Reports » सिद्धान्तशिखोपनिषत्
Updated 2026-02-22 23:42
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Text
Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (80/87)
Unexpected character ':' in text <ॐ अथ भारद्वाजः कुमारं पप्रच्छ । कोऽयं भवादृशानां परमशिवभक्तानां सिद्धान्तः । कुतः सर्वे न विदन्तीति । तद्गुह्यमुवाच स्कन्दः । भारद्वाज शृणु नाम क्वचिद्वदन्ति साम्बं सर्वदेवप्रकृष्टं शिवं वरेण्यं पक्वचित्ता: शिवस्य प्रसादतो ज्ञानमात्राद्विदन्ति ।>
<p n="p1">ॐ अथ भारद्वाजः कुमारं पप्रच्छ । कोऽयं भवादृशानां परमशिवभक्तानां सिद्धान्तः । कुतः सर्वे न विदन्तीति । तद्गुह्यमुवाच स्कन्दः । भारद्वाज शृणु नाम क्वचिद्वदन्ति साम्बं सर्वदेवप्रकृष्टं शिवं वरेण्यं पक्वचित्ता: शिवस्य प्रसादतो ज्ञानमात्राद्विदन्ति ।</p>
Unexpected character ':' in text <जन्मान्यनन्तानि विस्तीर्य भूयः शिवप्रसादाद्धृतपुण्यलेश: ।>
<l>जन्मान्यनन्तानि विस्तीर्य भूयः शिवप्रसादाद्धृतपुण्यलेश: ।</l>
Unexpected character 'r' in text <स्नानं त्रिपुण्ड्रस्य शिरोललाटवक्षःस्कन्धमणिबन्धेषु कूrpe ।>
<l>स्नानं त्रिपुण्ड्रस्य शिरोललाटवक्षःस्कन्धमणिबन्धेषु कूrpe ।</l>
Unexpected character ':' in text <द्वात्रिंशदुक्ता मणिबन्धयोश्च चतुर्विंशाः शतमष्टौ जपार्थम् । पुरा लीना: सृष्टिकालाच्छिवस्य पञ्चाक्षरे मन्त्रवर्ये समस्ताः । भूतानि पञ्च वेदा आगमाश्च शिवाल्लब्धोऽभून्मन्त्रवर्यो विधात्रा ॥>
<p n="p2">द्वात्रिंशदुक्ता मणिबन्धयोश्च चतुर्विंशाः शतमष्टौ जपार्थम् । पुरा लीना: सृष्टिकालाच्छिवस्य पञ्चाक्षरे मन्त्रवर्ये समस्ताः । भूतानि पञ्च वेदा आगमाश्च शिवाल्लब्धोऽभून्मन्त्रवर्यो विधात्रा ॥</p>
Unexpected character 'r' in text <योऽयं नकारः सोऽयमकारः स सद्योजातो भूrऋग्वेद: संपुटमुच्यते । योऽयं मकारः सोऽयमुकारः स वामदेव आपो यजुर्वेदो वक्त्रमुच्यते । योऽयं शिकारः सोऽयं मकारः स घोरः स वायुः सामवेदो गुण उच्यते । योऽयं वकारः सोऽयं नादः स तत्पुरुषः स तेजोऽथर्ववेदाऽघोरमुच्यते । योऽयं यकारः तदिदं समस्तमोमिति निर्विशेषप्रणवः स सर्वोत्तम ईशान आकाश आगमो लिङ्गमुच्यते । इत्येतत्तत्त्वं यो विजानाति स नित्यं शुद्धबुद्धपरमानन्दपरमशिवस्वरूपः ।>
<p n="p3">योऽयं नकारः सोऽयमकारः स सद्योजातो भूrऋग्वेद: संपुटमुच्यते । योऽयं मकारः सोऽयमुकारः स वामदेव आपो यजुर्वेदो वक्त्रमुच्यते । योऽयं शिकारः सोऽयं मकारः स घोरः स वायुः सामवेदो गुण उच्यते । योऽयं वकारः सोऽयं नादः स तत्पुरुषः स तेजोऽथर्ववेदाऽघोरमुच्यते । योऽयं यकारः तदिदं समस्तमोमिति निर्विशेषप्रणवः स सर्वोत्तम ईशान आकाश आगमो लिङ्गमुच्यते । इत्येतत्तत्त्वं यो विजानाति स नित्यं शुद्धबुद्धपरमानन्दपरमशिवस्वरूपः ।</p>
Unexpected character ':' in text <पुरा देवा: पशुपाशाद्विमुक्ताः शिवं पूज्यैव हरिपद्मादयोऽपि ।>
<l>पुरा देवा: पशुपाशाद्विमुक्ताः शिवं पूज्यैव हरिपद्मादयोऽपि ।</l>
Unexpected character ':' in text <जलैरुष्णै: शीतलैर्वा कदाचिदज्ञानाद्वा पतितैः पत्रपुष्पैः ।>
<l>जलैरुष्णै: शीतलैर्वा कदाचिदज्ञानाद्वा पतितैः पत्रपुष्पैः ।</l>
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Verse numbers match `n` attribute — N/A (0/0)
Meter
All verses have a known meter ⚠ Partial (4/25)
Verse lg1
<lg n="lg1">
<l>विश्वाधिकं शङ्करं ये प्रमूढा हीनं विष्णोर्ब्रह्मणो वा वदन्ति ।</l>
<l>न संसारात् प्रमुच्यन्ते कदाचिच्छतैः कल्पैः कोटिभिर्वाऽथ दोषैः ॥</l>
</lg>
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वि
G
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श्वा
G
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धि
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कं
G
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श
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ङ्क
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रं
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ये
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प्र
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मू
G
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ढा
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ही
G
|
नं
G
|
वि
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ष्णो
G
|
र्ब्र
G
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ह्म
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णो
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वा
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व
L
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द
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न्ति
L
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न
L
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सं
G
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सा
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रा
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त्प्र
L
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मु
G
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च्य
G
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न्ते
G
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क
L
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दा
G
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चि
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च्छ
L
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तैः
G
|
क
G
|
ल्पैः
G
|
को
G
|
टि
L
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भि
G
|
र्वा
G
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थ
L
|
दो
G
|
षैः
G
|
Verse lg2
<lg n="lg2">
<l>यथा राज्ञे कुर्वन्नमात्यबुद्धिं</l>
<l>देही विन्देद्बाधमस्माद्विनष्टम् ।</l>
<l>सत्यादिरूपं शिवमेवं विदानो</l>
<l>विष्ण्वादिबुद्ध्या हीयतेऽज्ञानसङ्गात् ॥</l>
</lg>
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य
L
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था
G
|
रा
G
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ज्ञे
G
|
कु
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र्व
G
|
न्न
L
|
मा
G
|
त्य
L
|
बु
G
|
द्धिं
G
|
|
|
दे
G
|
ही
G
|
वि
G
|
न्दे
G
|
द्बा
G
|
ध
L
|
म
G
|
स्मा
G
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द्वि
L
|
न
G
|
ष्टम्
L
|
|
|
स
G
|
त्या
G
|
दि
L
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रू
G
|
पं
G
|
शि
L
|
व
L
|
मे
G
|
वं
G
|
वि
L
|
दा
G
|
नो
G
|
|
वि
G
|
ष्ण्वा
G
|
दि
L
|
बु
G
|
द्ध्या
G
|
ही
G
|
य
L
|
ते
G
|
ज्ञा
G
|
न
L
|
स
G
|
ङ्गात्
G
|
Verse lg3
<lg n="lg3">
<l>महानग्निः काष्ठमार्द्रं च शुष्कं कृत्वा दहेदीश्वरोत्कृष्टबुद्धिः ।</l>
<l>दहेत् पापान्याशु विज्ञानदात्री न संसारे मज्जते वा कदाचित् ॥</l>
</lg>
|
म
L
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हा
G
|
न
G
|
ग्निः
G
|
का
G
|
ष्ठ
L
|
मा
G
|
र्द्रं
G
|
च
L
|
शु
G
|
ष्कं
G
|
कृ
G
|
त्वा
G
|
द
L
|
हे
G
|
दी
G
|
श्व
L
|
रो
G
|
त्कृ
G
|
ष्ट
L
|
बु
G
|
द्धिः
G
|
|
द
L
|
हे
G
|
त्पा
G
|
पा
G
|
न्या
G
|
शु
L
|
वि
G
|
ज्ञा
G
|
न
L
|
दा
G
|
त्री
G
|
न
L
|
सं
G
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सा
G
|
रे
G
|
म
G
|
ज्ज
L
|
ते
G
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वा
G
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क
L
|
दा
G
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चित्
L
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Verse lg6
<lg n="lg6">
<l>जन्मान्यनन्तानि विस्तीर्य भूयः शिवप्रसादाद्धृतपुण्यलेश: ।</l>
<l>शिवे भक्तिं प्राप्य तद्भक्तसङ्गान्न संसृतौ घोरदुःखात् प्रमज्जेत् ॥</l>
</lg>
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ज
G
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न्मा
G
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न्य
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न
G
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न्ता
G
|
नि
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वि
G
|
स्ती
G
|
र्य
L
|
भू
G
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यः
G
|
शि
L
|
व
G
|
प्र
L
|
सा
G
|
दा
G
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द्धृ
L
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त
L
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पु
G
|
ण्य
L
|
ले
G
|
श
L
|
|
शि
L
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वे
G
|
भ
G
|
क्तिं
G
|
प्रा
G
|
प्य
L
|
त
G
|
द्भ
G
|
क्त
L
|
स
G
|
ङ्गा
G
|
न्न
L
|
सं
G
|
सृ
L
|
तौ
G
|
घो
G
|
र
L
|
दुः
G
|
खा
G
|
त्प्र
L
|
म
G
|
ज्जेत्
G
|
Verse lg7
<lg n="lg7">
<l>योऽज्ञानाद्वा शिवशब्दं गृणानः पापैर्घोरैर्मुच्यते वा कदाचित् ।</l>
<l>को वा वेत्ता महिमानं शिवस्य परात् परस्य ज्ञानगुह्यस्य गुह्यम् ॥</l>
</lg>
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यो
G
|
ज्ञा
G
|
ना
G
|
द्वा
G
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शि
L
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व
L
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श
G
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ब्दं
G
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गृ
L
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णा
G
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नः
G
|
पा
G
|
पै
G
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र्घो
G
|
रै
G
|
र्मु
G
|
च्य
L
|
ते
G
|
वा
G
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क
L
|
दा
G
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चित्
L
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|
|
को
G
|
वा
G
|
वे
G
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त्ता
G
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म
L
|
हि
L
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मा
G
|
नं
G
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शि
L
|
व
G
|
स्य
L
|
प
L
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रा
G
|
त्प
L
|
र
G
|
स्य
G
|
ज्ञा
G
|
न
L
|
गु
G
|
ह्य
G
|
स्य
L
|
गु
G
|
ह्यम्
L
|
Verse lg8
<lg n="lg8">
<l>सद्योजाताद्ब्राह्मणाः संबभूवुर्वामदेवात् क्षत्रिया वै विशश्च ।</l>
<l>अघोराच्छूद्रास्तत्पुरुषाच्छिवस्य पञ्चात्मकस्य गणा ईशतोऽस्य ॥</l>
</lg>
|
स
G
|
द्यो
G
|
जा
G
|
ता
G
|
द्ब्रा
G
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ह्म
L
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णाः
G
|
सं
G
|
ब
L
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भू
G
|
वु
G
|
र्वा
G
|
म
L
|
दे
G
|
वा
G
|
त्क्ष
G
|
त्रि
L
|
या
G
|
वै
G
|
वि
L
|
श
G
|
श्च
L
|
|
|
अ
L
|
घो
G
|
रा
G
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च्छू
G
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द्रा
G
|
स्त
G
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त्पु
L
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रु
L
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षा
G
|
च्छि
L
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व
G
|
स्य
L
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प
G
|
ञ्चा
G
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त्म
L
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क
G
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स्य
L
|
ग
L
|
णा
G
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ई
G
|
श
L
|
तो
G
|
स्य
L
|
Verse lg9
<lg n="lg9">
<l>आत्माश्रमित्वाद्गुणवंशजाता लिङ्गाङ्गसङ्गस्तत्र जन्मान्तदीक्षा ।</l>
<l>यथा गङ्गा शिवसङ्गात्तथैव न सूतकं वा नाप्यशुचित्वमेषाम् ॥</l>
</lg>
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आ
G
|
त्मा
G
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श्र
L
|
मि
G
|
त्वा
G
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द्गु
L
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ण
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वं
G
|
श
L
|
जा
G
|
ता
G
|
लि
G
|
ङ्गा
G
|
ङ्ग
L
|
स
G
|
ङ्ग
G
|
स्त
G
|
त्र
L
|
ज
G
|
न्मा
G
|
न्त
L
|
दी
G
|
क्षा
G
|
|
य
L
|
था
G
|
ग
G
|
ङ्गा
G
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शि
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|
व
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|
स
G
|
ङ्गा
G
|
त्त
L
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थै
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|
व
L
|
न
L
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सू
G
|
त
L
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कं
G
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वा
G
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ना
G
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प्य
L
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शु
L
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चि
G
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त्व
L
|
मे
G
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षाम्
G
|
Verse lg10
<lg n="lg10">
<l>गच्छंस्तिष्ठन्निमिषन्नुन्मिषन् वा स्वपञ्चाग्राल्लिङ्गधारी शुचिः स्यात् ।</l>
<l>भुञ्जन् मूत्राद्युत्सृजन् वा कदाचिन्न तत्रोच्छिष्टं भजते शुद्धदेही ॥</l>
</lg>
|
ग
G
|
च्छं
G
|
स्ति
G
|
ष्ठ
G
|
न्नि
L
|
मि
L
|
ष
G
|
न्नु
G
|
न्मि
L
|
ष
G
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न्वा
G
|
स्व
L
|
प
G
|
ञ्चा
G
|
ग्रा
G
|
ल्लि
G
|
ङ्ग
L
|
धा
G
|
री
G
|
शु
L
|
चिः
G
|
स्यात्
G
|
|
|
भु
G
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ञ्ज
G
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न्मू
G
|
त्रा
G
|
द्यु
G
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त्सृ
L
|
ज
G
|
न्वा
G
|
क
L
|
दा
G
|
चि
G
|
न्न
L
|
त
G
|
त्रो
G
|
च्छि
G
|
ष्टं
G
|
भ
L
|
ज
L
|
ते
G
|
शु
G
|
द्ध
L
|
दे
G
|
ही
G
|
Verse lg11
<lg n="lg11">
<l>शीर्षे कण्ठे वक्षसि कक्षदेशे नाभौ हस्ते सर्वदा प्राणलिङ्गम् ।</l>
<l>धार्यं यथासम्प्रदायं पुरस्ताद्गुरोर्विदित्वा हृदये मुख्यमुक्तम् ॥</l>
</lg>
|
शी
G
|
र्षे
G
|
क
G
|
ण्ठे
G
|
व
G
|
क्ष
L
|
सि
L
|
क
G
|
क्ष
L
|
दे
G
|
शे
G
|
ना
G
|
भौ
G
|
ह
G
|
स्ते
G
|
स
G
|
र्व
L
|
दा
G
|
प्रा
G
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ण
L
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लि
G
|
ङ्गम्
L
|
|
|
धा
G
|
र्यं
G
|
य
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था
G
|
स
G
|
म्प्र
L
|
दा
G
|
यं
G
|
पु
L
|
र
G
|
स्ता
G
|
द्गु
L
|
रो
G
|
र्वि
L
|
दि
G
|
त्वा
G
|
हृ
L
|
द
L
|
ये
G
|
मु
G
|
ख्य
L
|
मु
G
|
क्तम्
L
|
Verse lg12
<lg n="lg12">
<l>स्नानं कृत्वा शिवतीर्थे च देहं सर्वं भस्मोद्धूलनात् पावयित्वा ।</l>
<l>त्रिपुण्ड्रं धार्यं भर्त्सनात् पातकौघगिरेर्भस्म प्राहुरत्यर्थमेतत् ॥</l>
</lg>
|
स्ना
G
|
नं
G
|
कृ
G
|
त्वा
G
|
शि
L
|
व
L
|
ती
G
|
र्थे
G
|
च
L
|
दे
G
|
हं
G
|
स
G
|
र्वं
G
|
भ
G
|
स्मो
G
|
द्धू
G
|
ल
L
|
ना
G
|
त्पा
G
|
व
L
|
यि
G
|
त्वा
G
|
|
|
त्रि
L
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पु
G
|
ण्ड्रं
G
|
धा
G
|
र्यं
G
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भ
G
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र्त्स
L
|
ना
G
|
त्पा
G
|
त
L
|
कौ
G
|
घ
L
|
गि
L
|
रे
G
|
र्भ
G
|
स्म
G
|
प्रा
G
|
हु
L
|
र
G
|
त्य
G
|
र्थ
L
|
मे
G
|
तत्
L
|
Verse lg13
<lg n="lg13">
<l>स्नानं त्रिपुण्ड्रस्य शिरोललाटवक्षःस्कन्धमणिबन्धेषु कूrpe ।</l>
<l>नाभिप्रदेशे पार्श्वयोर्गण्डदेशे गुदप्रदेशे गुल्फयोश्च क्रमात् स्यात् ॥</l>
</lg>
|
स्ना
G
|
नं
G
|
त्रि
L
|
पु
G
|
ण्ड्र
G
|
स्य
L
|
शि
L
|
रो
G
|
ल
L
|
ला
G
|
ट
L
|
व
G
|
क्षः
G
|
स्क
G
|
न्ध
L
|
म
L
|
णि
L
|
ब
G
|
न्धे
G
|
षु
L
|
कू
G
|
र्पे
G
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||
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ना
G
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भि
G
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प्र
L
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दे
G
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शे
G
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पा
G
|
र्श्व
L
|
यो
G
|
र्ग
G
|
ण्ड
L
|
दे
G
|
शे
G
|
गु
L
|
द
G
|
प्र
L
|
दे
G
|
शे
G
|
गु
G
|
ल्फ
L
|
यो
G
|
श्च
G
|
क्र
L
|
मा
G
|
त्स्यात्
G
|
Verse lg14
<lg n="lg14">
<l>वह्नित्रयं तच्च जगत्त्रयं यद्गुणत्रयं तच्च शक्तित्रयं स्यात् ।</l>
<l>धृतं त्रिपुण्ड्रं यदि कोपि दैवात् तद्दृष्ट्वान्यः पातकौघाद्विमुक्तः ॥</l>
</lg>
|
व
G
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ह्नि
G
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त्र
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यं
G
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त
G
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च्च
L
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ज
L
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ग
G
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त्त्र
L
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यं
G
|
य
G
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द्गु
L
|
ण
G
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त्र
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यं
G
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त
G
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च्च
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श
G
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क्ति
G
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त्र
L
|
यं
G
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स्यात्
G
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|
धृ
L
|
तं
G
|
त्रि
L
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पु
G
|
ण्ड्रं
G
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य
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|
दि
L
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को
G
|
पि
L
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दै
G
|
वा
G
|
त्त
G
|
द्दृ
G
|
ष्ट्वा
G
|
न्यः
G
|
पा
G
|
त
L
|
कौ
G
|
घा
G
|
द्वि
L
|
मु
G
|
क्तः
G
|
Verse lg15
<lg n="lg15">
<l>निमीलिताक्षस्य पुरत्रयाणि</l>
<l>दग्धाः शंभोर्नयनेभ्योऽथ ये तु ।</l>
<l>जाता रुद्राक्षा जलबिन्दवोऽस्य</l>
<l>सद्योजातादीन् पञ्च वक्त्राणि विन्द्यात् ॥</l>
</lg>
|
नि
L
|
मी
G
|
लि
L
|
ता
G
|
क्ष
G
|
स्य
L
|
पु
L
|
र
G
|
त्र
L
|
या
G
|
णि
L
|
|
|
द
G
|
ग्धाः
G
|
शं
G
|
भो
G
|
र्न
L
|
य
L
|
ने
G
|
भ्यो
G
|
थ
L
|
ये
G
|
तु
L
|
|
|
जा
G
|
ता
G
|
रु
G
|
द्रा
G
|
क्षा
G
|
ज
L
|
ल
L
|
बि
G
|
न्द
L
|
वो
G
|
स्य
L
|
|
|
स
G
|
द्यो
G
|
जा
G
|
ता
G
|
दी
G
|
न्प
G
|
ञ्च
L
|
व
G
|
क्त्रा
G
|
णि
L
|
वि
G
|
न्द्यात्
G
|
Verse lg16
<lg n="lg16">
<l>द्वात्रिंशद्रुद्राक्षाः कण्ठमालाप्रयुक्ताः</l>
<l>शिखायामेको द्विचत्वारिंशदुक्ताः ।</l>
<l>शिरोधार्याः कर्णयोर्द्वादशाऽथ</l>
<l>शतत्रयं तूपवीतं च बाह्वोः ॥</l>
</lg>
|
द्वा
G
|
त्रिं
G
|
श
G
|
द्रु
G
|
द्रा
G
|
क्षाः
G
|
क
G
|
ण्ठ
L
|
मा
G
|
ला
G
|
प्र
L
|
यु
G
|
क्ताः
G
|
|
शि
L
|
खा
G
|
या
G
|
मे
G
|
को
G
|
द्वि
L
|
च
G
|
त्वा
G
|
रिं
G
|
श
L
|
दु
G
|
क्ताः
G
|
|
|
शि
L
|
रो
G
|
धा
G
|
र्याः
G
|
क
G
|
र्ण
L
|
यो
G
|
र्द्वा
G
|
द
L
|
शा
G
|
थ
L
|
||
|
श
L
|
त
G
|
त्र
L
|
यं
G
|
तू
G
|
प
L
|
वी
G
|
तं
G
|
च
L
|
बा
G
|
ह्वोः
G
|
Verse lg18
<lg n="lg18">
<l>पुरा देवा: पशुपाशाद्विमुक्ताः शिवं पूज्यैव हरिपद्मादयोऽपि ।</l>
<l>ऐन्द्रनीलं पूजितं विष्णुनासील्लिङ्गं वैडूर्यं विधिना पद्मरागम् ॥</l>
</lg>
|
पु
L
|
रा
G
|
दे
G
|
वा
G
|
प
L
|
शु
L
|
पा
G
|
शा
G
|
द्वि
L
|
मु
G
|
क्ताः
G
|
शि
L
|
वं
G
|
पू
G
|
ज्यै
G
|
व
L
|
ह
L
|
रि
L
|
प
G
|
द्मा
G
|
द
L
|
यो
G
|
पि
L
|
|
ऐ
G
|
न्द्र
L
|
नी
G
|
लं
G
|
पू
G
|
जि
L
|
तं
G
|
वि
G
|
ष्णु
L
|
ना
G
|
सी
G
|
ल्लि
G
|
ङ्गं
G
|
वै
G
|
डू
G
|
र्यं
G
|
वि
L
|
धि
L
|
ना
G
|
प
G
|
द्म
L
|
रा
G
|
गम्
L
|
Verse lg19
<lg n="lg19">
<l>शक्रेण हैमं यक्षराजेन विश्वेदेवै रौप्यं वसुभिः कांस्यकं च ।</l>
<l>यद्दारुकूटं वायुना पार्थिवं तदश्विभ्यामासीत् स्फाटिकं पाशिनाथ ॥</l>
</lg>
|
श
G
|
क्रे
G
|
ण
L
|
है
G
|
मं
G
|
य
G
|
क्ष
L
|
रा
G
|
जे
G
|
न
L
|
वि
G
|
श्वे
G
|
दे
G
|
वै
G
|
रौ
G
|
प्यं
G
|
व
L
|
सु
L
|
भिः
G
|
कां
G
|
स्य
L
|
कं
G
|
च
L
|
|
|
य
G
|
द्दा
G
|
रु
L
|
कू
G
|
टं
G
|
वा
G
|
यु
L
|
ना
G
|
पा
G
|
र्थि
L
|
वं
G
|
त
L
|
द
G
|
श्वि
G
|
भ्या
G
|
मा
G
|
सी
G
|
त्स्फा
G
|
टि
L
|
कं
G
|
पा
G
|
शि
L
|
ना
G
|
थ
L
|
Verse lg20
<lg n="lg20">
<l>आदित्यैस्ताम्रं मौक्तिकं देवतैस्तैरनन्ताद्यैः फणिभिश्च प्रवालम् ।</l>
<l>दैत्यैर्जालं राक्षसैश्च त्रिलोहं गणैः शैलं सैकतं मातृकाभिः ॥</l>
</lg>
|
आ
G
|
दि
G
|
त्यै
G
|
स्ता
G
|
म्रं
G
|
मौ
G
|
क्ति
L
|
कं
G
|
दे
G
|
व
L
|
तै
G
|
स्तै
G
|
र
L
|
न
G
|
न्ता
G
|
द्यैः
G
|
फ
L
|
णि
L
|
भि
G
|
श्च
G
|
प्र
L
|
वा
G
|
लम्
L
|
|
दै
G
|
त्यै
G
|
र्जा
G
|
लं
G
|
रा
G
|
क्ष
L
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सै
G
|
श्च
G
|
त्रि
L
|
लो
G
|
हं
G
|
ग
L
|
णैः
G
|
शै
G
|
लं
G
|
सै
G
|
क
L
|
तं
G
|
मा
G
|
तृ
L
|
का
G
|
भिः
G
|
Verse lg21
<lg n="lg21">
<l>दारूद्भवं निर्ऋतिना यमेन सुपूज्यमासीन्मारकतं च रुद्रैः ।</l>
<l>सुभस्मरूपं सूक्ष्मरूपं च लक्ष्म्या शैलान्येव मुनयो भेजिरेऽथ ॥</l>
</lg>
|
दा
G
|
रू
G
|
द्भ
L
|
वं
G
|
नि
L
|
रृ
L
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ति
L
|
ना
G
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य
L
|
मे
G
|
न
L
|
सु
L
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पू
G
|
ज्य
L
|
मा
G
|
सी
G
|
न्मा
G
|
र
L
|
क
L
|
तं
G
|
च
L
|
रु
G
|
द्रैः
G
|
|
सु
L
|
भ
G
|
स्म
L
|
रू
G
|
पं
G
|
सू
G
|
क्ष्म
L
|
रू
G
|
पं
G
|
च
L
|
ल
G
|
क्ष्म्या
G
|
शै
G
|
ला
G
|
न्ये
G
|
व
L
|
मु
L
|
न
L
|
यो
G
|
भे
G
|
जि
L
|
रे
G
|
थ
L
|
Verse lg22
<lg n="lg22">
<l>सरस्वती रत्नरूपं च दुर्गा हैमं लिङ्गं पूजयामास भक्त्या ।</l>
<l>जलैरुष्णै: शीतलैर्वा कदाचिदज्ञानाद्वा पतितैः पत्रपुष्पैः ।</l>
<l>तुष्टो यच्छेद्वाञ्छितार्थं महेशः किं दुर्लभं शिवभक्तस्य लोके ॥</l>
</lg>
|
स
L
|
र
G
|
स्व
L
|
ती
G
|
र
G
|
त्न
L
|
रू
G
|
पं
G
|
च
L
|
दु
G
|
र्गा
G
|
है
G
|
मं
G
|
लि
G
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ङ्गं
G
|
पू
G
|
ज
L
|
या
G
|
मा
G
|
स
L
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भ
G
|
क्त्या
G
|
|
ज
L
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लै
G
|
रु
G
|
ष्णै
G
|
शी
G
|
त
L
|
लै
G
|
र्वा
G
|
क
L
|
दा
G
|
चि
L
|
द
G
|
ज्ञा
G
|
ना
G
|
द्वा
G
|
प
L
|
ति
L
|
तैः
G
|
प
G
|
त्र
L
|
पु
G
|
ष्पैः
G
|
|
तु
G
|
ष्टो
G
|
य
G
|
च्छे
G
|
द्वा
G
|
ञ्छि
L
|
ता
G
|
र्थं
G
|
म
L
|
हे
G
|
शः
G
|
किं
G
|
दु
G
|
र्ल
L
|
भं
G
|
शि
L
|
व
L
|
भ
G
|
क्त
G
|
स्य
L
|
लो
G
|
के
G
|
Verse lg24
<lg n="lg24">
<l>किमन्यैर्धार्यैर्भस्मनि शुद्धपुण्ड्रे स्थिते किमन्यैर्मन्त्रवर्येऽथ मन्त्रैः ।</l>
<l>शिवे स्थिते सर्वदेवाधिराजे भारद्वाज निर्जरैः किं तथाऽन्यैः ॥</l>
</lg>
|
कि
L
|
म
G
|
न्यै
G
|
र्धा
G
|
र्यै
G
|
र्भ
G
|
स्म
L
|
नि
L
|
शु
G
|
द्ध
L
|
पु
G
|
ण्ड्रे
G
|
स्थि
L
|
ते
G
|
कि
L
|
म
G
|
न्यै
G
|
र्म
G
|
न्त्र
L
|
व
G
|
र्ये
G
|
थ
L
|
म
G
|
न्त्रैः
G
|
|
शि
L
|
वे
G
|
स्थि
L
|
ते
G
|
स
G
|
र्व
L
|
दे
G
|
वा
G
|
धि
L
|
रा
G
|
जे
G
|
भा
G
|
र
G
|
द्वा
G
|
ज
L
|
नि
G
|
र्ज
L
|
रैः
G
|
किं
G
|
त
L
|
था
G
|
न्यैः
G
|
Verse lg25
<lg n="lg25">
<l>सिद्धान्तोऽयं निश्चितोऽस्माभिरेष भारद्वाज गुह्यमेतन्न वाच्यम् ।</l>
<l>सदा प्रशान्ताय न नास्तिकाय परीक्ष्याथ ब्रूहि सर्वार्थवेत्रे ॥</l>
</lg>
|
सि
G
|
द्धा
G
|
न्तो
G
|
यं
G
|
नि
G
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श्चि
L
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तो
G
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स्मा
G
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भि
L
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रे
G
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ष
L
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भा
G
|
र
G
|
द्वा
G
|
ज
L
|
गु
G
|
ह्य
L
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मे
G
|
त
G
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न्न
L
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वा
G
|
च्यम्
L
|
|
स
L
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दा
G
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प्र
L
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शा
G
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न्ता
G
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य
L
|
न
L
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ना
G
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स्ति
L
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का
G
|
य
L
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प
L
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री
G
|
क्ष्या
G
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थ
G
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ब्रू
G
|
हि
L
|
स
G
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र्वा
G
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र्थ
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वे
G
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त्रे
G
|