Reports » श्रीकामाक्षीस्तुतिः
Updated 2026-05-10 02:22
XML
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<lg n="23"> <l>देवि त्वद्वदनाम्बुजं वितनुताच्छ्रेयः परं शाश्वतं</l> <l>कामाक्ष्यद्य ममाम्ब पङ्कजमिदं यत्कान्तिलाभे<add rend="brackets">च्छया</add>।</l> <l>तोये नूनमहर्निशं च विमले मङ्क्त्वा तपस्यत्यलं</l> <l>तत्सौन्दर्यनिधानमग्र्यसुषमं कान्तालकालङ्कृतम् ॥ २३ ॥</l> </lg>
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Text
Devanagari text is well-formed ✓ Passed (160/160)
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Verse numbers match `n` attribute ✓ Passed (32/32)
Meter
All verses have a known meter ⚠ Partial (18/32)
Verse 7
<lg n="7"> <l>कामाक्षीचरणारविन्दयुगलीगुल्फट्टयं रक्षता-</l> <l>दस्मान् संततमाश्रितार्तिशमनं दोषौघविध्वंसनम् ।</l> <l>तेजःपूरनिधानमङ्घ्रिवलयाद्याकल्पसङ्घट्टन-</l> <l>प्रोद्यद्ध्वानमिषेण च प्रतिशृणन्नम्रालिरक्षामिव ॥ ७ ॥</l> </lg>
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Verse 8
<lg n="8"> <l>जङ्घे द्वे भवतां जगत्त्रयनुते नित्यं त्वदीये मन-</l> <l>स्सन्तोषाय ममामितोर्जितयशःसंपत्तये च स्वयम् ।</l> <l>साम्योल्लङ्घनजाङ्घिके सुवपुषा वृत्ते प्रभासंयुते</l> <l>हे कामाक्षि समुन्नते त्रिभुवनीसङ्क्रान्तियोग्ये वरे ॥ ८ ॥</l> </lg>
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नी
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Verse 10
<lg n="10"> <l>ऊरू ते भवतां मुदे मम सदा कामाक्षि भो देवते</l> <l>रम्भाटोपविमर्दनैकनिपुणे नीलोत्पलाभे शुभे ।</l> <l>शुण्डादण्डनिभे त्रिलोकविजयस्तम्भौ शुचित्वार्जव-</l> <l>श्रीयुक्ते च नितम्बभारभरणैकाग्रप्रयत्ने सदा ॥ १० ॥</l> </lg>
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Verse 12
<lg n="12"> <l>बोभूतां यशसे ममाम्ब रुचिरौ भूलोकसञ्चारतः</l> <l>श्रान्तौ स्थूलतरौ तवातिमृदुलौ स्निग्धौ नितम्बौ शुभौ ।</l> <l>गाङ्गेयोन्नतसैकतस्थलकचग्राहिस्वरूपौ गुण-</l> <l>श्लाघ्यो गौरवशोभिनौ सुविपुलौ कामाक्षि भो देवते ॥ १२ ॥</l> </lg>
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Verse 13
<lg n="13"> <l>कामाक्ष्यद्य सुरक्षतात् कटितटी तावक्यतीवोज्ज्वल-</l> <l>द्रत्नालङ्कृतहाटकाढ्यरशनासम्बद्धघण्टारवा ।</l> <l>तत्रत्येन्दुमणीन्द्रनीलगरुडप्रख्योपलज्योतिषा</l> <l>व्याप्ता वासवकार्मुकद्युतिखनीवाभाति या सर्वदा ॥ १३ ॥</l> </lg>
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Verse 15
<lg n="15"> <l>यन्नाभीसरसी भवाभिधमरुक्षोणीनिविष्टोद्भव-</l> <l>त्तृष्णार्ताखिलदेहिनामनुकलं सुज्ञानतोयं वरम् ।</l> <l>दत्वा देवि सुगन्धि सद्गुणसदासेव्यं प्रणुद्य श्रमं</l> <l>सन्तोषाय च बोभवीतु महिते कामाक्षि भो देवते ॥ १५ ॥</l> </lg>
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Verse 16
<lg n="16"> <l>यन्मध्यं तव देवि सूक्ष्ममतुलं लावण्यमूलं नभः-</l> <l>प्रख्यं दुष्टनिरीक्षणप्रसरणश्रान्त्यापनुत्त्या इव ।</l> <l>जातं लोचनदूरगं तदवतात् कामाक्षि सिंहान्तर-</l> <l>स्वैराटोपनिरासकारि विमलज्योतिर्मयं प्रत्यहम् ॥ १६ ॥</l> </lg>
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Verse 18
<lg n="18"> <l>पाणी ते शरणागताभिलषितश्रेयःप्रदानोद्यतौ</l> <l>सौभाग्याधिकशंसिशास्त्रविहरद्रेखङ्कितौ शौभनौ ।</l> <l>स्वर्लोकद्रुमपञ्चकं वितरणे तत्तत्तृषां तस्य त-</l> <l>त्पात्रालाभविशङ्कयाङ्गुलिमिषान्मन्ये विभात्यत्र हि ॥ १८ ॥</l> </lg>
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कं
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त्तृ
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Verse 20
<lg n="20"> <l>भूयास्तां भुजगाधिपाविव मुदे बाहू सदा मांसलौ</l> <l>कामाक्ष्युज्ज्वलनूत्नरत्नखचितस्वर्णाङ्गदालङ्कृतौ ।</l> <l>भावत्कौ मम देवि सुन्दरतरौ दूरीकृतद्वेषण-</l> <l>प्रोद्यद्बाहुबलौ जगत्त्रयनुतौ नम्रालिरक्षापरौ ॥ २० ॥</l> </lg>
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गा
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धि
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ब
L
|
लौ
G
|
ज
L
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ग
G
|
त्त्र
L
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य
L
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नु
L
|
तौ
G
|
न
G
|
म्रा
G
|
लि
L
|
र
G
|
क्षा
G
|
प
L
|
रौ
G
|
Verse 22
<lg n="22"> <l>ग्रीवा कम्बुसमानसंस्थितिरसौ कान्त्येन्द्रनीलोपमा</l> <l>पायान्मामनिशं पुराणविनुते कामाक्षि भो तावकी ।</l> <l>नानारत्नविभूषणैः सुरुचिरा सौवर्णकैर्मौक्तिक-</l> <l>श्रेष्ठोद्गुम्भितमालया च विमला लावण्यपाथोनिधिः ॥ २२ ॥</l> </lg>
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ग्री
G
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वा
G
|
क
G
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म्बु
L
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स
L
|
मा
G
|
न
L
|
सं
G
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स्थि
L
|
ति
L
|
र
L
|
सौ
G
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का
G
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न्त्ये
G
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न्द्र
L
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नी
G
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लो
G
|
प
L
|
मा
G
|
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पा
G
|
या
G
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न्मा
G
|
म
L
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नि
L
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शं
G
|
पु
L
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रा
G
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ण
L
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वि
L
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नु
L
|
ते
G
|
का
G
|
मा
G
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क्षि
L
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भो
G
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ता
G
|
व
L
|
की
G
|
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ना
G
|
ना
G
|
र
G
|
त्न
L
|
वि
L
|
भू
G
|
ष
L
|
णैः
G
|
सु
L
|
रु
L
|
चि
L
|
रा
G
|
सौ
G
|
व
G
|
र्ण
L
|
कै
G
|
र्मौ
G
|
क्ति
L
|
क
L
|
|
श्रे
G
|
ष्ठो
G
|
द्गु
G
|
म्भि
L
|
त
L
|
मा
G
|
ल
L
|
या
G
|
च
L
|
वि
L
|
म
L
|
ला
G
|
ला
G
|
व
G
|
ण्य
L
|
पा
G
|
थो
G
|
नि
L
|
धिः
G
|
Verse 26
<lg n="26"> <l>नानासूनवितानसौरभपरिग्राहैकलोलालयः</l> <l>किं मां प्रत्यभियन्ति नेति कुपितं तप्त्वा तपो दुष्करम् ।</l> <l>नासीभूय तवातिसौरभवहं भूत्वाभितः प्रेक्षण-</l> <l>व्याजेन प्रियकप्रसूनमलिभिः कामाक्षि भात्याश्रितम् ॥ २६ ॥</l> </lg>
|
ना
G
|
ना
G
|
सू
G
|
न
L
|
वि
L
|
ता
G
|
न
L
|
सौ
G
|
र
L
|
भ
L
|
प
L
|
रि
G
|
ग्रा
G
|
है
G
|
क
L
|
लो
G
|
ला
G
|
ल
L
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यः
G
|
|
किं
G
|
मां
G
|
प्र
G
|
त्य
L
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भि
L
|
य
G
|
न्ति
L
|
ने
G
|
ति
L
|
कु
L
|
पि
L
|
तं
G
|
त
G
|
प्त्वा
G
|
त
L
|
पो
G
|
दु
G
|
ष्क
L
|
रम्
L
|
|
ना
G
|
सी
G
|
भू
G
|
य
L
|
त
L
|
वा
G
|
ति
L
|
सौ
G
|
र
L
|
भ
L
|
व
L
|
हं
G
|
भू
G
|
त्वा
G
|
भि
L
|
तः
G
|
प्रे
G
|
क्ष
L
|
ण
L
|
|
व्या
G
|
जे
G
|
न
G
|
प्रि
L
|
य
L
|
क
G
|
प्र
L
|
सू
G
|
न
L
|
म
L
|
लि
L
|
भिः
G
|
का
G
|
मा
G
|
क्षि
L
|
भा
G
|
त्या
G
|
श्रि
L
|
तम्
L
|
Verse 28
<lg n="28"> <l>सन्तोषं श्रुतिशष्कुलीयुगमिदं सद्रत्नशोभास्फुर-</l> <l>त्ताटङ्काढ्ययुगेन भाखररुचा संभूषितं तावकम् ।</l> <l>कामाक्ष्यद्य चरीकरीतु विमलज्योतिर्ममानारतं</l> <l>स्वाभ्याशस्थितगण्डभागफलकं संराजयज्ज्योतिषा ॥ २८ ॥</l> </lg>
|
स
G
|
न्तो
G
|
षं
G
|
श्रु
L
|
ति
L
|
श
G
|
ष्कु
L
|
ली
G
|
यु
L
|
ग
L
|
मि
L
|
दं
G
|
स
G
|
द्र
G
|
त्न
L
|
शो
G
|
भा
G
|
स्फु
L
|
र
L
|
|
त्ता
G
|
ट
G
|
ङ्का
G
|
ढ्य
L
|
यु
L
|
गे
G
|
न
L
|
भा
G
|
ख
L
|
र
L
|
रु
L
|
चा
G
|
सं
G
|
भू
G
|
षि
L
|
तं
G
|
ता
G
|
व
L
|
कम्
L
|
|
का
G
|
मा
G
|
क्ष्य
G
|
द्य
L
|
च
L
|
री
G
|
क
L
|
री
G
|
तु
L
|
वि
L
|
म
L
|
ल
G
|
ज्यो
G
|
ति
G
|
र्म
L
|
मा
G
|
ना
G
|
र
L
|
तं
G
|
|
स्वा
G
|
भ्या
G
|
श
G
|
स्थि
L
|
त
L
|
ग
G
|
ण्ड
L
|
भा
G
|
ग
L
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फ
L
|
ल
L
|
कं
G
|
सं
G
|
रा
G
|
ज
L
|
य
G
|
ज्ज्यो
G
|
ति
L
|
षा
G
|
Verse 29
<lg n="29"> <l>शीर्षं ते शिरसा नमामि सततं कामाक्ष्यहं सुन्दरं</l> <l>सूक्ष्मं तन्मधुपालिनीलकुटिलश्रीकुन्तलालङ्कृतम् ।</l> <l>सीमन्तं सुविभज्य तत्र विपुलश्रीमन्मणीन्द्राञ्चित-</l> <l>स्वर्णालङ्करणप्रभासुरुचिरं शीर्षण्यभूषायितम् ॥ २९ ॥</l> </lg>
|
शी
G
|
र्षं
G
|
ते
G
|
शि
L
|
र
L
|
सा
G
|
न
L
|
मा
G
|
मि
L
|
स
L
|
त
L
|
तं
G
|
का
G
|
मा
G
|
क्ष्य
L
|
हं
G
|
सु
G
|
न्द
L
|
रं
G
|
|
सू
G
|
क्ष्मं
G
|
त
G
|
न्म
L
|
धु
L
|
पा
G
|
लि
L
|
नी
G
|
ल
L
|
कु
L
|
टि
L
|
ल
G
|
श्री
G
|
कु
G
|
न्त
L
|
ला
G
|
ल
G
|
ङ्कृ
L
|
तम्
L
|
|
सी
G
|
म
G
|
न्तं
G
|
सु
L
|
वि
L
|
भ
G
|
ज्य
L
|
त
G
|
त्र
L
|
वि
L
|
पु
L
|
ल
G
|
श्री
G
|
म
G
|
न्म
L
|
णी
G
|
न्द्रा
G
|
ञ्चि
L
|
त
L
|
|
स्व
G
|
र्णा
G
|
ल
G
|
ङ्क
L
|
र
L
|
ण
G
|
प्र
L
|
भा
G
|
सु
L
|
रु
L
|
चि
L
|
रं
G
|
शी
G
|
र्ष
G
|
ण्य
L
|
भू
G
|
षा
G
|
यि
L
|
तम्
L
|
Verse 30
<lg n="30"> <l>कामाक्षीश्वरि कोटिसूर्यनिभसद्वज्रादिरत्नाञ्चित-</l> <l>श्रीमन्मुग्धकिरीटभृद्वितरताद्धन्यं शिरस्तावकम् ।</l> <l>संपत्ति नितरां ममाम्ब मनुजाप्राप्यामिहानारतं</l> <l>लोकेऽमुत्र भवाभिधं च तिमिरं लूत्वा सदालिश्रितम् ॥ ३० ॥</l> </lg>
|
का
G
|
मा
G
|
क्षी
G
|
श्व
L
|
रि
L
|
को
G
|
टि
L
|
सू
G
|
र्य
L
|
नि
L
|
भ
L
|
स
G
|
द्व
G
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ज्रा
G
|
दि
L
|
र
G
|
त्ना
G
|
ञ्चि
L
|
त
L
|
|
श्री
G
|
म
G
|
न्मु
G
|
ग्ध
L
|
कि
L
|
री
G
|
ट
L
|
भृ
G
|
द्वि
L
|
त
L
|
र
L
|
ता
G
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द्ध
G
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न्यं
G
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शि
L
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र
G
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स्ता
G
|
व
L
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कम्
L
|
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सं
G
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प
G
|
त्ति
L
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नि
L
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त
L
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रां
G
|
म
L
|
मा
G
|
म्ब
L
|
म
L
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नु
L
|
जा
G
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प्रा
G
|
प्या
G
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मि
L
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हा
G
|
ना
G
|
र
L
|
तं
G
|
|
लो
G
|
के
G
|
मु
G
|
त्र
L
|
भ
L
|
वा
G
|
भि
L
|
धं
G
|
च
L
|
ति
L
|
मि
L
|
रं
G
|
लू
G
|
त्वा
G
|
स
L
|
दा
G
|
लि
G
|
श्रि
L
|
तम्
L
|