Reports » सूर्यशतकम्
Updated 2026-02-22 23:41
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Singleton <head> and <trailer> slugs end with .head / .trailer — N/A (0/0)
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Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' ✓ Passed (101/101)
Text
Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (499/505)
Unexpected character ':' in text <न्यक्कुर्वन्नोषधीशे मुषितरुचि शुचेवौषधी: प्रोषिताभा>
<l>न्यक्कुर्वन्नोषधीशे मुषितरुचि शुचेवौषधी: प्रोषिताभा</l>
Unexpected character ':' in text <आयान्ती किं सुमेरो: सरणिररुणिता पाद्मरागैः परागै->
<l>आयान्ती किं सुमेरो: सरणिररुणिता पाद्मरागैः परागै-</l>
Unexpected character ':' in text <याति व्यक्तिं पुरस्तादरुणकिसलये प्रत्युष:पारिजाते ।>
<l>याति व्यक्तिं पुरस्तादरुणकिसलये प्रत्युष:पारिजाते ।</l>
Unexpected character ':' in text <पाशानाशान्तपालादरुण वरुणतो मा ग्रही: प्रग्रहार्थं>
<l>पाशानाशान्तपालादरुण वरुणतो मा ग्रही: प्रग्रहार्थं</l>
Unexpected character ':' in text <प्रत्युप्तस्तप्तहेमोज्ज्वलरुचिरचल: पद्मरागेण येन>
<l>प्रत्युप्तस्तप्तहेमोज्ज्वलरुचिरचल: पद्मरागेण येन</l>
Unexpected character '[' in text <[ श्लोका लोकस्य भूत्यै शतमिति रचिताः श्रीमयूरेण भक्त्या>
<l>[ श्लोका लोकस्य भूत्यै शतमिति रचिताः श्रीमयूरेण भक्त्या</l>
No leading or trailing spaces in text elements ✓ Passed (404/404)
Verse numbers match `n` attribute ⚠ Partial (98/101)
Verse number mismatch. (expected '15', saw '19')
<lg n="15"> <l>तन्वाना दिग्वधूनां समधिकमधुरालोकरम्यामवस्था-</l> <l>मारूढप्रौढिलेशोत्कलितकपिलिमालंकृतिः केवलैव ।</l> <l>उज्जृम्भाम्भोजनेत्रद्युतिनि दिनमुखे किंचिदुद्भिद्यमाना</l> <l>श्मश्रुश्रेणीव भासां दिशतु दशशती शर्म घर्मत्विषो वः ॥ १९ ॥</l> </lg>
Verse number mismatch. (expected '45', saw '19')
<lg n="45"> <l>प्लुष्टाः पृष्ठेंऽशुपातैरतिनिकटतया दत्तदाहातिरेकै-</l> <l>रेकाहाक्रान्तकृत्स्नत्रिदिवपथपृथुश्वासशोषाः श्रमेण ।</l> <l>तीव्रोदन्यास्त्वरन्तामहितविहतये सप्तयः सप्तसप्ते -</l> <l>रभ्याशाकाशगङ्गाजलसरलगलावाङ्मताग्रानना वः ॥ १९ ॥</l> </lg>
Verse number mismatch. (expected '58', saw '18')
<lg n="58"> <l>वज्रिञ्जातं विकासीक्षणकमलवनं भासि नाभासि वह्ने</l> <l>तातं नत्वाश्वपार्श्वान्नय यम महिषं राक्षसा वीक्षिताः स्थ ।</l> <l>सप्तीन्सिञ्च प्रचेतः पवन भज जवं वित्तपावेदितस्त्वं</l> <l>वन्दे शर्वेति जल्पन्प्रतिदिशमधिपान्पातु पूष्णोऽग्रणीर्वः ॥ १८ ॥</l> </lg>
Meter
All verses have a known meter ⚠ Partial (72/101)
Verse 2
<lg n="2"> <l>भक्तिप्रदाय दातुं मुकुलपुटकुटीकोटरक्रोडलीनां</l> <l>लक्ष्मीमाक्रष्टुकामा इव कमलवनोद्धाटनं कुर्वते ये ।</l> <l>कालाकारान्धकाराननपतितजगत्साध्वसध्वंसकल्याः</l> <l>कल्याणं वः क्रियासुः किसलयरुचयस्ते करा भास्करस्य ॥ २ ॥</l> </lg>
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Verse 7
<lg n="7"> <l>बिभ्राणा वामनत्वं प्रथममथ तथैवांशवः प्रांशवो वः</l> <l>क्रान्ताकाशान्तरालास्तदनु दशदिशः पूरयन्तस्ततोऽपि ।</l> <l>ध्वान्तादाच्छिद्य देवद्विष इव बलितो विश्वमाश्वनुवानाः</l> <l>कृच्छ्राण्युच्छ्रायहेलोपहसितहरयो हारिदश्वा हरन्तु ॥ ७ ॥</l> </lg>
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Verse 8
<lg n="8"> <l>उद्गाटेनारुणिम्रा विदधति बहुलं येऽरुणस्यारुणत्वं</l> <l>मूर्धोद्धूतौ खलीनक्षतरुधिररुचो ये रथाश्वाननेषु ।</l> <l>शैलानां शेखरत्वं श्रितशिखरिशिखास्तन्वते ये दिशतु</l> <l>प्रेङ्खन्तः खे खरांशोः खचितदिनमुखास्ते मयूखाः सुखं वः ॥ ८ ॥</l> </lg>
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Verse 10
<lg n="10"> <l>बन्धध्वंसैकहेतुं शिरसि नतिरसाबद्धसंध्याञ्जलीनां</l> <l>लोकानां ये प्रबोधं विदधति विपुलाम्भोजखण्डाशयेव ।</l> <l>युष्माकं ते स्वचित्तप्रथितष्टथुतरप्रायार्थनाकल्पवृक्षाः</l> <l>कल्पन्तां निर्विकल्पं दिनकरकिरणाः केतवः कल्मषस्य ॥ १० ॥</l> </lg>
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Verse 16
<lg n="16"> <l>मौलीन्दोर्मैष मोषीद्द्यु तिमिति वृषभाङ्केन यः शङ्किनेव</l> <l>प्रत्यग्रोद्धाटिताम्भोरुहकुहरगुहासुस्थितेनेव धात्रा ।</l> <l>कृष्णेन ध्वान्तकृष्णस्वतनुपरिभवत्रस्नेुनेव स्तुतोऽलं</l> <l>त्राणाय स्तात्तनीयानपि तिमिररिपोः स त्विषामुद्गमो वः ॥ १६ ॥</l> </lg>
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Verse 22
<lg n="22"> <l>क्ष्मां क्षेपीयः क्षपाम्भःशिशिरतरजलस्पर्शतर्षादृतेव</l> <l>द्रागाशा नेतुमाशाद्विरदकरसरःपुष्कराणीव बोधम् ।</l> <l>प्रातः प्रोल्लङ्घ्य विष्णोः पदमपि घृणयेवातिवेगाद्दवीय-</l> <l>स्युद्दामं द्योतमाना दहतु दिनपतेर्दुर्निमित्तं द्युतिर्वः ॥ २२ ॥</l> </lg>
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द्यु
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Verse 24
<lg n="24"> <l>निःशेषाशावपूरप्रवणगुरुगुणश्लाघनीयस्वरूपा</l> <l>पर्याप्तं नोदयादौ दिनगमसमयोप्लवेऽप्युन्नतैव ।</l> <l>अत्यन्तं यानभिज्ञा क्षणमपि तमसा साकमेकत्र वस्तुं</l> <l>ब्रध्नस्येद्धा रुचिर्वो रुचिरिव रुचितस्याप्तये वस्तुनोऽस्तु ॥ २४ ॥</l> </lg>
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Verse 26
<lg n="26"> <l>ज्योत्स्नांशाकर्षपाण्डुद्युति तिमिरमषीशेषकल्माषमीष-</l> <l>ज्जृम्भोद्भूतेन पिङ्गं सरसिजरजसा संध्यया शोणशोचिः ।</l> <l>प्रातः प्रारम्भकाले सकलमपि जगच्चित्रमुन्मीलयन्ती</l> <l>कान्तिस्तीक्ष्णत्विषोऽक्ष्णां मुदमुपनयतात्तूलिकेवातुलां वः ॥ २६ ॥</l> </lg>
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षी
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ल्मा
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ष
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ष
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ज्जृ
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म्भो
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द्भू
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ते
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न
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शो
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तः
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Verse 36
<lg n="36"> <l>गन्धर्वैर्गद्यपद्यव्यतिकरितवचोहृद्यमातोद्यवाद्यै-</l> <l>राद्यैर्यो नारदाद्यैर्मुनिभिरभिनुतो वेदवेद्यैर्विभिद्य ।</l> <l>आसाद्यापद्यते यं पुनरपि च जगद्यौवनं सद्य उद्य-</l> <l>न्नुद्द्योतो द्योतितद्यौर्द्यतु दिवसकृतोऽसाववद्यानि वोऽद्य ॥ ३६ ॥</l> </lg>
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ग
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न्ध
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र्वै
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र्ग
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द्य
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र्मु
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G
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व
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व
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द्या
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वो
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द्य
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Verse 42
<lg n="42"> <l>अस्ताद्रीशोत्तमाङ्गे श्रितशशिनि तमःकालकूटे निपीते</l> <l>याति व्यक्तिं पुरस्तादरुणकिसलये प्रत्युष:पारिजाते ।</l> <l>उद्यन्त्यारक्तपीताम्बरविशदतरोद्वीक्षिता तीक्ष्णभानो-</l> <l>र्लक्ष्मीर्लक्ष्मीरिवास्तु स्फुटकमलपुटापाश्रया श्रेयसे वः ॥ ४२ ॥</l> </lg>
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अ
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स्ता
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द्री
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शो
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त्त
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मा
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ङ्गे
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श्रि
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त
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शि
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मः
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पु
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कि
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र
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क्त
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द्वी
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क्षि
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ता
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ती
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क्ष्ण
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र्ल
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क्ष्मी
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क्ष्मी
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पु
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श्रे
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य
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वः
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Verse 44
<lg n="44"> <l>रक्षन्त्वक्षुण्णहेमोपलपटलमलं लाघवादुत्पतन्तः</l> <l>पातङ्गाः पङ्ग्वज्ञाजितपवनजवा वाजिनस्ते जगन्ति ।</l> <l>येषां वीतान्यचिह्नोन्नयमपि वहतां मार्गमाख्याति मेरा-</l> <l>वुद्यन्नुद्दामदीप्तिर्द्युमणिमणिशिलावेदिकाजातवेदाः ॥ ४४ ॥</l> </lg>
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न्त्व
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का
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Verse 46
<lg n="46"> <l>मत्वान्यान्पार्श्वतोऽश्वान्स्फटिकतटदृषदृृष्टदेहा द्रवन्ती</l> <l>व्यस्तेऽहन्यस्तसंध्येयमिति मृदुपंदा पद्मरागोपलेषु ।</l> <l>सादृश्यादृश्यमूर्तिर्मरकतकटके क्लिष्टसूृता सुमेरो-</l> <l>मूर्धन्यावृत्तिलब्धध्रुवगतिरवतु ब्रघ्नवाहावलिर्वः ॥ ४६ ॥</l> </lg>
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म
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G
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र्वः
G
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Verse 48
<lg n="48"> <l>मार्गोपान्ते सुमेरोर्नुवति कृतनतौ नाकधाम्नां निकाये</l> <l>वीक्ष्य त्रीडानतानां प्रतिकुहरमुखं किंनरीणां मुखानि ।</l> <l>सूतेऽसूयत्यपीषज्जडगति वहतां कंधराधैर्वलद्भि-</l> <l>र्वाहानां व्यस्यताद्वः सममसमहरेर्हेषितं कल्मषाणि ॥ ४८ ॥</l> </lg>
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मा
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र्गो
G
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सु
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G
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G
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G
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धै
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र्व
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ल
G
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द्भि
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G
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G
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ह
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षि
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तं
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क
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ल्म
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षा
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Verse 50
<lg n="50"> <l>प्रातःशैलाग्ररङ्गे रजनिजवनिकापायसंलक्ष्यलक्ष्मी-</l> <l>र्विक्षिप्यापूर्वपुष्पाञ्जलिमुड्डुनिकरं सूत्रधारायमाणः ।</l> <l>यामेष्वङ्केष्विवाह्नः कृतरुचिषु चतुर्ष्वेव जातप्रतिष्ठा-</l> <l>मव्यात्प्रस्तावयन्वो जगदटनमहानाटिकां सूर्यसूतः ॥ ५० ॥</l> </lg>
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प्रा
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ग्र
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तु
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र्ष्वे
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सू
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र्य
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सू
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Verse 53
<lg n="53"> <l>मुञ्चन्रश्मीन्दिनादौ दिनगमसमये संहरंश्च स्वतन्त्र-</l> <l>स्तोत्रप्रख्यातवीर्योऽविरतहरिपदाक्रान्तिबद्धाभियोगः ।</l> <l>कालोत्कर्षाल्लघुत्वं प्रसभमधिपतौ योजयन्यो द्विजानां</l> <l>सेवाप्रीतेन पूष्णात्मसम इव कृतस्त्रायतां सोऽरुणो वः ॥ ५३ ॥</l> </lg>
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मु
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ञ्च
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न्र
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श्मी
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न्दि
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म
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ह
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G
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न्ति
L
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G
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G
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गः
G
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का
G
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लो
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त्क
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G
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G
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य
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तां
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सो
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Verse 57
<lg n="57"> <l>नीत्वाश्वान्सप्त कक्षा इव नियमवशं वेत्रकल्पप्रतोद -</l> <l>स्तूर्णं ध्वान्तस्य राशावितरजन इवोत्सारिते दूरभाजि ।</l> <l>पूर्वं प्रष्ठो रथस्य क्षितिभृदधिपतीन्दर्शयंस्त्रायतां व-</l> <l>स्त्रैलोक्यास्थानदानोद्यतदिवसपतेः प्राक्प्रतीहारपालः ॥ ५७ ॥</l> </lg>
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नी
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त्वा
G
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श्वा
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प्त
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क
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त्सा
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र्वं
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प्र
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ष्ठो
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स्य
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क्षि
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ति
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भृ
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द
L
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धि
L
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प
L
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ती
G
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न्द
G
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र्श
L
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यं
G
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स्त्रा
G
|
य
L
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तां
G
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व
L
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स्त्रै
G
|
लो
G
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क्या
G
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स्था
G
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न
L
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दा
G
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नो
G
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द्य
L
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त
L
|
दि
L
|
व
L
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स
L
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प
L
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तेः
G
|
प्रा
G
|
क्प्र
L
|
ती
G
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हा
G
|
र
L
|
पा
G
|
लः
G
|
Verse 64
<lg n="64"> <l>योक्रीभूतान्युगस्य ग्रसितुमिव पुरो दन्दशकान्दधानो</l> <l>द्वेधाव्यस्ताम्बुवाहावलिविहितबृहत्पक्षविक्षेपशोभः ।</l> <l>सावित्रः स्यन्दनोऽसौ निरतिशयरयप्रीणितानूरुरेनः-</l> <l>क्षेपीयो वो गरुत्मानिव हरतु हरीच्छाविधेयप्रचारः ॥ ६४ ॥</l> </lg>
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यो
G
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क्री
G
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भू
G
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ता
G
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न्यु
L
|
ग
G
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स्य
G
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ग्र
L
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सि
L
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तु
L
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मि
L
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व
L
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पु
L
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G
|
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G
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न्द
L
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श
L
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का
G
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न्द
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धा
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नो
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द्वे
G
|
धा
G
|
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G
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स्ता
G
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म्बु
L
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वा
G
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हा
G
|
व
L
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L
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वि
L
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हि
L
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त
L
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L
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ह
G
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त्प
G
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क्ष
L
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वि
G
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क्षे
G
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प
L
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शो
G
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भः
G
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|
सा
G
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वि
G
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त्रः
G
|
स्य
G
|
न्द
L
|
नो
G
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सौ
G
|
नि
L
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र
L
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ति
L
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श
L
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य
L
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र
L
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य
G
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प्री
G
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णि
L
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ता
G
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नू
G
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रु
L
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रे
G
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नः
G
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क्षे
G
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पी
G
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यो
G
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वो
G
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ग
L
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रु
G
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त्मा
G
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नि
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व
L
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ह
L
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तु
L
|
ह
L
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री
G
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च्छा
G
|
वि
L
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धे
G
|
य
G
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प्र
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चा
G
|
रः
G
|
Verse 65
<lg n="65"> <l>एकाहेनैव दीर्घां त्रिभुवनपदवीं लङ्घयन्यो लविष्ठः</l> <l>पृष्ठे मेरोर्गरीयान्दलितमणिदृषविषि पिंषञ्शिरांसि ।</l> <l>सर्वस्यैवोपरिष्टादथ च पुनरधस्तादिवास्ताद्रिमूर्ध्नि</l> <l>ब्रघ्नस्याव्यात्स एवं दुरधिगमपरिस्पन्दनः स्यन्दनो वः ॥ ६५ ॥</l> </lg>
|
ए
G
|
का
G
|
हे
G
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नै
G
|
व
L
|
दी
G
|
र्घां
G
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त्रि
L
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भु
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व
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न
L
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प
L
|
द
L
|
वीं
G
|
ल
G
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ङ्घ
L
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य
G
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न्यो
G
|
ल
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वि
G
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ष्ठः
G
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|
पृ
G
|
ष्ठे
G
|
मे
G
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रो
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र्ग
L
|
री
G
|
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G
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न्द
L
|
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L
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त
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म
L
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णि
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L
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ष
L
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वि
L
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षि
L
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पिं
G
|
ष
G
|
ञ्शि
L
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रां
G
|
सि
L
|
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स
G
|
र्व
G
|
स्यै
G
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वो
G
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प
L
|
रि
G
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ष्टा
G
|
द
L
|
थ
L
|
च
L
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पु
L
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न
L
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र
L
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G
|
स्ता
G
|
दि
L
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वा
G
|
स्ता
G
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द्रि
L
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मू
G
|
र्ध्नि
G
|
|
ब्र
G
|
घ्न
G
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स्या
G
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व्या
G
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त्स
L
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ए
G
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G
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दु
L
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L
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धि
L
|
ग
L
|
म
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प
L
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रि
G
|
स्प
G
|
न्द
L
|
नः
G
|
स्य
G
|
न्द
L
|
नो
G
|
वः
G
|
Verse 66
<lg n="66"> <l>धूर्ध्वस्ताग्र्यग्रहाणि ध्वजपटपवनान्दोलितेन्दूनि दूरं</l> <l>राहौ ग्रासाभिलाषादनुसरति पुनर्दत्तचक्रव्यथानि ।</l> <l>श्रान्ताश्वश्वासहेलाधुतविबुधधुननिर्झराम्भांसि भद्रं</l> <l>देयासुर्वो दवीयो दिवि दिवसपतेः स्यन्दनप्रस्थितानि ॥ ६६ ॥</l> </lg>
|
धू
G
|
र्ध्व
G
|
स्ता
G
|
ग्र्य
G
|
ग्र
L
|
हा
G
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णि
G
|
ध्व
L
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ज
L
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प
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L
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प
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L
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G
|
न्दू
G
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G
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रं
G
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रा
G
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हौ
G
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G
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सा
G
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भि
L
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ला
G
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षा
G
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द
L
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नु
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स
L
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र
L
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L
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पु
L
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L
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व्य
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|
श्रा
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न्ता
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श्व
G
|
श्वा
G
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स
L
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हे
G
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ला
G
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धु
L
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त
L
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वि
L
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बु
L
|
ध
L
|
धु
L
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न
L
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नि
G
|
र्झ
L
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रा
G
|
म्भां
G
|
सि
L
|
भ
G
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द्रं
G
|
|
दे
G
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या
G
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सु
G
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र्वो
G
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द
L
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वी
G
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यो
G
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दि
L
|
वि
L
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दि
L
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व
L
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स
L
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प
L
|
तेः
G
|
स्य
G
|
न्द
L
|
न
G
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प्र
G
|
स्थि
L
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ता
G
|
नि
L
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Verse 73
<lg n="73"> <l>यज्ज्यायो बीजमह्नामपहततिमिरं चक्षुषामञ्जनं य-</l> <l>द्दूरं यन्मुक्तिभाजां यदखिलभुवनज्योतिषामेकमोकः ।</l> <l>यद्वृष्ट्यम्भोनिधानं धरणिरससुधापानपात्रं महद्य-</l> <l>द्दिश्यादीशस्य भासां तदविकलमलं मङ्गलं मण्डलं वः ॥ ७३ ॥</l> </lg>
|
य
G
|
ज्ज्या
G
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यो
G
|
बी
G
|
ज
L
|
म
G
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ह्ना
G
|
म
L
|
प
L
|
ह
L
|
त
L
|
ति
L
|
मि
L
|
रं
G
|
च
G
|
क्षु
L
|
षा
G
|
म
G
|
ञ्ज
L
|
नं
G
|
य
L
|
|
द्दू
G
|
रं
G
|
य
G
|
न्मु
G
|
क्ति
L
|
भा
G
|
जां
G
|
य
L
|
द
L
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खि
L
|
ल
L
|
भु
L
|
व
L
|
न
G
|
ज्यो
G
|
ति
L
|
षा
G
|
मे
G
|
क
L
|
मो
G
|
कः
G
|
|
य
G
|
द्वृ
G
|
ष्ट्य
G
|
म्भो
G
|
नि
L
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धा
G
|
नं
G
|
ध
L
|
र
L
|
णि
L
|
र
L
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स
L
|
सु
L
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धा
G
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पा
G
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न
L
|
पा
G
|
त्रं
G
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म
L
|
ह
G
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द्य
L
|
|
द्दि
G
|
श्या
G
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दी
G
|
श
G
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स्य
L
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भा
G
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सां
G
|
त
L
|
द
L
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वि
L
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क
L
|
ल
L
|
म
L
|
लं
G
|
म
G
|
ङ्ग
L
|
लं
G
|
म
G
|
ण्ड
L
|
लं
G
|
वः
G
|
Verse 74
<lg n="74"> <l>वेलावर्धिष्णु सिन्धोः पय इव खमिवार्धोद्गताग्र्यग्रहोडु</l> <l>स्तोकोद्भिन्नस्य चिहप्रसवमिव मधोरास्यमस्यन्मनांसि ।</l> <l>प्रातः पूष्णोऽशुभानि प्रशमयतु शिरःशेखरीभूतमद्रेः</l> <l>पौरस्त्यस्योद्गभस्तिस्तिमिततमतमःखण्डनं मण्डलं वः ॥ ७४ ॥</l> </lg>
|
वे
G
|
ला
G
|
व
G
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र्धि
G
|
ष्णु
L
|
सि
G
|
न्धोः
G
|
प
L
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य
L
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इ
L
|
व
L
|
ख
L
|
मि
L
|
वा
G
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र्धो
G
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द्ग
L
|
ता
G
|
ग्र्य
G
|
ग्र
L
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हो
G
|
डु
G
|
|
स्तो
G
|
को
G
|
द्भि
G
|
न्न
G
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स्य
L
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चि
L
|
ह
G
|
प्र
L
|
स
L
|
व
L
|
मि
L
|
व
L
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म
L
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G
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रा
G
|
स्य
L
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म
G
|
स्य
G
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न्म
L
|
नां
G
|
सि
L
|
|
प्रा
G
|
तः
G
|
पू
G
|
ष्णो
G
|
शु
L
|
भा
G
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नि
G
|
प्र
L
|
श
L
|
म
L
|
य
L
|
तु
L
|
शि
L
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रः
G
|
शे
G
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ख
L
|
री
G
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भू
G
|
त
L
|
म
G
|
द्रेः
G
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पौ
G
|
र
G
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स्त्य
G
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स्यो
G
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द्ग
L
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भ
G
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स्ति
G
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स्ति
L
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मि
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त
L
|
त
L
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म
L
|
त
L
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मः
G
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ख
G
|
ण्ड
L
|
नं
G
|
म
G
|
ण्ड
L
|
लं
G
|
वः
G
|
Verse 75
<lg n="75"> <l>प्रत्युप्तस्तप्तहेमोज्ज्वलरुचिरचल: पद्मरागेण येन</l> <l>ज्यायः किंजल्कपुञ्जो यदलिकुलशितेरम्बरेन्दीवरस्य ।</l> <l>कालव्यालस्य चिह्नं महिततममहोमूर्ध्नि रत्नं महद्य-</l> <l>द्दीप्तांशोः प्रातरव्यात्तदविकलजगन्मण्डनं मण्डलं वः ॥ ७५ ॥</l> </lg>
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प्र
G
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त्यु
G
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प्त
G
|
स्त
G
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प्त
L
|
हे
G
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मो
G
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ज्ज्व
L
|
ल
L
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रु
L
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चि
L
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र
L
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च
L
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ल
L
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प
G
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L
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रा
G
|
गे
G
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ण
L
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G
|
न
G
|
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G
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यः
G
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G
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ज
G
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ल्क
L
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पु
G
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ञ्जो
G
|
य
L
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द
L
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कु
L
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ल
L
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शि
L
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ते
G
|
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म्ब
L
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रे
G
|
न्दी
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|
व
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|
र
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|
स्य
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|
|
का
G
|
ल
G
|
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G
|
ल
G
|
स्य
L
|
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ह्नं
G
|
म
L
|
हि
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|
त
L
|
त
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म
L
|
म
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G
|
मू
G
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र्ध्नि
L
|
र
G
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G
|
म
L
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ह
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G
|
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G
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क
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ल
L
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L
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ग
G
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न्म
G
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ण्ड
L
|
नं
G
|
म
G
|
ण्ड
L
|
लं
G
|
वः
G
|
Verse 76
<lg n="76"> <l>कस्त्राता तारकाणां पतति तनुरवश्यायबिन्दुर्यथेन्दु-</l> <l>विद्राणा दृक्स्मरारेरुरसि मुररिपोः कौस्तुभो नोद्गभस्तिः ।</l> <l>वह्नेः सापह्नवेव द्युतिरुदयगते यत्र तन्मण्डलं वो</l> <l>मार्तण्डीयं पुनीताद्दिवि भुवि च तमांसीव मुष्णन्महांसि ॥ ७६ ॥</l> </lg>
|
क
G
|
स्त्रा
G
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ता
G
|
ता
G
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र
L
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का
G
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णां
G
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प
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L
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L
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त
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L
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G
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य
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|
बि
G
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न्दु
G
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र्य
L
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G
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न्दु
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वि
G
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द्रा
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णा
G
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दृ
G
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क्स्म
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रा
G
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रे
G
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रु
L
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र
L
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सि
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मु
L
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र
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L
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पोः
G
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कौ
G
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स्तु
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G
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नो
G
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द्ग
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भ
G
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स्तिः
G
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व
G
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ह्नेः
G
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सा
G
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प
G
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L
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वे
G
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व
G
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द्यु
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ति
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रु
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य
L
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ग
L
|
ते
G
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य
G
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त्र
L
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त
G
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न्म
G
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ण्ड
L
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लं
G
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वो
G
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|
मा
G
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र्त
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ण्डी
G
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यं
G
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पु
L
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G
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ता
G
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द्दि
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वि
L
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भु
L
|
वि
L
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च
L
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त
L
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मां
G
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सी
G
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व
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|
मु
G
|
ष्ण
G
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न्म
L
|
हां
G
|
सि
L
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Verse 80
<lg n="80"> <l>चक्षुर्दक्षद्विषो यर्न् तु दहति पुरः पूरयत्येव कामं</l> <l>नास्तं जुष्टं मरुद्भिर्यदिह नियमिनां यानपात्रं भवाब्धौ ।</l> <l>यद्वीतश्रान्ति शश्वद्भद्रमदपि जगतां भ्रान्तिमभ्रान्ति हन्ति</l> <l>ब्रध्नस्याव्याद्विरुद्धक्रियमथ च हिताधायि तन्मण्डलं वः ॥ ८० ॥</l> </lg>
|
च
G
|
क्षु
G
|
र्द
G
|
क्ष
G
|
द्वि
L
|
षो
G
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य
G
|
र्न्तु
L
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द
L
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ह
L
|
ति
L
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पु
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रः
G
|
पू
G
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L
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य
G
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त्ये
G
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व
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मं
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G
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स्तं
G
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जु
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ष्टं
G
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म
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रु
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द्भि
G
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र्य
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दि
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ह
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नि
L
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य
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मि
L
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नां
G
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या
G
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न
L
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पा
G
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त्रं
G
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भ
L
|
वा
G
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ब्धौ
G
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|
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य
G
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द्वी
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त
G
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श्रा
G
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न्ति
L
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श
G
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श्व
G
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द्भ
G
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द्र
L
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म
L
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द
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पि
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ज
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ग
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तां
G
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भ्रा
G
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न्ति
L
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म
G
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भ्रा
G
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न्ति
L
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ह
G
|
न्ति
G
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ब्र
G
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ध्न
G
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स्या
G
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व्या
G
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द्वि
L
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रु
G
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द्ध
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क्रि
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य
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म
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थ
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च
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हि
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ता
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धा
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यि
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त
G
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न्म
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ण्ड
L
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लं
G
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वः
G
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Verse 86
<lg n="86"> <l>क्रामँल्लोलोऽपि लोकाँस्तदुपकृतिकृतावाश्रितः स्थैर्यकोटिं</l> <l>नृृणां दृष्टिं विजिह्मां विदधदपि करोत्यन्तरत्यन्तभद्राम् ।</l> <l>यस्तापस्यापि हेतुर्भवति नियमिनामेकनिर्वाणदायी</l> <l>भूयात्स प्रागवस्थाधिकतरपरिणामोदयोऽर्कः श्रिये वः ॥ ८६ ॥</l> </lg>
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क्रा
G
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म
G
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ल्लो
G
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लो
G
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पि
L
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लो
G
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का
G
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स्त
L
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दु
L
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प
L
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कृ
L
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ति
L
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कृ
L
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ता
G
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वा
G
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श्रि
L
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तः
G
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स्थै
G
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र्य
L
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को
G
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टिं
G
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|
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नृ
L
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ऋ
L
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णां
G
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दृ
G
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ष्टिं
G
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वि
L
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जि
G
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ह्मां
G
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वि
L
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द
L
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ध
L
|
द
L
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पि
L
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क
L
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रो
G
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त्य
G
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न्त
L
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र
G
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त्य
G
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न्त
L
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भ
G
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द्राम्
G
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य
G
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स्ता
G
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प
G
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स्या
G
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पि
L
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हे
G
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तु
G
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र्भ
L
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व
L
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ति
L
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नि
L
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य
L
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मि
L
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ना
G
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मे
G
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क
L
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नि
G
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र्वा
G
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ण
L
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दा
G
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यी
G
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भू
G
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या
G
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त्स
G
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प्रा
G
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ग
L
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व
G
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स्था
G
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धि
L
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क
L
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त
L
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र
L
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प
L
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रि
L
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णा
G
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मो
G
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द
L
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यो
G
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र्कः
G
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श्रि
L
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ये
G
|
वः
G
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Verse 87
<lg n="87"> <l>व्यापन्नर्तुर्न कालो व्यभिचरति फलं नौषधीर्वृष्टिरिष्टा</l> <l>नेष्टैस्तृप्यन्ति देवा नहि वहति मरुन्निर्मलाभानि भानि ।</l> <l>आशाः शान्ता न भिन्दत्यवधिमुदधयो बिभ्रति क्ष्माभृतः क्ष्मां</l> <l>यस्मिंस्त्रैलोक्यमेवं न चलति तपति तात्स सूर्यः श्रिये वः ॥ ८७ ॥</l> </lg>
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व्या
G
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प
G
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न्न
G
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र्तु
G
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र्न
L
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का
G
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लो
G
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व्य
L
|
भि
L
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च
L
|
र
L
|
ति
L
|
फ
L
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लं
G
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नौ
G
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ष
L
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धी
G
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र्वृ
G
|
ष्टि
L
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रि
G
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ष्टा
G
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ने
G
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ष्टै
G
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स्तृ
G
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प्य
G
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न्ति
L
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दे
G
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वा
G
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न
L
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हि
L
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व
L
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ह
L
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ति
L
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म
L
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रु
G
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न्नि
G
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र्म
L
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ला
G
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भा
G
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नि
L
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भा
G
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नि
L
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आ
G
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शाः
G
|
शा
G
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न्ता
G
|
न
L
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भि
G
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न्द
G
|
त्य
L
|
व
L
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धि
L
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मु
L
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द
L
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ध
L
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यो
G
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बि
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भ्र
L
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ति
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क्ष्मा
G
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भृ
L
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तः
G
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क्ष्मां
G
|
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य
G
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स्मिं
G
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स्त्रै
G
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लो
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क्य
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मे
G
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वं
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न
L
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च
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ल
L
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ति
L
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त
L
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प
L
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ति
L
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ता
G
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त्स
L
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सू
G
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र्यः
G
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श्रि
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ये
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वः
G
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Verse 91
<lg n="91"> <l>भूमिं धाम्नोऽभिवृष्ट्या जगति जलमयीं पावनीं संस्मृताव-</l> <l>प्याग्नेयीं दाहशक्त्या मुहुरपि यजमानां यथाप्रार्थितार्यैः ।</l> <l>लीनामाकाश एवामृतकरघटितां ध्वान्तपक्षस्य पर्व-</l> <l>ण्येवं सूर्योऽष्टभेदां भव इव भवतः पातु बिभ्रत्स्वमूर्तिम् ॥ ९१ ॥</l> </lg>
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भू
G
|
मिं
G
|
धा
G
|
म्नो
G
|
भि
L
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वृ
G
|
ष्ट्या
G
|
ज
L
|
ग
L
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ति
L
|
ज
L
|
ल
L
|
म
L
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यीं
G
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पा
G
|
व
L
|
नीं
G
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सं
G
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स्मृ
L
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ता
G
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व
L
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प्या
G
|
ग्ने
G
|
यीं
G
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दा
G
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ह
L
|
श
G
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क्त्या
G
|
मु
L
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हु
L
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र
L
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पि
L
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य
L
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ज
L
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मा
G
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नां
G
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य
L
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था
G
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प्रा
G
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र्थि
L
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ता
G
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र्यैः
G
|
|
ली
G
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ना
G
|
मा
G
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का
G
|
श
L
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ए
G
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वा
G
|
मृ
L
|
त
L
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क
L
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र
L
|
घ
L
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टि
L
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तां
G
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ध्वा
G
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न्त
L
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प
G
|
क्ष
G
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स्य
L
|
प
G
|
र्व
L
|
|
ण्ये
G
|
वं
G
|
सू
G
|
र्यो
G
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ष्ट
L
|
भे
G
|
दां
G
|
भ
L
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व
L
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इ
L
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व
L
|
भ
L
|
व
L
|
तः
G
|
पा
G
|
तु
L
|
बि
G
|
भ्र
G
|
त्स्व
L
|
मू
G
|
र्तिम्
L
|
Verse 95
<lg n="95"> <l>तीर्थानि व्यर्थकानि हृदनदसरसीनिर्झराम्भोजिनीनां</l> <l>नोदन्वन्तो नुदन्ति प्रतिभयमशुभं श्वभ्रपातानुबन्धि ।</l> <l>आपो नाकापगाया अपि कलुषमुषो मज्जतां नैव यत्र</l> <l>त्रातुं यातेऽन्यलोकान्स दिशतु दिवसस्यैकहेतुर्हितं वः ॥ ९५ ॥</l> </lg>
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ती
G
|
र्था
G
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नि
G
|
व्य
G
|
र्थ
L
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का
G
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नि
L
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हृ
L
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द
L
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न
L
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द
L
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स
L
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र
L
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सी
G
|
नि
G
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र्झ
L
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रा
G
|
म्भो
G
|
जि
L
|
नी
G
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नां
G
|
|
नो
G
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द
G
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न्व
G
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न्तो
G
|
नु
L
|
द
G
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न्ति
G
|
प्र
L
|
ति
L
|
भ
L
|
य
L
|
म
L
|
शु
L
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भं
G
|
श्व
G
|
भ्र
L
|
पा
G
|
ता
G
|
नु
L
|
ब
G
|
न्धि
L
|
|
आ
G
|
पो
G
|
ना
G
|
का
G
|
प
L
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गा
G
|
या
G
|
अ
L
|
पि
L
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क
L
|
लु
L
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ष
L
|
मु
L
|
षो
G
|
म
G
|
ज्ज
L
|
तां
G
|
नै
G
|
व
L
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य
G
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त्र
G
|
|
त्रा
G
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तुं
G
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G
|
ते
G
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न्य
L
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लो
G
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का
G
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न्स
L
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L
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श
L
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तु
L
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दि
L
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व
L
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स
G
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स्यै
G
|
क
L
|
हे
G
|
तु
G
|
र्हि
L
|
तं
G
|
वः
G
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Verse 97
<lg n="97"> <l>द्वीपे योऽस्ताचलोऽस्मिन्भवति खलु स एवापरत्रोदयाद्रि-</l> <l>र्या यामिन्युज्ज्वलेन्दुद्युतिरिह दिवसोऽन्यत्र तीव्रातपः सः ।</l> <l>यद्वश्यौ देशकालाविति नियमयतो नो तु यं देशकाला-</l> <l>वव्यात्स स्वप्रभुत्वाहितभुवनहितो हेतुरह्नामिनो वः ॥ ९७ ॥</l> </lg>
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द्वी
G
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पे
G
|
यो
G
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स्ता
G
|
च
L
|
लो
G
|
स्मि
G
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न्भ
L
|
व
L
|
ति
L
|
ख
L
|
लु
L
|
स
L
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ए
G
|
वा
G
|
प
L
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र
G
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त्रो
G
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द
L
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या
G
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द्रि
L
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|
र्या
G
|
या
G
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मि
G
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न्यु
G
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ज्ज्व
L
|
ले
G
|
न्दु
G
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द्यु
L
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ति
L
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रि
L
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ह
L
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दि
L
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व
L
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सो
G
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न्य
G
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त्र
L
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ती
G
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व्रा
G
|
त
L
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पः
G
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सः
G
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|
य
G
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द्व
G
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श्यौ
G
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दे
G
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श
L
|
का
G
|
ला
G
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वि
L
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ति
L
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नि
L
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य
L
|
म
L
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य
L
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तो
G
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नो
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तु
L
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यं
G
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दे
G
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श
L
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का
G
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ला
G
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व
G
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व्या
G
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त्स
G
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स्व
G
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प्र
L
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भु
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त्वा
G
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हि
L
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त
L
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भु
L
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व
L
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न
L
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हि
L
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तो
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हे
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तु
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र
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ह्ना
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मि
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नो
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वः
G
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