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Reports » श्रीअपराधस्तवः

Updated 2026-04-26 20:24

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All blocks have unique identifiers ✓ Passed (33/33)
Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' ✓ Passed (32/32)

Text

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<add>(?)</add>क्लिन्नमहार्णवं व्रणमुखैर्नित्यं स्रवन्तं मलम् ।
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Verse numbers match `n` attribute ✓ Passed (32/32)

Meter

All verses have a known meter ⚠ Partial (27/32)
Verse 2
<lg n="2">
  <l>स्वामिन् सर्वजगद्गुरो हर महालीलाक्षमाक्षेत्रस-</l>
  <l>च्चिद्रूपाखिलभूतभाव्यजगतां नाथ प्रपन्नार्तिहन् ।</l>
  <l>पापघ्नाशुभपाशदुःखभयहृद्भक्तेष्टद ज्ञानद</l>
  <l>श्रीदातर्क्य षडङ्ग मोक्षण महायोगीश तुभ्यं नमः ॥ २ ॥</l>
</lg>
स्वा
G
मि
G
न्स
G
र्व
L
ज
L
ग
G
द्गु
L
रो
G
ह
L
र
L
म
L
हा
G
ली
G
ला
G
क्ष
L
मा
G
क्षे
G
त्र
L
स
L
च्चि
G
द्रू
G
पा
G
खि
L
ल
L
भू
G
त
L
भा
G
व्य
L
ज
L
ग
L
तां
G
ना
G
थ
G
प्र
L
प
G
न्ना
G
र्ति
L
हन्
L
पा
G
प
G
घ्ना
G
शु
L
भ
L
पा
G
श
L
दुः
G
ख
L
भ
L
य
L
हृ
G
द्भ
G
क्ते
G
ष्ट
L
द
G
ज्ञा
G
न
L
द
G
श्री
G
दा
G
त
G
र्क्य
L
ष
L
ड
G
ङ्ग
L
मो
G
क्ष
L
ण
L
म
L
हा
G
यो
G
गी
G
श
L
तु
G
भ्यं
G
न
L
मः
G
Verse 4
<lg n="4">
  <l>मूर्खं बालमतिं स्वधर्मरहितं धर्मार्थहीनं खलं</l>
  <l>कामान्धं क्षणिकं कदर्थनपरं दौश्शील्यजन्मस्थलम् ।</l>
  <pb n="124"/>
  <l>अज्ञं लुब्धमसत्यनिष्ठमधमं प्रज्ञायशोवजितं</l>
  <l>कारुण्याकरवारिधे भवपितर्दोषाकरं पाहि माम् ॥ ४ ॥</l>
</lg>
मू
G
र्खं
G
बा
G
ल
L
म
L
तिं
G
स्व
L
ध
G
र्म
L
र
L
हि
L
तं
G
ध
G
र्मा
G
र्थ
L
ही
G
नं
G
ख
L
लं
G
का
G
मा
G
न्धं
G
क्ष
L
णि
L
कं
G
क
L
द
G
र्थ
L
न
L
प
L
रं
G
दौ
G
श्शी
G
ल्य
L
ज
G
न्म
G
स्थ
L
लम्
L
अ
G
ज्ञं
G
लु
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ब्ध
L
म
L
स
G
त्य
L
नि
G
ष्ठ
L
म
L
ध
L
मं
G
प्र
G
ज्ञा
G
य
L
शो
G
व
L
जि
L
तं
G
का
G
रु
G
ण्या
G
क
L
र
L
वा
G
रि
L
धे
G
भ
L
व
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पि
L
त
G
र्दो
G
षा
G
क
L
रं
G
पा
G
हि
L
माम्
G
Verse 17
<lg n="17">
  <l>सत्यत्यागद्याक्षमाशमदमाद्यर्थानभिज्ञात्मकं</l>
  <l>देवब्राह्मणगोव्रजातिथिपितृज्ञानात्मकापूजकम् ।</l>
  <l>विश्वस्तेष्वपकारवञ्चनपरं मैत्रीरिपुं दुर्जनं</l>
  <l>कारुण्याकरवारिधे भव पितर्दोषकरं पाहि माम् ॥ १७ ॥</l>
</lg>
स
G
त्य
G
त्या
G
ग
G
द्या
G
क्ष
L
मा
G
श
L
म
L
द
L
मा
G
द्य
G
र्था
G
न
L
भि
G
ज्ञा
G
त्म
L
कं
G
दे
G
व
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ब्रा
G
ह्म
L
ण
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गो
G
व्र
L
जा
G
ति
L
थि
L
पि
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तृ
G
ज्ञा
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ना
G
त्म
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का
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पू
G
ज
L
कम्
L
वि
G
श्व
G
स्ते
G
ष्व
L
प
L
का
G
र
L
व
G
ञ्च
L
न
L
प
L
रं
G
मै
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त्री
G
रि
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पुं
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दु
G
र्ज
L
नं
G
का
G
रु
G
ण्या
G
क
L
र
L
वा
G
रि
L
धे
G
भ
L
व
L
पि
L
त
G
र्दो
G
ष
L
क
L
रं
G
पा
G
हि
L
माम्
G
Verse 29
<lg n="29">
  <l>विण्मूत्रकृमिमांसशोणितमयं मेदोऽस्थिमज्जात्मकं</l>
  <l>निर्गन्धैकनिधिं जरापरिगतं वातादिदोषात्मकम् ।</l>
  <l>दृष्ट्वा तु स्वशरीरमत्र तु सदा वैराग्यहीनं पशुं</l>
  <l>कारुण्याकरवारिधे भव पितर्दोषाकरं पाहि<choice>
      <sic>मात्</sic>
      <corr>माम्</corr>
    </choice>॥ २९ ॥</l>
</lg>
वि
G
ण्मू
G
त्र
L
कृ
L
मि
L
मां
G
स
L
शो
G
णि
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त
L
म
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यं
G
मे
G
दो
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स्थि
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म
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ज्जा
G
त्म
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कं
G
नि
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र्ग
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न्धै
G
क
L
नि
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धिं
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ज
L
रा
G
प
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रि
L
ग
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तं
G
वा
G
ता
G
दि
L
दो
G
षा
G
त्म
L
कम्
L
दृ
G
ष्ट्वा
G
तु
G
स्व
L
श
L
री
G
र
L
म
G
त्र
L
तु
L
स
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दा
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वै
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रा
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ग्य
L
ही
G
नं
G
प
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शुं
G
का
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रु
G
ण्या
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क
L
र
L
वा
G
रि
L
धे
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भ
L
व
L
पि
L
त
G
र्दो
G
षा
G
क
L
रं
G
पा
G
हि
L
माम्
G
Verse 30
<lg n="30">
  <l>विष्ठामूत्रजन्त्वनिष्टमशुभं स्वाभाव्यतो नश्वरं</l>
  <l>कृष्णक्षेण्यविषूचिकाज्वरशिरश्शूलादिरोगास्पदम् ।</l>
  <l>ज्ञात्वा तु स्वशरीरमत्र तु सदा वैराग्यहीनं पशुं</l>
  <l>कारुण्याकरवारिधे भव पितर्दोषाकरं पाहि माम् ॥ ३० ॥</l>
</lg>
वि
G
ष्ठा
G
मू
G
त्र
L
ज
G
न्त्व
L
नि
G
ष्ट
L
म
L
शु
L
भं
G
स्वा
G
भा
G
व्य
L
तो
G
न
G
श्व
L
रं
G
कृ
G
ष्ण
G
क्षे
G
ण्य
L
वि
L
षू
G
चि
L
का
G
ज्व
L
र
L
शि
L
र
G
श्शू
G
ला
G
दि
L
रो
G
गा
G
स्प
L
दम्
L
ज्ञा
G
त्वा
G
तु
G
स्व
L
श
L
री
G
र
L
म
G
त्र
L
तु
L
स
L
दा
G
वै
G
रा
G
ग्य
L
ही
G
नं
G
प
L
शुं
G
का
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रु
G
ण्या
G
क
L
र
L
वा
G
रि
L
धे
G
भ
L
व
L
पि
L
त
G
र्दो
G
षा
G
क
L
रं
G
पा
G
हि
L
माम्
G