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Reports » शिवसङ्कल्पोपनिषत् (शिवसङ्कल्पमन्त्राः)

Updated 2026-02-22 23:42

XML

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<trailer n="trailer2">
  <add>[ इति शिवसङ्कल्पमन्त्राः समाप्ताः ]</add>
</trailer>
    
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All blocks have unique identifiers ✓ Passed (39/39)
Verse-only texts: <lg> slugs do not contain 'lg' ✓ Passed (37/37)

Text

Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (138/140)
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<add>[?]</add>।
Unexpected character '[' in text <[ इति शिवसङ्कल्पमन्त्राः समाप्ताः ]>
<add>[ इति शिवसङ्कल्पमन्त्राः समाप्ताः ]</add>
No leading or trailing spaces in text elements ⚠ Partial (97/98)
<l> has leading/trailing whitespace
<l>यस्य योनिं परिपश्यन्ति धीरास्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥<supplied>१५ ॥</supplied>
</l>
      
Verse numbers match `n` attribute — N/A (0/0)

Meter

All verses have a known meter ⚠ Partial (2/37)
Verse 1
<lg n="1">
  <l>येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत् परिगृहीतममृतेन सर्वम् ।</l>
  <l>येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १ ॥</l>
</lg>
      
ये
G
ने
G
दं
G
भू
G
तं
G
भु
L
व
L
नं
G
भ
L
वि
G
ष्य
G
त्प
L
रि
L
गृ
L
ही
G
त
L
म
L
मृ
L
ते
G
न
L
स
G
र्वम्
L
ये
G
न
L
य
G
ज्ञ
G
स्ता
G
य
L
ते
G
स
G
प्त
L
हो
G
ता
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 2
<lg n="2">
  <l>येन कर्माणि प्रचरन्ति धीरा यतो वाचा मनसा चारु यन्ति ।</l>
  <l>यत्संमितमनु संयन्ति प्राणिनस्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २ ॥</l>
</lg>
      
ये
G
न
L
क
G
र्मा
G
णि
G
प्र
L
च
L
र
G
न्ति
L
धी
G
रा
G
य
L
तो
G
वा
G
चा
G
म
L
न
L
सा
G
चा
G
रु
L
य
G
न्ति
L
य
G
त्सं
G
मि
L
त
L
म
L
नु
L
सं
G
य
G
न्ति
G
प्रा
G
णि
L
न
G
स्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 3
<lg n="3">
  <l>येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः ।</l>
  <l>यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३ ॥</l>
</lg>
      
ये
G
न
L
क
G
र्मा
G
ण्य
L
प
L
सो
G
म
L
नी
G
षि
L
णो
G
य
G
ज्ञे
G
कृ
G
ण्व
G
न्ति
L
वि
L
द
L
थे
G
षु
L
धी
G
राः
G
य
L
द
L
पू
G
र्वं
G
य
G
क्ष
L
म
G
न्तः
G
प्र
L
जा
G
नां
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 4
<lg n="4">
  <l>यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु ।</l>
  <l>यस्मान्न ऋते किञ्चन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥</l>
</lg>
      
य
G
त्प्र
G
ज्ञा
G
न
L
मु
L
त
L
चे
G
तो
G
धृ
L
ति
G
श्च
L
य
G
ज्ज्यो
G
ति
L
र
G
न्त
L
र
L
मृ
L
तं
G
प्र
L
जा
G
सु
L
य
G
स्मा
G
न्न
L
ऋ
L
ते
G
कि
G
ञ्च
L
न
L
क
G
र्म
G
क्रि
L
य
L
ते
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 5
<lg n="5">
  <l>सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव ।</l>
  <l>हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ५ ॥</l>
</lg>
      
सु
L
षा
G
र
L
थि
L
र
G
श्वा
G
नि
L
व
L
य
G
न्म
L
नु
G
ष्या
G
न्ने
G
नी
G
य
L
ते
G
भी
G
शु
L
भि
G
र्वा
G
जि
L
न
L
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L
व
L
हृ
G
त्प्र
L
ति
G
ष्ठं
G
य
L
द
L
जि
L
रं
G
ज
L
वि
G
ष्ठं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 6
<lg n="6">
  <l>यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः ।</l>
  <l>यस्मिंश्चित्तं सर्वमतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ६ ॥</l>
</lg>
      
य
G
स्मि
G
न्नृ
L
चः
G
सा
G
म
L
य
L
जूं
G
षि
L
य
G
स्मि
G
न्प्र
L
ति
G
ष्ठि
L
ता
G
र
L
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L
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G
भा
G
वि
L
वा
G
राः
G
य
G
स्मिं
G
श्चि
G
त्तं
G
स
G
र्व
L
म
L
तं
G
प्र
L
जा
G
नां
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 7
<lg n="7">
  <l>यत्र षष्ठं त्रिशतं सुवीरं यज्ञस्य गुह्यं नवनावमाय्यम्<add>[?]</add>।</l>
  <l>दश पञ्च त्रिंशतं यत्परं च तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ७ ॥</l>
</lg>
      
य
G
त्र
L
ष
G
ष्ठं
G
त्रि
L
श
L
तं
G
सु
L
वी
G
रं
G
य
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ज्ञ
G
स्य
L
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G
ह्यं
G
न
L
व
L
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G
व
L
मा
G
य्यम्
L
द
L
श
L
प
G
ञ्च
G
त्रिं
G
श
L
तं
G
य
G
त्प
L
रं
G
च
L
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 8
<lg n="8">
  <l>यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति ।</l>
  <l>दूरङ्गमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ८ ॥</l>
</lg>
      
य
G
ज्जा
G
ग्र
L
तो
G
दू
G
र
L
मु
L
दै
G
ति
L
दै
G
वं
G
त
L
दु
L
सु
G
प्त
G
स्य
L
त
L
थै
G
वै
G
ति
L
दू
G
र
G
ङ्ग
L
मं
G
ज्यो
G
ति
L
षां
G
ज्यो
G
ति
L
रे
G
कं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 9
<lg n="9">
  <l>येन द्यौः पृथिवी चान्तरिक्षं च ये पर्वताः प्रदिशो दिशश्च ।</l>
  <l>येनेदं जगद्व्याप्तं प्रजानां तन्मे मनः विसङ्कल्पमस्तु ॥ ९ ॥</l>
</lg>
      
ये
G
न
G
द्यौः
G
पृ
L
थि
L
वी
G
चा
G
न्त
L
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L
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L
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L
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L
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L
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L
ग
G
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G
प्र
L
जा
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नां
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
वि
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 10
<lg n="10">
  <l>येनेदं विश्वं जगतो बभूव ये देवा अपि महतो जातवेदाः ।</l>
  <l>तदेवाग्निस्तमसो ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १० ॥</l>
</lg>
      
ये
G
ने
G
दं
G
वि
G
श्वं
G
ज
L
ग
L
तो
G
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L
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L
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L
म
L
ह
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तो
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G
त
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दे
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वा
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G
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L
म
L
सो
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ज्यो
G
ति
L
रे
G
कं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 11
<lg n="11">
  <l>ये मनो हृदयं ये च देवा ये दिव्या आपो ये सूर्यरश्मिः ।</l>
  <l>ते श्रोत्रे चक्षुषी सञ्चरन्तं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ११ ॥</l>
</lg>
      
ये
G
म
L
नो
G
हृ
L
द
L
यं
G
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G
च
L
दे
G
वा
G
ये
G
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G
व्या
G
आ
G
पो
G
ये
G
सू
G
र्य
L
र
G
श्मिः
G
ते
G
श्रो
G
त्रे
G
च
G
क्षु
L
षी
G
स
G
ञ्च
L
र
G
न्तं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 12
<lg n="12">
  <l>अचिन्त्यं चाप्रमेयं च व्यक्ताव्यक्तपरं च यत् ।</l>
  <l>सूक्ष्मात्सूक्ष्मतरं ज्ञेयं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १२ ॥</l>
</lg>
      
अ
L
चि
G
न्त्यं
G
चा
G
प्र
L
मे
G
यं
G
च
G
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प
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क्ष्मा
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त्सू
G
क्ष्म
L
त
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रं
G
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G
यं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 13
<lg n="13">
  <l>एका च दश शतं च सहस्रं चायुतं च</l>
  <l>नियुतं च प्रयुतं चार्बुदं च न्यर्बुदं च ।</l>
  <l>समुद्रश्च मध्यं चान्तश्च परार्धश्च</l>
  <l>तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १३ ॥</l>
</lg>
      
ए
G
का
G
च
L
द
L
श
L
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L
तं
G
च
L
स
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यु
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तं
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च
G
प्र
L
यु
L
तं
G
चा
G
र्बु
L
दं
G
च
G
न्य
G
र्बु
L
दं
G
च
L
स
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मु
G
द्र
G
श्च
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G
ध्यं
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L
त
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न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 14
<lg n="14">
  <l>ये पञ्च पञ्चदश शतं सहस्रमयुतं न्यर्बुदं च ।</l>
  <l>तेऽग्निचित्येष्टकास्तं शरीरं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १४ ॥</l>
</lg>
      
ये
G
प
G
ञ्च
L
प
G
ञ्च
L
द
L
श
L
श
L
तं
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स
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ह
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स्र
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म
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यु
L
तं
G
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G
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L
दं
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च
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ते
G
ग्नि
L
चि
G
त्ये
G
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L
का
G
स्तं
G
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G
रं
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त
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न्मे
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म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 15
<lg n="15">
  <l>वेदाहमेतं पुरुषं महान्तमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ।</l>
  <l>यस्य योनिं परिपश्यन्ति धीरास्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥<supplied>१५ ॥</supplied>
  </l>
</lg>
      
वे
G
दा
G
ह
L
मे
G
तं
G
पु
L
रु
L
षं
G
म
L
हा
G
न्त
L
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G
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G
त्य
L
व
G
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G
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L
म
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G
प
L
र
G
स्तात्
G
य
G
स्य
L
यो
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निं
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प
L
रि
L
प
G
श्य
G
न्ति
L
धी
G
रा
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स्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 16
<lg n="16">
  <l>यस्येदं धीराः पुनन्ति कवयो ब्रह्माणमेतं त्वा वृणुत इन्दुम् ।</l>
  <l>स्थावरं जङ्गमं द्यौराकाशं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १६ ॥</l>
</lg>
      
य
G
स्ये
G
दं
G
धी
G
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G
पु
L
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G
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L
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G
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L
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G
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ङ्ग
L
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G
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G
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शं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 17
<lg n="17">
  <l>परात् परतरं चैव यत्पराञ्चैव यत्परम् ।</l>
  <l>यत्परात्परतो ज्ञेयं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १७ ॥</l>
</lg>
      
प
L
रा
G
त्प
L
र
L
त
L
रं
G
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G
व
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य
G
त्प
L
रा
G
ञ्चै
G
व
L
य
G
त्प
L
रम्
L
य
G
त्प
L
रा
G
त्प
L
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ज्ञे
G
यं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 18
<lg n="18">
  <l>परात् परतरो ब्रह्मा तत्परात् परतो हरिः ।</l>
  <l>तत्परात् परतोऽधीशस्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ १८ ॥</l>
</lg>
      
प
L
रा
G
त्प
L
र
L
त
L
रो
G
ब्र
G
ह्मा
G
त
G
त्प
L
रा
G
त्प
L
र
L
तो
G
ह
L
रिः
G
त
G
त्प
L
रा
G
त्प
L
र
L
तो
G
धी
G
श
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स्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 20
<lg n="20">
  <l>यो वै देवं महादेवं प्रणवं पुरुषोत्तमम् ।</l>
  <l>यः सर्वे सर्ववेदैश्च तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २० ॥</l>
</lg>
      
यो
G
वै
G
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षो
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त्त
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मम्
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दै
G
श्च
L
त
G
न्मे
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म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 21
<lg n="21">
  <l>प्रयतः प्रणवोङ्कारं प्रणवं पुरुषोत्तमम् ।</l>
  <l>ओङ्कारं प्रणवात्मानं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २१ ॥</l>
</lg>
      
प्र
L
य
L
तः
G
प्र
L
ण
L
वो
G
ङ्का
G
रं
G
प्र
L
ण
L
वं
G
पु
L
रु
L
षो
G
त्त
L
मम्
L
ओ
G
ङ्का
G
रं
G
प्र
L
ण
L
वा
G
त्मा
G
नं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 22
<lg n="22">
  <l>योऽसौ सर्वेषु वेदेषु पठ्यते ह्यज ईश्वरः ।</l>
  <l>अकायो निर्गुणो ह्यात्मा तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २२ ॥</l>
</lg>
      
यो
G
सौ
G
स
G
र्वे
G
षु
L
वे
G
दे
G
षु
L
प
G
ठ्य
L
ते
G
ह्य
L
ज
L
ई
G
श्व
L
रः
G
अ
L
का
G
यो
G
नि
G
र्गु
L
णो
G
ह्या
G
त्मा
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 23
<lg n="23">
  <l>गोभिर्जुष्टं धनेन ह्यायुषा च बलेन च ।</l>
  <l>प्रजया पशुभिः पुष्कराक्षं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २३ ॥</l>
</lg>
      
गो
G
भि
G
र्जु
G
ष्टं
G
ध
L
ने
G
न
G
ह्या
G
यु
L
षा
G
च
L
ब
L
ले
G
न
L
च
L
प्र
L
ज
L
या
G
प
L
शु
L
भिः
G
पु
G
ष्क
L
रा
G
क्षं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 24
<lg n="24">
  <l>त्रियम्बकं यजामहे</l>
  <l>सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।</l>
  <l>उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय</l>
  <l>मामृतात्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २४ ॥</l>
</lg>
      
त्रि
L
य
G
म्ब
L
कं
G
य
L
जा
G
म
L
हे
G
सु
L
ग
G
न्धिं
G
पु
G
ष्टि
L
व
G
र्ध
L
नम्
L
उ
G
र्वा
G
रु
L
क
L
मि
L
व
L
ब
G
न्ध
L
ना
G
न्मृ
G
त्यो
G
र्मु
G
क्षी
G
य
L
मा
G
मृ
L
ता
G
त्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 25
<lg n="25">
  <l>कैलासशिखरे रम्ये शङ्करस्य शिवालये ।</l>
  <l>देवतास्तत्र मोदन्ते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २५ ॥</l>
</lg>
      
कै
G
ला
G
स
L
शि
L
ख
L
रे
G
र
G
म्ये
G
श
G
ङ्क
L
र
G
स्य
L
शि
L
वा
G
ल
L
ये
G
दे
G
व
L
ता
G
स्त
G
त्र
L
मो
G
द
G
न्ते
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 26
<lg n="26">
  <l>विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखो</l>
  <l>विश्वतोहस्त उत विश्वतस्पात् ।</l>
  <l>संबाहुभ्यां नमति संपतत्रैर्द्यावापृथिवी</l>
  <l>जनयन् देव एकस्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २६ ॥</l>
</lg>
      
वि
G
श्व
L
त
G
श्च
G
क्षु
L
रु
L
त
L
वि
G
श्व
L
तो
G
मु
L
खो
G
वि
G
श्व
L
तो
G
ह
G
स्त
L
उ
L
त
L
वि
G
श्व
L
त
G
स्पात्
G
सं
G
बा
G
हु
G
भ्यां
G
न
L
म
L
ति
L
सं
G
प
L
त
G
त्रै
G
र्द्या
G
वा
G
पृ
L
थि
L
वी
G
ज
L
न
L
य
G
न्दे
G
व
L
ए
G
क
G
स्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 27
<lg n="27">
  <l>चतुरो वेदानधीयीत सर्वशास्त्रमयं विदुः ।</l>
  <l>इतिहासपुराणानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २७ ॥</l>
</lg>
      
च
L
तु
L
रो
G
वे
G
दा
G
न
L
धी
G
यी
G
त
L
स
G
र्व
L
शा
G
स्त्र
L
म
L
यं
G
वि
L
दुः
G
इ
L
ति
L
हा
G
स
L
पु
L
रा
G
णा
G
नां
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 28
<lg n="28">
  <l>मा नो महान्तमुत मा नो अर्भकं</l>
  <l>मा न उक्षन्तमुत मा न उक्षितम् ।</l>
  <l>मा नो वधीः पितरं मोत मातरं प्रिया मा नः</l>
  <l>तनुवो रुद्र रीरिषस्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २८ ॥</l>
</lg>
      
मा
G
नो
G
म
L
हा
G
न्त
L
मु
L
त
L
मा
G
नो
G
अ
G
र्भ
L
कं
G
मा
G
न
L
उ
G
क्ष
G
न्त
L
मु
L
त
L
मा
G
न
L
उ
G
क्षि
L
तम्
L
मा
G
नो
G
व
L
धीः
G
पि
L
त
L
रं
G
मो
G
त
L
मा
G
त
L
रं
G
प्रि
L
या
G
मा
G
नः
G
त
L
नु
L
वो
G
रु
G
द्र
L
री
G
रि
L
ष
G
स्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 29
<lg n="29">
  <l>मा नस्तोके तनयं मा न आयुषि</l>
  <l>मा नो गोषु मा नो अश्वेषु रीरिषः ।</l>
  <l>वीरान्मा नो रुद्र भामितो वधीर्हविष्मन्तः</l>
  <l>नमसा विधेम ते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ २९ ॥</l>
</lg>
      
मा
G
न
G
स्तो
G
के
G
त
L
न
L
यं
G
मा
G
न
L
आ
G
यु
L
षि
L
मा
G
नो
G
गो
G
षु
L
मा
G
नो
G
अ
G
श्वे
G
षु
L
री
G
रि
L
षः
G
वी
G
रा
G
न्मा
G
नो
G
रु
G
द्र
L
भा
G
मि
L
तो
G
व
L
धी
G
र्ह
L
वि
G
ष्म
G
न्तः
G
न
L
म
L
सा
G
वि
L
धे
G
म
L
ते
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 30
<lg n="30">
  <l>ऋतं सत्यं परं ब्रह्म</l>
  <l>पुरुषं कृष्णपिङ्गळम् ।</l>
  <l>ऊर्ध्वरेतं विरूपाक्षं विश्वरूपाय वै नमो नमः</l>
  <l>तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३० ॥</l>
</lg>
      
ऋ
L
तं
G
स
G
त्यं
G
प
L
रं
G
ब्र
G
ह्म
L
पु
L
रु
L
षं
G
कृ
G
ष्ण
L
पि
G
ङ्ग
L
ळम्
L
ऊ
G
र्ध्व
L
रे
G
तं
G
वि
L
रू
G
पा
G
क्षं
G
वि
G
श्व
L
रू
G
पा
G
य
L
वै
G
न
L
मो
G
न
L
मः
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 31
<lg n="31">
  <l>कद्रुद्राय प्रचेतसे मीढुष्टमाय तव्यसे ।</l>
  <l>वोचेम शन्तमं हृदे ।</l>
  <l>सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु</l>
  <l>तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३१ ॥</l>
</lg>
      
क
G
द्रु
G
द्रा
G
य
G
प्र
L
चे
G
त
L
से
G
मी
G
ढु
G
ष्ट
L
मा
G
य
L
त
G
व्य
L
से
G
वो
G
चे
G
म
L
श
G
न्त
L
मं
G
हृ
L
दे
G
स
G
र्वो
G
ह्ये
G
ष
L
रु
G
द्र
G
स्त
G
स्मै
G
रु
G
द्रा
G
य
L
न
L
मो
G
अ
G
स्तु
L
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 32
<lg n="32">
  <l>ब्रह्म जज्ञानं प्रथमं पुरस्तात्</l>
  <l>वि सीमतः सुरुचो वेन आवः ।</l>
  <l>स बुध्निया उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिं</l>
  <l>असतश्च विवस्तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३२ ॥</l>
</lg>
      
ब्र
G
ह्म
L
ज
G
ज्ञा
G
नं
G
प्र
L
थ
L
मं
G
पु
L
र
G
स्तात्
G
वि
L
सी
G
म
L
तः
G
सु
L
रु
L
चो
G
वे
G
न
L
आ
G
वः
G
स
L
बु
G
ध्नि
L
या
G
उ
L
प
L
मा
G
अ
G
स्य
L
वि
G
ष्ठाः
G
स
L
त
G
श्च
L
यो
G
निं
G
अ
L
स
L
त
G
श्च
L
वि
L
व
G
स्त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 33
<lg n="33">
  <l>यः प्राणतो निमिषतो</l>
  <l>महित्वैक इद्राजा जगतो बभूव ।</l>
  <l>य ईशे अस्य द्विपदश्चतुष्पदः कस्मै देवाय</l>
  <l>हविषा विधेम तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३३ ॥</l>
</lg>
      
यः
G
प्रा
G
ण
L
तो
G
नि
L
मि
L
ष
L
तो
G
म
L
हि
G
त्वै
G
क
L
इ
G
द्रा
G
जा
G
ज
L
ग
L
तो
G
ब
L
भू
G
व
L
य
L
ई
G
शे
G
अ
G
स्य
G
द्वि
L
प
L
द
G
श्च
L
तु
G
ष्प
L
दः
G
क
G
स्मै
G
दे
G
वा
G
य
L
ह
L
वि
L
षा
G
वि
L
धे
G
म
L
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 34
<lg n="34">
  <l>य आत्मदा बलदा यस्य विश्वे</l>
  <l>उपासते प्रशिषं यस्य देवाः ।</l>
  <l>यस्य छायाऽमृतं यस्य मृत्युः कस्मै देवाय</l>
  <l>हविषा विधेम तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३४ ॥</l>
</lg>
      
य
L
आ
G
त्म
L
दा
G
ब
L
ल
L
दा
G
य
G
स्य
L
वि
G
श्वे
G
उ
L
पा
G
स
L
ते
G
प्र
L
शि
L
षं
G
य
G
स्य
L
दे
G
वाः
G
य
G
स्य
L
छा
G
या
G
मृ
L
तं
G
य
G
स्य
L
मृ
G
त्युः
G
क
G
स्मै
G
दे
G
वा
G
य
L
ह
L
वि
L
षा
G
वि
L
धे
G
म
L
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 35
<lg n="35">
  <l>यो रुद्रो अग्नौ यो अप्सु य ओषधीषु</l>
  <l>यो रुद्रो विश्वा भुवनाऽऽविवेश ।</l>
  <l>तस्मै रुद्राय नमो अस्तु</l>
  <l>तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३५ ॥</l>
</lg>
      
यो
G
रु
G
द्रो
G
अ
G
ग्नौ
G
यो
G
अ
G
प्सु
L
य
L
ओ
G
ष
L
धी
G
षु
L
यो
G
रु
G
द्रो
G
वि
G
श्वा
G
भु
L
व
L
ना
G
वि
L
वे
G
श
L
त
G
स्मै
G
रु
G
द्रा
G
य
L
न
L
मो
G
अ
G
स्तु
L
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L
Verse 36
<lg n="36">
  <l>गन्धद्वारां दुराधर्षां</l>
  <l>नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।</l>
  <l>ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियं</l>
  <l>तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥ ३६ ॥</l>
</lg>
      
ग
G
न्ध
G
द्वा
G
रां
G
दु
L
रा
G
ध
G
र्षां
G
नि
G
त्य
L
पु
G
ष्टां
G
क
L
री
G
षि
L
णीम्
G
ई
G
श्व
L
रीं
G
स
G
र्व
L
भू
G
ता
G
नां
G
ता
G
मि
L
हो
G
प
G
ह्व
L
ये
G
श्रि
L
यं
G
त
G
न्मे
G
म
L
नः
G
शि
L
व
L
स
G
ङ्क
G
ल्प
L
म
G
स्तु
L