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भर्तृहरिसुभाषितसंग्रहे
 
ते दघुर्ददतेऽथ वा किमपि न क्षुद्रा दरिद्रा भृशं
 
धिग् धिक् तान् पुरुषाधमान् धनकणान् वाञ्छन्ति तेभ्योऽपि ये ॥
यथातुरः पथ्यमरोचमानं जिजीविषुर्भेषजमाददीत ।
 
तथा यियासुर्भुवि लोकयात्रां भुञ्जीत भोगानविषक्तचित्तः ॥ ३०५ ॥
यदा मेरुः श्रीमान् निपतति युगान्ताग्निनिहतः
 
समुद्राः शुष्यन्ति प्रचुरमकरग्राहनिलयाः ।
धरा गच्छत्यन्तं धरणिधरपादैरपि धृता
 
शरीरे का वार्ता करिकलभकर्णाचपले ॥ ३०६ ॥
 
यदि नाम दैवगत्या जगदसरोजं कदाचिदपि जातम् ।
 
F2-4
 
F2.3. 5 J 8 (W om.) भुंजते. " ) C दद्युस्ते; li's +m.v.5 Y1 2 G1 M1- नो दधुर्.
X Y14․ 4−3 'T (Tie v as ) in text ) G2 Ms ददतोथ; Yine ददतोपि; Y3 दयतोथ; Ms
दघतेपि. BD E F1H X न किमपि ; C Y3. 47.8 1 G+M1.3 किमपरं; F2.3 I J G1. 3
M2.4.5 किमपि तत्; F4 किमपि नं; F5 Y 1 किमपि ते; Y: कियदहो; Xs.०G2.5 कियदपि ( for
4) ACDF14-लवं; EH X कर्ण; Gst -गणान्
किमपि न ).
 
d
 
C भ्रमाद् ( for भृशं ).
 
( for - कणान् ). A तेभ्योपि वांछंति (by transp. ). G1 M1. 2 हि ( for sपि ).
 
Guvegarde
 
BIS. 4952 (2245 ) Bhartr ed. Bohl. 3.60. Haob. 96 lith ed. I. 91, II. 25,
Śatakav. 110. Subhash 310; SRB. p. 80.40; SSV. 1276.
 
305 2 5 } Found in B C F, F1 2 ( Ś39 ) ; P1 ( 514 ) [Also GVS 2387 Ś44:
BORI 329696 ( 97 ) ; Punjab 2101 597 ( 98 ) : Jodhpur1 Ś41 ( 40 ) ; Jodhpur3
Ś40; NS1 Ś48 ; NS2 S40]. – 6) C आदधाति; Est आददानः; + आददाति. - °) BC
F
धिया सुश्रुवि; F1 विधासुध्रुवि CF लोकपात्रं - 4 ) E3 अविषिक्त ; Es नविषक्त ;
F+
भविमुक्त: B C F4 -चेताः.
 
Fa
 
BIS. 5108 (2310 ) Bhartr. lith ed. II. 1. 44. Schiefner and Weber p. 22;
BLP. 4. 87 ( Bb. ).
 
a
 
● ) Est सदा; X Y
 
XY
 
306 { V } Om. in W, BORI 326. F2 Y7 order acbd-
TGM 1. 3 यतो; J2 यथा. Ait युगांगाग्नि C -विहितः; Esc It -fafga: ; F2. 3. 4m.v. Ic J X
Y1 - 4.7 GM दलित: ; Y4-6.3 T-वलितः (for - निहतः ). – 4) F3 क्षुभ्यंति; X शुष्यंते (for
शुष्यन्ति ). E -निकर-; 2 - सलिला; X1 - नकर- ( for - मकर- ). Y7 -व्यूह - ( for ग्राह- ). O
'Gat.v. 3 -कलिला:; J1 -सलिलं; J2.8 X7 - सलिला:; X 3 -विलयाः; G2. 3 -कलिताः ( for -निलयाः).
● ) Y3 धना ( for धरा ). B गच्छत्यस्तं; X 2 Gs गच्छत्यंते; Y1 गच्छत्यंतर्; Y6.8 गच्छेत्यंतं.
B संबैद (for 'पदे). E3 धृताः;
J1.2 भृता;
M3 धृतं.
2 ) X 2 किरिकलभ - Y10
करिकरभ C कर्णात; M1 कंठाय- F1 चटुले ( for चपले).
 
J3 धृतः;
 
BIS. 5197 (2355) Bhartṛ. lith. ed. II. 3. 64. Galan 75. Schiefner and Weber
p. 24. Subhāsh. 313; SRH. 187 34 ( Bh. ) ; SK 7 31; SSD. 4. f. 17a,
 
T
 
307 {N } Found in BCE 1 ± (N106) H I Y3 (N21 ) [ A1 0 GVS 2387 N109 ;
BVB2 N102 (101); BORI 329 N 97 ( 92 ) ; Punjab 2101 N113 (114) ; BU N 105
(103) ; Jodhpurl N105 (106 ) ; Jodhpur3 N105 (107) ; NS1N112 (115); N82