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२५६
 
विवेकचूडामणिः ।
 
पृष्ठम्
 
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द्रदर्शन याद
 
८१
 
न योगेन न सांख्येन
 
१२
 

 
न साक्षिणं साक्ष्य ०
 
९८
 
धन्योऽसि कृत •
धन्योऽहं कृतकृत्योऽहं
धीमात्रकोपाधि
 
११
 
न हि प्रबुद्धः प्रतिभास
 
९०
 
९५
 
न हास्ति विश्व
 
८२
 
२०
 
नास्त्यविद्या
 
३४
 

 
नारायणोऽहं नरकान्त
 
९६
 
न किंचिदत्र पश्यामि
 
९४
 
नास्ति निर्वासनान्मौ ०
 
१०२
 
न विद्यते नो विषयैः
 
१०३
 
नास्त्रैर्न शस्त्रैर-
 
३०
 
न गच्छति विना
 
१३
 
नाहं जीवः परं ब्रह्मे :
 
५७
 
न जायते नो म्रियते
 
२७
 
नादमिदं नाहमदो
 
९५
 
न तस्य मिध्यार्थ
 
=
 
निगद्यतेऽन्तःकरणं
 
१८
 
न तु देहादिसत्यत्व
 
९१
 
निगृह्य शत्रोरहम
 
६३
 
न देशकालासन
 
१०२
 
नित्यं विभुं सर्वगतं
 
४५
 
न नभो घटयोगेन
 
८९
 
नित्याद्वयाखण्डचि :
 
66
 
न विरोधो न चोत्पत्तिः
 
१०९ निदिध्यासनशीलस्य
 
न प्रत्यब्रह्मणोर्भेदं
 
८७ निद्राकल्पितदेश
 
न प्रमादादनर्थोऽन्यो
 
६५ निद्राया लोकवार्ताया
 
५८
 
नमस्तस्मै सदेकस्मै
 
१०१
 
नियमितमनसा मुं
 
२७
 
न मे देहेन संबन्धो
 
९७ निरन्तराभ्यासवशात्
 
७३
 
न मे प्रवृत्तिर्न च मे
नमो नमस्ते गुरवे
 
९७
 
निरस्तमायाकृत
 
४८
 
९५ निरस्तरागा निरपास्त
 
९२
 
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangot