Reports » श्रीमृत्युंजयमानसिकपूजास्तोत्रम्
Updated 2026-03-02 01:19
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Text
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Meter
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Verse 5
<lg n="5"> <l>सुगन्धपुष्पप्रकरैः सुवासितै-</l> <l>र्वियन्नदीशीतलवारिभिः शुभैः ।</l> <l>त्रिलोकनाथार्तिहार्घ्यमादरा-</l> <l>द्गृहाण मृत्युंजय सर्ववन्दित ॥ ५ ॥</l> </lg>
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Verse 21
<lg n="21"> <l>कर्पूरचूर्णं कपिलाज्यपूतं</l> <l>दास्यामि कालेयसमन्वितैश्च ।</l> <l>समुद्भवं पावनगन्धधूपितं</l> <l>मृत्युंजयाङ्गं परिकल्पयामि ॥ २१ ॥</l> </lg>
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Verse 22
<lg n="22"> <l>वर्तित्रयोपेतमखण्डदीप्त्या</l> <l>तमोहरं बाह्यमथान्तरं च ।</l> <pb n="110"/> <l>११०</l> <l>श्रीमृत्युंजयमान सिकपूजास्तोत्रम् ।</l> <l>साज्यं समस्तामरवर्गहृद्यं</l> <l>सुरेश मृत्युंजय वंशदीपम् ॥ २२ ॥</l> </lg>
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Verse 23
<lg n="23"> <l>राजानं मधुरान्वितं च मृदुलं माणिक्यपात्रे स्थितं</l> <l>हिगूजीरकसन्मरीचिमिलितैः शाकैरनेकैः शुभैः ।</l> <l>शाकं सम्यगपूपसूपसहितं सद्योघृतेनाप्लुतं</l> <l>श्रीमृत्युंजय पार्वतीप्रिय विभो सापोशनं भुज्यताम् ॥</l> </lg>
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Verse 28
<lg n="28"> <l>रम्भाचूतकपित्थकण्टकफलैर्द्राक्षारसस्वादुम-</l> <l>त्खर्जूरैर्मधुरेक्षुखण्डशकलैः सन्नारिकेलाम्बुभिः ।</l> <l>कर्पूरेण सुवासितैर्गुडजलैर्माधुर्ययुक्तैर्विभो</l> <l>श्रीमृत्युंजय पूरय त्रिभुवनाधारं विशालोदरम् ॥</l> </lg>
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Verse 29
<lg n="29"> <l>मनोज्ञरम्भावनखण्डखण्डिता-</l> <l>न्रुचिप्रदान्सर्षपजीरकांश्च ।</l> <l>ससौरभान्सैन्धवसेवितांश्च</l> <l>गृहाण मृत्युंजय लोकवन्द्य ॥ २९ ॥</l> </lg>
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Verse 31
<lg n="31"> <l>एलाशुण्ठीसहीतं</l> <l>दध्यन्नं चारुहेमपात्रस्थम् ।</l> <pb n="112"/> <l>अमृतप्रतिनिधिमाढ्यं</l> <l>मृत्युंजय भुज्यतां त्रिलोकेश ॥ ३१ ॥</l> </lg>
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Verse 33
<lg n="33"> <l>नागररामठयुक्तं</l> <l>सुललितजम्बीरनीरसंपूर्णम् ।</l> <l>मथितं सैन्धवसहितं</l> <l>पिब हर मृत्युंजय ऋतुध्वंसिन् ॥ ३३ ॥</l> </lg>
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Verse 40
<lg n="40"> <l>पुंनागनीलोत्पलकुन्दजाजी-</l> <l>मन्दारमल्लीकरवीरपङ्कजैः ।</l> <l>पुष्पाञ्जलिं बिल्वदलैस्तुलस्या</l> <l>मृत्युंजयाङ्घ्रौ विनिवेशयामि ॥ ४० ॥</l> </lg>
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