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भर्तृहरिसुभाषितसंग्रहे
 
पाणिभ्यां पद्मरागाभ्यां रेजे रत्नमयीव सा ॥ १३१ ॥

 
गुरुणा स्तनभारेण मुखचन्द्रेण भास्वता ।

शनैश्राभ्यां पादाभ्यां रेजे ग्रहमयीव सा ॥ १३२ ॥

 
मुग्धे धानुष्कता केयमपूर्वा तव दृश्यते ।

यया विध्यसि चेतांसि गुणैरेव न सायकैः ॥ १३३ ॥

 
सुधाशुभ्रं धाम स्फुरदमलरश्मिः शशधरः

प्रियावकाक्त्राम्भोजं मलयजरजशूश् चातिसुरभिः ।

स्रजो हृद्यामोदास् तदिदमखिलं रागिणि जने

करोत्यन्तःक्षोभं न तु विषयसंसर्गविमुखे ॥ १३४ ॥
 
BIS. 4885 ( 2211 ) Bhartr. ed. Bohl. 1. 20. Haeb. 22; Sp. 3371; SRB.
p. 270. 2; SBH. 1236; SKM. 53.97 ( Sakavrddhi); SRK. p. 272 19 ( Bb ); SHV,
app. II. f 18a ( Bh. ) ; SLP 5 9 (Bh.).
 
132* Om. in Yo ( 1 ), G , Punjab 2885, Telugu ed. 1848 and Mysore
KB. 340. – ) T3 मुखे ( for मुख- ). J1 भास्वर; G1 भासता. – ° ) B2 Y7 T8 शनैश्वराभ्यां
- 6
- ) C ग्रहवतीव; Eet F1 It G1 गृहमयीव; Xit ग्राहमयीव.
2
 
BIS. 2169 (865) Bhartr ed. Bohl. 1. 16. Haeb. 18; SRB. p. 270. 3
(Šaňkhaka); SBH. 1233; SKM. 53. 93; SRK. p. 271. 18; Mandaramaranda-
campū of Kṛṣṇakavi 10. 178 (KM. 52, p. 144); Kavindravacanasamuccaya 255 (1);
SHV. app. II. f. 18& 7 ; SLP.5.10 ( Bh. ).
 
Wa
 
3
 
133 Om. in NS1.
 
a ) F1 धनुष्कता; Ha W2.
धानुष्मता; धानुष्यता. F2
सेयम् (for केयम्). Fs मुग्धे केयं धनुष्मंती. 6 ) Fs ह्यपूर्वा ; J2 अपूर्व ; G1 M3 पूर्वता ( for
अपूर्वा ). B2 DF 3.5 H10 $ ( except X X4 ) त्वयि ( Wat.v. [अ]पि च; T1 दृशि ) ( for
सव). H10 विद्यते. ● ) B1 Eo F3 He W यथा; C यतो ( for यया ). D Y2 विंध्यसि;
Y7
 
Eo. 1. 5 ( and Ec ) F2 H2 M1.3 विध्यति; W1 विंधसि; W2-1 हविषि (Wat.v. वध्वंसि;
) 2
विध्वंसि (for विध्यसि ). Jit चित्तांसि. d ) Yo गणैरेव.
 
BIS. 4892 ( 2214 ) Bhartr ed. Bohl. 1. 13. Haeb. 15. lith ed. II. 76. Satakäv.
63. Subhāsh. 13; Śp. 3654; SRB p. 312 1; SBH. 2025; SK.M. 74. 18; Sabhyalai
karapa f. 3&; SLP. 5.12 ( Bh. ).
 
24-8.8
 
134 Om. in C ( but C2_388 ).
a) T8 स्फुलदमल- A2 Eo. 13-5 YT
शशिधरः; Fs lacuna; G+ च शयनं ( for शशधर: ). - 4 ) B1H -रजश्वारु; DY4.1 02-2
-रसवाति-; E1. 2 Ts - रजसश्वाति-; Fs - रसः कांति-; It रसश्चापि; J1 रसलाह- ( for रजश्चाति-).
Ea F4.6 Y1c.v. 2.4–6, 8T1.2 G1 M1. 2.5 सुरभि - ) AD हृयामोदस्; Jat मृथामोदास्.
Fs संगिनि (for रागिणि). – d ) J1 Y1 करोत्यंतक्षोभं D Est Fa ननु; Get नव- ( for न तु).
He पुनः (for विषय ). A1c -संवर्ग ( for संसर्ग-). Eo -विमुषैः; J1 -विमुखेः; X1 -विमुखा.
BIS. 7106 (3268) Bhartṛ. ed. Bohl. and lith, ed. III. 1. 40. Haeb. 43. lith.
ed. II. 87; SLP.5.25 ( Bh. ).
 
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