Reports » श्रीरामकर्णामृतम्
Updated 2026-04-26 16:43
XML
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<lg n="11">
<l>विमोहयति विष्टपत्रयजनान् गुणारोपण-</l>
<l>क्षणत्रुटितचण्डिकारमणचापचण्ड<subst>
<del>ध्वनिम्</del>
<add>ध्वनौ</add>
</subst>।</l>
<l>जयत्यसकृदुन्मिषत्पुलकयोरपेतत्रपं</l>
<l>परपस्परनिरीक्षणं रघुवरक्षमाकन्ययोः ॥ ११ ॥</l>
</lg>
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<lg n="22">
<l>निर्वृत्ते खरदूषणत्रिशिरसामुन्<subst>
<del>मा</del>
<add>मू</add>
</subst>लनादाहवे</l>
<l>वैदेही परिषस्वजे सपदि यं मूर्ता जयश्रीरिव ।</l>
<l>उन्मीलत्पुलकश्रमाम्भसि धनुर्न्यस्तैकहस्ताम्बुजे</l>
<l>तस्मिन् सस्मितवक्त्रचन्द्रमसि मे देवे मनो धावति ॥ २२ ॥</l>
</lg>
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<trailer> slug '' must end with '.trailer'
<trailer/>
All blocks have unique identifiers ✓ Passed (101/101)
Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' ✓ Passed (100/100)
Text
Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (499/504)
Unexpected character '1' in text <1>
<ref type="noteAnchor" target="347.1">1</ref>
Unexpected character '(' in text <(?)>
<add>(?)</add>॥ ५८ ॥
Unexpected character '1' in text <1>
<ref type="noteAnchor" target="350.1">1</ref>धिनोति ॥ ५९ ॥
Unexpected character '(' in text <(रामं सुन्दरतया महालक्ष्मीश्चकमे इति पुराणे कथानुसन्धेया ।)>
<l>(रामं सुन्दरतया महालक्ष्मीश्चकमे इति पुराणे कथानुसन्धेया ।)</l>
Unexpected character '(' in text <(ल)>
<add>(ल)</add>म् ॥ ९१ ॥
No leading or trailing spaces in text elements ✓ Passed (380/380)
Verse numbers match `n` attribute ✓ Passed (99/99)
Meter
All verses have a known meter ⚠ Partial (75/100)
Verse 7
<lg n="7"> <l>रघुवरचरणारविन्दभक्ति-</l> <l>च्छलमकरन्दनिरन्तराभिषिक्ताः ।</l> <l>वकुलपरिमला गिरा मदीया</l> <l>कविकुलकर्णरसायनानि सन्तु ॥ ७ ॥</l> </lg>
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Verse 11
<lg n="11">
<l>विमोहयति विष्टपत्रयजनान् गुणारोपण-</l>
<l>क्षणत्रुटितचण्डिकारमणचापचण्ड<subst>
<del>ध्वनिम्</del>
<add>ध्वनौ</add>
</subst>।</l>
<l>जयत्यसकृदुन्मिषत्पुलकयोरपेतत्रपं</l>
<l>परपस्परनिरीक्षणं रघुवरक्षमाकन्ययोः ॥ ११ ॥</l>
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Verse 12
<lg n="12"> <l>करोमि हृदयाम्बुजे कमपि वीरमम्भोनिधे-</l> <l>र्निबन्धनमपीन्धन<add>... ...</add>बन्धुतूणीशयम् ।</l> <l>न कश्चिदपि दृश्यते जगति यस्य शक्तो जये</l> <l>स्मरप्रहितजानकीनयनपद्मबाणं विना ॥ १२ ॥</l> </lg>
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Verse 13
<lg n="13"> <l>क एष दलदुत्पलद्युतिरुदारवेषोज्ज्वलः</l> <l>स्वयं विशति मे मनस्त्वरितमाः परिज्ञायते ।</l> <l>स एष ननु जानकीकुचतटीपटीरद्रव-</l> <l>प्रसक्तरसवासनाघुमुघुमायमानः प्रभुः ॥ १३ ॥</l> </lg>
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Verse 22
<lg n="22">
<l>निर्वृत्ते खरदूषणत्रिशिरसामुन्<subst>
<del>मा</del>
<add>मू</add>
</subst>लनादाहवे</l>
<l>वैदेही परिषस्वजे सपदि यं मूर्ता जयश्रीरिव ।</l>
<l>उन्मीलत्पुलकश्रमाम्भसि धनुर्न्यस्तैकहस्ताम्बुजे</l>
<l>तस्मिन् सस्मितवक्त्रचन्द्रमसि मे देवे मनो धावति ॥ २२ ॥</l>
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Verse 23
<lg n="23">
<l>पायात् पर्णकुटीगतो घनघटासिक्तावनीसौरभ-</l>
<l>घ्राणव्यापृतपुष्करद्विपकुले नीपप्रसूनाकुले ।</l>
<l>केकाकण्ठशिखण्डिताण्डव<choice>
<sic>व</sic>
<corr/>
</choice>पदे खेलत्पुरोमारुते</l>
<l>नन्दन् प्रावृषि चित्रकूटकटके सीतासखो राघवः ॥ २३ ॥</l>
</lg>
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Verse 24
<lg n="24"> <l>अर्धावर्तितमन्त्रमर्धविरतस्वाध्यायमर्धोज्झित-</l> <l>ब्रह्मोपासनमर्धमुक्तहवनातिथ्यादिसर्वक्रियम् ।</l> <l>दृष्ट्वा पञ्चवटीजुषो यमृषयः सार्थं तपो मेनिरे</l> <l>कन्दर्पादपि सुन्दरं व्रजति मे काकुत्स्थमेनं मनः ॥ २४ ॥</l> </lg>
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Verse 28
<lg n="28"> <l>सीतादत्तकराम्बुजं पदयुगश्लिष्यन्मणीपादुकं</l> <l>हर्षावेक्षिविहारबर्ह्यपसृताभ्यर्णं घटोधन्या गवा ।</l> <l>स्वामिन् देव जयेति पञ्जरशुकस्वानोल्लसत्तोरणं</l> <l>साकेताधिपतेरुषस्यवतु नः शय्यागृहान्निर्गमः ॥ २८ ॥</l> </lg>
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Verse 31
<lg n="31"> <l>हंसी मन्दं चरति हरिणी वीक्षते लोललोलं</l> <l>रम्यं कूजत्ययमिह पिको राजते बर्हिणोऽसौ ।</l> <l>इत्याश्चर्याद्वभुवि वधूं दर्शयन्तीं यदि त्वां</l> <l>पश्याम्येतैरलमिति वदन् पातु नः कौसलेयः ॥ ३१ ॥</l> </lg>
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न्पा
G
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तु
L
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नः
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कौ
G
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स
L
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ले
G
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यः
G
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Verse 43
<lg n="43"> <l>कचभरनिटिलभ्रूकर्णदृङ्नासिकोष्ठ-</l> <l>स्तनजघननितम्बं पश्यदन्याङ्गनानाम् ।</l> <l>मलिनयति मनश्चेन्मन्मथस्तावता किं</l> <l>विमलयितुमहल्यापावनोऽप्यस्ति वीरः ॥ ४३ ॥</l> </lg>
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क
L
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च
L
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भ
L
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र
L
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नि
L
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टि
L
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ल
G
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भ्रू
G
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क
G
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र्ण
L
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दृ
G
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ङ्ना
G
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सि
L
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को
G
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ष्ठ
L
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स्त
L
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न
L
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ज
L
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घ
L
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न
L
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नि
L
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त
G
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प
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श्य
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G
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ङ्ग
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न्म
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वि
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तु
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व
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नो
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प्य
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स्ति
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वी
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रः
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Verse 47
<lg n="47"> <l>निगमशिखरिशृङ्गान्नित्यमागत्य खेल-</l> <l>न्मुनिजनहृदरण्ये मोहसारङ्गमुक्ते ।</l> <l>दशवदनगजेन्द्रे दर्शिताघातलीलो</l> <l>वशयति रघुसिंहो मानसं नः प्रसन्नः ॥ ४७ ॥</l> </lg>
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नि
L
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ग
L
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म
L
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शि
L
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ख
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रि
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शृ
G
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ङ्गा
G
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न्नि
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त्य
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मा
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ग
G
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त्य
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खे
G
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ल
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न्मु
L
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L
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ण्ये
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ह
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सा
G
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र
G
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ङ्ग
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क्ते
G
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द
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श
L
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न्द्रे
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व
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श
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य
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र
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घु
L
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सिं
G
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हो
G
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मा
G
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न
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सं
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नः
G
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प्र
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स
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न्नः
G
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Verse 59
<lg n="59"> <l>स्मयमानमुखेन्दुरिन्द्रनील-</l> <l>द्युतिरम्भोजदलेक्षणो धनुष्मान् ।</l> <l>तरलीकृतजानकीद्दगन्त-</l> <l>स्तरुणः कश्चन में मनो<ref type="noteAnchor" target="350.1">1</ref>धिनोति ॥ ५९ ॥</l> </lg>
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स्म
L
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य
L
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मा
G
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न
L
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मु
L
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खे
G
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न्दु
L
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रि
G
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न्द्र
L
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नी
G
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ल
L
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द्यु
L
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ति
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र
G
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म्भो
G
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ज
L
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द
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ले
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क्ष
L
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णो
G
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ध
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नु
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ष्मान्
G
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त
L
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र
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ली
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कृ
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त
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जा
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न
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द्द
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ग
G
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न्त
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श्च
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में
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म
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नो
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धि
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नो
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ति
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Verse 62
<lg n="62"> <l>कृष्णैकसूतरथकेतनभूतदूत</l> <l>आनूरुसारथिरथात्मजमित्रभूतः ।</l> <l>पाणीश<ellipsis>. . . .</ellipsis>रथस्य शरासभूतः</l> <l>कश्चिन्मनो हरति कार्मुकभूषणो मे ॥ ६२ ॥</l> </lg>
|
कृ
G
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ष्णै
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क
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सू
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त
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र
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थ
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के
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त
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न
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भू
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त
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दू
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त
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नू
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रु
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सा
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र
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थि
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र
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था
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त्म
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ज
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त्र
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भू
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तः
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पा
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णी
G
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श
L
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र
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थ
G
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स्य
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श
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रा
G
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स
L
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भू
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तः
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क
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श्चि
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न्म
L
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नो
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ह
L
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र
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ति
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का
G
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र्मु
L
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क
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भू
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ष
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णो
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मे
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Verse 63
<lg n="63"> <l>दृप्यद्दशाननकलत्रकठोरगर्भ-</l> <l>विभ्रंशविभ्रमपरिस्फुटसाहसेन ।</l> <l>घण्टा विलुण्ठयतु नः कलुषं रवेण</l> <l>कोदण्डकोटिघटिता कुलदेवतायाः ॥ ६३ ॥</l> </lg>
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दृ
G
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प्य
G
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द्द
L
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शा
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न
L
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न
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क
L
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त्र
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क
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ठो
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ग
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र्भ
L
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भ्रं
G
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श
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भ्र
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म
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प
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स्फु
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सा
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घ
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ण्टा
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L
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तु
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नः
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क
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लु
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षं
G
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र
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ण
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G
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ल
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दे
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व
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ता
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याः
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Verse 64
<lg n="64"> <l>देवद्विषां विजयदेहभृतां शरण्यं</l> <l>कारुण्यभूषितकटाक्षमुदग्रचापम् ।</l> <l>टङ्कत्रुटन्मरतकोपलरत्ननील-</l> <l>धाम स्मरामि धरणीतनयासहायम् ॥ ६४ ॥</l> </lg>
|
दे
G
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व
G
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द्वि
L
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षां
G
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वि
L
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ज
L
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य
L
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दे
G
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ह
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भृ
L
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तां
G
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श
L
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र
G
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ण्यं
G
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का
G
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रु
G
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ण्य
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भू
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षि
L
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त
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क
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क्ष
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मु
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ग्र
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चा
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पम्
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ट
G
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ङ्क
G
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त्रु
L
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ट
G
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न्म
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म
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स्म
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रा
G
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मि
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ध
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णी
G
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त
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न
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या
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स
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हा
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यम्
L
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Verse 66
<lg n="66"> <l>तिष्ठन्तु दारुणतरा निरयाः सहस्रं</l> <l>तिष्ठन्तु घोरचरिता यमकिङ्करा वा ।</l> <l>पापात्मनोऽपि नियतं परिपालनाय</l> <l>कोदण्डपाणिरिति कोऽपि ममास्ति नाथः ॥ ६६ ॥</l> </lg>
|
ति
G
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ष्ठ
G
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न्तु
L
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दा
G
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रु
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ण
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त
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रा
G
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र
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G
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ह
G
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स्रं
G
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|
ति
G
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ष्ठ
G
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न्तु
L
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G
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र
L
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च
L
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L
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ता
G
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L
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पा
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तं
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पा
G
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G
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य
L
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को
G
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द
G
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ण्ड
L
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पा
G
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णि
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रि
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को
G
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पि
L
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म
L
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मा
G
|
स्ति
L
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ना
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थः
G
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Verse 69
<lg n="69"> <l>स्वप्नदृष्टं श्लोकान्तरम् ---</l> <l>चापसंहितशरं चरमाङ्ने</l> <l>बद्धतूणमुपनीविकृपाणम् ।</l> <l>वञ्चनामृगवधाय वनान्ते</l> <l>सञ्चरन्तमिममन्तरुपासे ॥ ६९ ॥</l> </lg>
|
स्व
G
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प्न
L
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दृ
G
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ष्टं
G
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श्लो
G
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का
G
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न्त
L
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रम्
L
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|||
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चा
G
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प
L
|
सं
G
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हि
L
|
त
L
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श
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रं
G
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च
L
|
र
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मा
G
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ङ्ने
G
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ब
G
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द्ध
L
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तू
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ण
L
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मु
L
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प
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नी
G
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वि
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कृ
L
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पा
G
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णम्
L
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व
G
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ञ्च
L
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ना
G
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मृ
L
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ग
L
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व
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धा
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य
L
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व
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ना
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न्ते
G
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स
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ञ्च
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र
G
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न्त
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म
L
|
म
G
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न्त
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रु
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पा
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से
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Verse 72
<lg n="72"> <l>मामके हृदि महीकुमारिका</l> <l>कामकेलिकुतुकी नृपात्मजः ।<ellipsis>... ...</ellipsis>पदमस्त्रबन्धुरो</l> <l>नूतनोदयपयोदसुन्दरः ॥ ७२ ॥</l> </lg>
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मा
G
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म
L
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के
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हृ
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म
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ही
G
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कु
L
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न्धु
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L
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प
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यो
G
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द
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सु
G
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न्द
L
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रः
G
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Verse 73
<lg n="73"> <l>चन्द्रशेखरशरासनच्छिदा</l> <l>चातुरीचणकरारविन्दया ।</l> <l>स्वीकृतं मम सुरानुकूलया<ellipsis>. . . . . . </ellipsis>भ्रनीलया ॥ ७३ ॥</l> </lg>
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च
G
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न्द्र
L
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शे
G
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ख
L
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र
L
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श
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रा
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||||
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चा
G
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तु
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क
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न्द
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स्वी
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तं
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म
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म
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सु
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L
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कू
G
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ल
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या
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भ्र
L
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नी
G
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ल
L
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या
G
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Verse 84
<lg n="84"> <l>मघवदुपलनीले मण्डलीकृत्य चापं</l> <l>मुहुरभिदशकण्ठं मुञ्चतीषुप्रपञ्चम् ।</l> <l>रणधरणिरजोभिर्धूसरे वासरेश-</l> <l>प्रभवकुलभवानामुत्तमे चित्तमेति ॥ ८४ ॥</l> </lg>
|
म
L
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घ
L
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व
L
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दु
L
|
प
L
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ल
L
|
नी
G
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ले
G
|
म
G
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ण्ड
L
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ली
G
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कृ
G
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त्य
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चा
G
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पं
G
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मु
L
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हु
L
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र
L
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भि
L
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द
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श
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क
G
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ण्ठं
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मु
G
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ञ्च
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ती
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षु
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प्र
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ञ्चम्
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र
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ण
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ध
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र
L
|
णि
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र
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जो
G
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भि
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र्धू
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स
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रे
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वा
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स
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रे
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|
प्र
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भ
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कु
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मु
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त्त
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मे
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चि
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त्त
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मे
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ति
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Verse 87
<lg n="87"> <l>कल्याणमावहतु दाशरथेः कटाक्षः</l> <l>शाखामृगे शतमखादपि सानुकम्पः ।</l> <l>आभाति भूमितनयाधरबिम्बलोभ-</l> <l>सम्पातसंक्रमितलाक्ष इवारुणो यः ॥ ८७ ॥</l> </lg>
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क
G
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ल्या
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ण
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मा
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व
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ह
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तु
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थेः
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टा
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क्षः
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शा
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खा
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मृ
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गे
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श
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खा
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सा
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नु
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म्पः
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बि
G
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म्ब
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लो
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भ
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स
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म्पा
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क्र
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मि
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क्ष
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इ
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वा
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रु
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णो
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यः
G
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Verse 88
<lg n="88"> <l>(रामं सुन्दरतया महालक्ष्मीश्चकमे इति पुराणे कथानुसन्धेया ।)</l> <l>स कश्चन गिरीन्द्रजासखशरासनव्रश्चको</l> <l>मनो हरति मामकं मरतकोपलश्यामलः ।</l> <l>धनुश्शरलसत्करो धरणिकन्यकाप्रेमभू-</l> <l>र्धनञ्जयरथध्वजाभरणभूतदूतः प्रभुः ॥ ८८ ॥</l> </lg>
|
रा
G
|
मं
G
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सु
G
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न्द
L
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र
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त
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या
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म
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हा
G
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ल
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क्ष्मी
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श्च
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क
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पु
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णे
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क
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था
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नु
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स
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न्धे
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स
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क
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श्च
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न
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री
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न्द्र
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श्च
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नो
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कं
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म
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र
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त
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को
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प
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ल
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म
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लः
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ध
L
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नु
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र
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ल
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स
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त्क
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रो
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ध
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र
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क
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म
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भू
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त
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दू
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तः
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प्र
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भुः
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Verse 89
<lg n="89"> <l>धन्या वयं धरणिकन्याकया सनाथे</l> <l>नाथे स्थिते जगति नः परिपालनाय ।</l> <l>यश्शीलितो यतिभिरात्मनि निष्कलङ्के</l> <l>लङ्केश्वरं लवितुमाप मनुष्यरूपम् ॥ ८९ ॥</l> </lg>
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ध
G
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न्या
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व
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यं
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ध
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र
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क
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न्या
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क
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य
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ति
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त्म
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नि
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ष्क
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ल
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ङ्के
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रं
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ल
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तु
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मा
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प
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म
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नु
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ष्य
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रू
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पम्
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Verse 91
<lg n="91"> <l>आबद्धतूणमंसे करकमलद्वन्द्वधृतधनुर्बाणम् ।</l> <l>पश्यामि हृदयकमले रामं दूर्वादलश्याम<add>(ल)</add>म् ॥ ९१ ॥</l> </lg>
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आ
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ब
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द्ध
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तू
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ण
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मं
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से
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क
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क
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म
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ल
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न्द्व
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धृ
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त
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ध
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नु
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र्बा
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णम्
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प
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श्या
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मि
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हृ
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द
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य
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क
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म
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रा
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मं
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दू
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द
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ल
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श्या
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म
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लम्
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Verse 93
<lg n="93"> <l>जगदघहरप्रशंसे जनकसुतावलयपदविलसदंसे ।</l> <l>निगमान्तनलिनहंसे रमते मम हृदयं रविकुलवतंसे ॥ ९३ ॥</l> </lg>
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ग
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तं
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