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श्लोकानुक्रमणिका ।
 
२५५
 
पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 
तमाराध्य गुरुं
 
८ दृष्टदुःखेष्वनुद्वेगो
 
८५
 
तमो द्वाभ्यां रजः
तयोर्विरोधोऽयमुपाधि
 
५७
 
देवदत्तोऽहमित्ये •
 
१०३
 
४९
 
देहं धियं चियतिबिम्ब
 
YY
 
तरङ्गफेनभ्रमबुद्बुद
 
७९ देहतद्धर्मतत्कर्म
 
३२
 
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन
 
१३ देहप्राणेन्द्रियमनो
 
७५
 
तस्मादहंकारमिमं
 
६२ देहस्य मोक्षो नो
 
१०७
 
तस्मान्मनः कारणमस्य
 
३६
 
देहात्मधीरेव
 
३३
 
ताभ्यां प्रवर्धमाना सा
 
६३
 
देहात्मना संस्थित:
 
६३
 
तिरोभूते स्वात्मन्यमल •
 
२८
 
देहादिनिष्ठाश्रम
 
३९
 
तूष्णीमवस्था पर
 
१०२ देहादिब्रह्मपर्यन्ते
 

 
तेजसीय तमो यत्र
 
८१ देहादिसंसक्तिमतो
 
६८
 
त्यजाभिमानं कुल
 
६० देहादिसर्वविपये
 
३५
 
त्वमांसमेदोस्थि
 
३२ देहेन्द्रियप्राणमनो
 
२५
 
सरुधिरस्नायु
 
१७ देहेन्द्रियप्राण
 
७८
 
त्वमहमिद मितीयं
 
७२
 
देहेन्द्रियादावसति
 
३३
 

 
देहेन्द्रियादौ कर्तव्ये
 
८७
 
दिगम्बरो वापि च
 
१०४ देहेन्द्रियेष्वहंभाव
 
८७
 
दुर्लभं त्रयमेवे
 
३. देहोऽयमन्नभवनो
 
३१
 
दुर्वारसंसार
 
८ देहोऽहमित्येव
 
३९
 
दृश्यं प्रतीतं प्रवि
 
६४ दोषेण तीव्रो विषयः
 
१५
 
दृश्यस्याग्रहणं
 
६९
 
द्रष्टुः श्रोतुर्वक्तुः
 
९५
 
E-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGang