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२२
 
भर्तृहरिसुभाषितसंग्रहे
 
दानं भोगो नाशस् तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य ।

यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति ॥ ५० ॥

 
यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः स पण्डितः स श्रुतवान् गुणज्ञः ।

स एव वक्ता स च दर्शनीयः सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति॥५१॥

 
रत्नैर्महार्घैस् तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम् ।

सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद् विरमन्ति धीराः॥५२॥

 
सन्त्यन्येऽपि बृहस्पतिप्रभृतयः संभाविताः पञ्चषास्

तान् प्रत्येष विशेषविक्रमरुची राहुर्न वैरायते ।
 
50
 
a
 
2 ) H2 X विनाशस्; W2-4 नाशश्च ; G4 नाशास् ( for नाशस् ). – 6 ) J2 हि तस्य
( for वित्तस्य ). - c ) J3 यो ;
c ) J3 यो ; Ts यन्न ( for यो न ). [ यन्न is the grammatically correct
form, unless one takes तस्य तस्य वित्तस्य ( in 4 ) ] D भुंक्ते ; E3 न भुक्ते; X 1 न हि भुंके
( for न भुङ्क्ते ). Fs यो न दाति न च भुक्ते. – d) J1 तस्यापि (for तस्य ). J2 त्रितया (for
तृतीया ). X 1 भवंति.
 
-
 
BIS. 2757 (1134 ) Bhartr ed. Bohl. 2. 35. Haeb. 63. lith ed. I. 42. Galan 45.
Pañc. ed. koseg. II. 159. ed. Bomb 148. Hit. ed. Johns. I. 172. Prasaigābh. 7;
Śp. 390; SRB. p. 69. 15; SBH. 478; SRK. p. 63. 4 ( Bh. ) ; Vikramacaritra 72;
ST. 42. 5; Prabandhacintānani 5. 264; cf. Tantrākhyāyikā 110 and SA 18.5;
SHV. f. 70b, 86a; SS. 17. 14; SK 2 154; SU. 1498; PT. 6. 8; SN. 463; SSD. 2.
f. 135a ; JSV. 146 7; SKG f. 12a.
 

 
Y7
 
Y1 पित्तं ( for विसं ),
पित्तं ( for वित्तं ), and तु लीम: ( for कुलीनः ).
श्रुतवान् ). Fat.v. विनीत: ( for गुणज्ञ: ). - ²)
जना: ( for गुणा: ). F1.2 G14 M12
 
2
 
51 ) Est यस्यास्थि (for °स्ति ).
Est_F'± (t.v. as in text ) श्रुतिमान् ( for
Eat युक्ता ( for वक्ता ). – 4 ) Eot Y Ta G1. 4
Y7
आश्रयंते; X7 आाहरंति.
 
BIS, 5414 (2447 ) Bhartr ed. Bobl. 2. 33. Haeb 64. lith ed. I. 40, II. 41,
Galan 44. Prasangābh. 12. Subhāsh. 32. Carr. 452. Vikramacaritra 152; Sp. 333
(Bh. ) ; SRB. p. 64. 9 ( Bh. ) ; SRK. p. 44. 6 ( Bh. ) ; SA 114. 3; ST. 41. 7;
Padyaracanā ( KM 89, p. 111 41, Bh. ) ; VS. 306 ( Bh. ) ; SHV. f. 678 ( Bh. ) &nd
82&; SS. 39. 1 ; SK. 2169; PT. 5. 1 ; SM. 1155; 8SD. 2. f. 105&; SSV. 1141;
SMV. 4. 12.
 
2
 
52 ) BI महास; DF2W Y1 ( printed text ) महास; Eo. 2.5 Xat महार्थेस;
F3 महद्भिस्; J Y2-4 TGM महाब्धेस् (for महाधैँस् ). J तु न तुपुर् (sic ) ( for तुतुषुरू).
— 4 ) F2 J 3 G+ भीमविशेष- (for 'विषेण ). M2 भीतिः . - ° ) W8 स्वधां ( for सुधां ). Y1
नैव
ययुर्; Gst संप्रययुर् ( for न प्रययुर् ). Yo विकास ( for विरामं ). d) C न निश्चयार्थाद
Est Fs J10 विनिश्चितार्थाद्; J3 M1.4.5 सु ( J3 M1 न ) निश्चितार्था ; Y7 सनिश्चितार्थाद् ( for
न निश्चितार्थाद् ). F+ संतः ( for धीराः).
 

 
BIS. 5707 (2585 ) Bhartr. ed. Bohl. 2. 72. Haeb. 65 lith ed. I and III. 79,
II and Galan 81; SRB p. 77. 10; PT. 7. 14; SSD. 2. f. 99.
 
53 * Om.in BORI 329 and Ujjain 6414. (a ) C सत्यन्ये च; J सत्यं नैव; Ga
संत्येवात्र ( for सन्त्यन्त्येऽपि ). Y1B -प्रभृतिभिः ( for 'तयः ). Eo. 1.6 [भ]संभाविनः; Fa
[[भ]]संभाविताः (for संभा). D पंचशस्; J2.8 पंचवस्; Ya (m.v as in text) निर्जर(सः I