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चतुर्थोपनिषत् ।
१२१
देवो भगवान्यश्वोंकारस्तस्मै वै नमो नमः
ॐ सं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या-
श्वतस्रोऽर्धमात्रास्तस्मै वै नमो नमः १२
ॐ वं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये
च वेदाः साङ्गाः सशाखास्तस्मै वै नमो
नमः १३ ॐ तों ॐ यो वै नृसिंहो देवो
भगवान्ये पञ्चाग्नयस्तस्मै वै नमो नमः
१४ ॐ मुं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवा-
न्याः सप्तव्याहृतयस्तस्मै वै नमो नमः
१५ ॐ खं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवा-
न्ये चाष्टौ लोकपालास्तस्मै वै नमो नमः
ॐ नुं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये
चाष्टौ वसवस्तस्मै वै नमो नमः १७ ॐ
सिं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च
रुद्रास्तस्मै वै नमो नमः १८ ॐ हं ॐ यो
वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च आदित्या-
स्तस्मै वै नमो नमः १९ ॐ भीं ॐ यो
१२१
देवो भगवान्यश्वोंकारस्तस्मै वै नमो नमः
ॐ सं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्या-
श्वतस्रोऽर्धमात्रास्तस्मै वै नमो नमः १२
ॐ वं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये
च वेदाः साङ्गाः सशाखास्तस्मै वै नमो
नमः १३ ॐ तों ॐ यो वै नृसिंहो देवो
भगवान्ये पञ्चाग्नयस्तस्मै वै नमो नमः
१४ ॐ मुं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवा-
न्याः सप्तव्याहृतयस्तस्मै वै नमो नमः
१५ ॐ खं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवा-
न्ये चाष्टौ लोकपालास्तस्मै वै नमो नमः
ॐ नुं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये
चाष्टौ वसवस्तस्मै वै नमो नमः १७ ॐ
सिं ॐ यो वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च
रुद्रास्तस्मै वै नमो नमः १८ ॐ हं ॐ यो
वै नृसिंहो देवो भगवान्ये च आदित्या-
स्तस्मै वै नमो नमः १९ ॐ भीं ॐ यो