्चभिरेव
 
३४
 
प्रारब्धं पुष्यति वपुः
 
५७
 
पठन्तु शास्त्राणि
 
४ प्रारब्धं बलवत्तरं
 
८९
 
पत्रस्य पुष्पस्य
 
१०७
 
प्रारब्धं सिध्यति तदा
 
९०
 
पथ्यमौषधसेवा
 
१२ प्रारब्धकर्मपरिकल्पि :
 
१०६
 
परस्परांशैर्मिलितानि
 
१५ प्रारब्धसूत्रप्रथितं
 
८४
 
परावरैकत्वविवेक
 

 
परिपूर्णमनाद्यन्तम्
 
९१ बन्ध मोक्षम
 
१०९
 
S. P. 17
 
E-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGang