Reports » श्रीअपराधस्तवः
Updated 2026-04-26 20:24
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Text
Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (169/170)
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<add>(?)</add>क्लिन्नमहार्णवं व्रणमुखैर्नित्यं स्रवन्तं मलम् ।
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Meter
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Verse 2
<lg n="2"> <l>स्वामिन् सर्वजगद्गुरो हर महालीलाक्षमाक्षेत्रस-</l> <l>च्चिद्रूपाखिलभूतभाव्यजगतां नाथ प्रपन्नार्तिहन् ।</l> <l>पापघ्नाशुभपाशदुःखभयहृद्भक्तेष्टद ज्ञानद</l> <l>श्रीदातर्क्य षडङ्ग मोक्षण महायोगीश तुभ्यं नमः ॥ २ ॥</l> </lg>
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ग
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हा
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ली
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क्ष
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मा
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क्षे
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त्र
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स
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च्चि
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द्रू
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पा
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खि
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ल
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भू
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त
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भा
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व्य
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ज
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ग
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ना
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थ
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प्र
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प
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न्ना
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हन्
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पा
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प
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घ्ना
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शु
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भ
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पा
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श
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दुः
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ख
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भ
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य
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हृ
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द्भ
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क्ते
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ष्ट
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द
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ज्ञा
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न
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द
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श्री
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दा
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त
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र्क्य
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ष
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ड
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ङ्ग
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मो
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ण
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म
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हा
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यो
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गी
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श
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तु
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भ्यं
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न
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मः
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Verse 4
<lg n="4"> <l>मूर्खं बालमतिं स्वधर्मरहितं धर्मार्थहीनं खलं</l> <l>कामान्धं क्षणिकं कदर्थनपरं दौश्शील्यजन्मस्थलम् ।</l> <pb n="124"/> <l>अज्ञं लुब्धमसत्यनिष्ठमधमं प्रज्ञायशोवजितं</l> <l>कारुण्याकरवारिधे भवपितर्दोषाकरं पाहि माम् ॥ ४ ॥</l> </lg>
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मू
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र्खं
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बा
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ल
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म
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तिं
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स्व
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ध
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र्म
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र
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हि
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तं
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ध
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र्मा
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र्थ
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ही
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नं
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ख
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लं
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का
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मा
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न्धं
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कं
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क
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र्थ
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न
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प
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रं
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दौ
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श्शी
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ल्य
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ज
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न्म
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स्थ
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लम्
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अ
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ज्ञं
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लु
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ब्ध
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म
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स
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त्य
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नि
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ष्ठ
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म
L
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ध
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मं
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प्र
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ज्ञा
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य
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शो
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व
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तं
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का
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रु
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ण्या
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भ
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त
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र्दो
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षा
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क
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रं
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Verse 17
<lg n="17"> <l>सत्यत्यागद्याक्षमाशमदमाद्यर्थानभिज्ञात्मकं</l> <l>देवब्राह्मणगोव्रजातिथिपितृज्ञानात्मकापूजकम् ।</l> <l>विश्वस्तेष्वपकारवञ्चनपरं मैत्रीरिपुं दुर्जनं</l> <l>कारुण्याकरवारिधे भव पितर्दोषकरं पाहि माम् ॥ १७ ॥</l> </lg>
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त्य
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त्या
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ग
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द्या
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क्ष
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मा
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द
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मा
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द्य
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र्था
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न
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ज्ञा
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त्म
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कं
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दे
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व
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ब्रा
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ह्म
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ण
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गो
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ति
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तृ
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ज्ञा
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ना
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त्म
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का
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पू
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ज
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कम्
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वि
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श्व
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स्ते
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ष्व
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प
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का
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र
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व
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ञ्च
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न
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प
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रं
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मै
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त्री
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रि
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पुं
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दु
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र्ज
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नं
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का
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रु
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ष
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Verse 29
<lg n="29">
<l>विण्मूत्रकृमिमांसशोणितमयं मेदोऽस्थिमज्जात्मकं</l>
<l>निर्गन्धैकनिधिं जरापरिगतं वातादिदोषात्मकम् ।</l>
<l>दृष्ट्वा तु स्वशरीरमत्र तु सदा वैराग्यहीनं पशुं</l>
<l>कारुण्याकरवारिधे भव पितर्दोषाकरं पाहि<choice>
<sic>मात्</sic>
<corr>माम्</corr>
</choice>॥ २९ ॥</l>
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वि
G
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ण्मू
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त्र
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कृ
L
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मि
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मां
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स
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मे
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स्थि
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म
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ज्जा
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त्म
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कं
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न्धै
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क
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L
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दो
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षा
G
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त्म
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कम्
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दृ
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ष्ट्वा
G
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तु
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स्व
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श
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री
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र
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दा
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रा
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ही
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प
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वा
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र्दो
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षा
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क
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रं
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पा
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Verse 30
<lg n="30"> <l>विष्ठामूत्रजन्त्वनिष्टमशुभं स्वाभाव्यतो नश्वरं</l> <l>कृष्णक्षेण्यविषूचिकाज्वरशिरश्शूलादिरोगास्पदम् ।</l> <l>ज्ञात्वा तु स्वशरीरमत्र तु सदा वैराग्यहीनं पशुं</l> <l>कारुण्याकरवारिधे भव पितर्दोषाकरं पाहि माम् ॥ ३० ॥</l> </lg>
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वि
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ष्ठा
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मू
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ज
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न्त्व
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नि
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ष्ट
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म
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शु
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स्वा
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श्व
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रं
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कृ
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ष्ण
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क्षे
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ण्य
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वि
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षू
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चि
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का
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ज्व
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र
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शि
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र
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श्शू
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ला
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दि
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रो
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गा
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स्प
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दम्
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ज्ञा
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त्वा
G
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तु
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र
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त्र
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तु
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