This page has not been fully proofread.

अहमाकाशवत्सर्वं
 
६१
 
श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२६५
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
अहं ममेत्येव सदा०
 
१६०
 
अहं विकारहीनस्तु
 
अहं शब्देन विख्यात
 
60
 
6 ू
 
आत्मनो विक्रिया नास्ति
 
आत्मन्येवाखिलं दृश्यं
आत्ममये महति पटे
 
आत्मयाथार्थ्यनिश्चित्यै
 
६०
 
६२
 
४७
 
२३०
 
अहमालम्बनसिद्धं
 
४५ आत्मवत्सर्वभूतेषु
 
१६२
 
अहमिदमिति च मतिभ्यां
 
४५
 
आत्मस्वरूपमविचार्य
 
१७१
 
अहमेकोऽपि सूक्ष्मश्च
 
आत्माकम्पः सुखात्मा
 
८७
 
अहिंसा वाङ्मनः कायै:
 
१२३
 
आत्मा खलु प्रियतमो
 
२०१
 
अहिनियनीसर्प ०
 
२५५
 
आत्मा चिद्वित्सुखात्मा ०
 
७०
 

 
आत्मा ज्ञानमयः पुण्यो
 
आकाशवाय्वोर्धर्मस्तु
 
१६८
 
आत्मातः परमप्रेमा
 

 
२०१
 
आकाशादिगताः पञ्च
 
१५८
 
आत्मा तु सततं प्राप्तो
 
६२
 
आत्मचैतन्यमाश्रित्य
 
५९
 
आत्मानं सततं जानन्
 
१४
 
आत्मनः सच्चिदशश्व
 
६०
 
आत्मानात्मप्रतीतिः
 
६९
 
आत्मनः साक्षिमात्रत्वं
 
१७१
 
आत्मानात्मविवेकं
 
१५२
 
आत्मनः सुखरूपत्वात्
 
२०१
 
आत्मानात्मविवेकं स्फु०
 
१७१
 
आत्मनः सुखरूपत्वे
 
२०२
 
आत्मानात्मविवेकार्थं
 
१८५
 
आत्मनः सोऽयमध्यासो १८३
आत्मनः स्थूलभोगानां १७४
 
आत्मा नित्यो हि सद्रूपो
 
आत्मा नियामकश्चान्तः
 
आत्मनस्तत्प्रकाशत्वं
 

 
आत्मान्यः सुखमन्यच्च
 
२०२
 
आत्मनीव पुत्रेऽपि
 
१८६
 
आत्मान्यः सुखमन्यच्चे ०
 
२०३