Reports » शिवगीतम्
Updated 2026-02-22 23:41
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Text
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Meter
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Verse 1
<lg n="1"> <l>उद्दीप्यत् किरणं चित्रं श्रीशरणम् ।</l> <l>कामारेश्चरणं भूयाञन्नः शरणम् ॥ १ ॥</l> </lg>
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उ
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द्दी
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प्य
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त्कि
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र
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णं
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चि
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त्रं
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श्री
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श
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र
L
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णम्
L
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का
G
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मा
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रे
G
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श्च
L
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र
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णं
G
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भू
G
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या
G
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ञ
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न्नः
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श
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र
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णम्
L
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Verse 2
<lg n="2"> <l>सत्यः कोऽपि शिवो नित्यः पालयिता ।</l> <l>मध्ये यो जगतां स ध्येयः सततम् ॥ २ ॥</l> </lg>
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स
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त्यः
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को
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पि
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शि
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वो
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नि
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त्यः
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पा
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ल
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यि
L
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ता
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म
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ध्ये
G
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यो
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ज
L
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ग
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तां
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स
G
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ध्ये
G
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यः
G
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स
L
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त
L
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तम्
L
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Verse 3
<lg n="3"> <l>नास्त्येतस्य वपुर्वस्त्ये क्वापि न सः ।</l> <l>मत्याऽभाणि बुधैः सत्याधारपदम् ॥ ३ ॥</l> </lg>
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ना
G
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स्त्ये
G
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त
G
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स्य
L
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व
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पु
G
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र्व
G
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स्त्ये
G
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क्वा
G
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पि
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न
L
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सः
G
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म
G
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त्या
G
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भा
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णि
L
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बु
L
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धैः
G
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स
G
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त्या
G
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धा
G
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र
L
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प
L
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दम्
L
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Verse 4
<lg n="4"> <l>उक्तं सूक्ष्मतमं द्वेधैकं परमम् ।</l> <l>रूपं रूपतया किं च स्थानतया ॥ ४ ॥</l> </lg>
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उ
G
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क्तं
G
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सू
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क्ष्म
L
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त
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मं
G
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द्वे
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धै
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कं
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प
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र
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मम्
L
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रू
G
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पं
G
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रू
G
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प
L
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त
L
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या
G
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किं
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च
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स्था
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न
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त
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या
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Verse 5
<lg n="5"> <l>सोऽणुः स्यादणुतो धातैषां जगताम् ।</l> <l>तच्छक्तिर्महतो विज्ञेया महती ॥ ५ ॥</l> </lg>
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सो
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णुः
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स्या
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द
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णु
L
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तो
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धा
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तै
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षां
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ज
L
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ग
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ताम्
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त
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च्छ
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क्ति
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र्म
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ह
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तो
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वि
G
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ज्ञे
G
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या
G
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म
L
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ह
L
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ती
G
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Verse 6
<lg n="6"> <l>गत्वा तिष्ठति ना यत्स्वं हार्दपदम् ।</l> <l>अग्राह्यस्य विभोस्तस्य ध्यानमिदम् ॥ ६ ॥</l> </lg>
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ग
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त्वा
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ति
G
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ष्ठ
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ति
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ना
G
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य
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त्स्वं
G
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हा
G
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र्द
L
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प
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दम्
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अ
G
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ग्रा
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ह्य
G
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स्य
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वि
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भो
G
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स्त
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स्य
G
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ध्या
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न
L
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मि
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दम्
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Verse 7
<lg n="7"> <l>आत्मानं जगतां राजानं पितरम् ।</l> <l>आचार्यं च मुहुः सङ्गायामि हरम् ॥ ७ ॥</l> </lg>
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आ
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त्मा
G
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नं
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ज
L
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ग
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तां
G
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रा
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जा
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नं
G
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पि
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त
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रम्
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आ
G
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चा
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र्यं
G
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च
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मु
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हुः
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स
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ङ्गा
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या
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मि
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ह
L
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रम्
L
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Verse 8
<lg n="8"> <l>दीप्यन्तं दिवि तं लोके सर्वभुजम् ।</l> <l>भूतेशं प्रणुमो मायाकान्तमजम् ॥ ८ ॥</l> </lg>
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दी
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प्य
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न्तं
G
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दि
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वि
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तं
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लो
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के
G
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स
G
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र्व
L
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भु
L
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जम्
L
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भू
G
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ते
G
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शं
G
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प्र
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णु
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मो
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मा
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या
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का
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न्त
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म
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जम्
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Verse 9
<lg n="9"> <l>दृश्ये विश्वतनुं पारे निर्वपुषम् ।</l> <l>गायामः परमं भञक्तज्ञानपुषम् ॥ ९ ॥</l> </lg>
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दृ
G
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श्ये
G
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वि
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श्व
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त
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नुं
G
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पा
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G
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नि
G
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र्व
L
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पु
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षम्
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गा
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या
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मः
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प
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र
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मं
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ञ
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क्त
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ज्ञा
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न
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पु
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षम्
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Verse 10
<lg n="10"> <l>अष्टौ ते तनवः त्रातर्विश्वमिदम्<supplied> ।</supplied> </l> <l>वक्त्येतद्भवते माहात्म्यं विशदम् ॥ १० ॥</l> </lg>
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अ
G
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ष्टौ
G
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ते
G
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त
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न
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वः
G
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त्रा
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त
G
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र्वि
G
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श्व
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मि
L
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दम्
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व
G
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क्त्ये
G
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त
G
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द्भ
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व
L
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ते
G
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मा
G
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हा
G
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त्म्यं
G
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वि
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श
L
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दम्
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Verse 11
<lg n="11"> <l>सर्वेषां जगतां माता देवनुता ।</l> <l>ईशान त्रिगुणा माया ते दयिता ॥ ११ ॥</l> </lg>
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स
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र्वे
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षां
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ज
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ग
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तां
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मा
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ता
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दे
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ता
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शा
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|
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L
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L
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णा
G
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मा
G
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या
G
|
ते
G
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द
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यि
L
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ता
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Verse 12
<lg n="12"> <l>शक्त्यासौ भुवनं सृष्ट्वा पातुमिदम् ।</l> <l>हैमं दिव्यवपुर्जग्राहाभयदम् ॥ १२ ॥</l> </lg>
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श
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क्त्या
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सौ
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भु
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व
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नं
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सृ
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ष्ट्वा
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पा
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तु
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मि
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दम्
L
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है
G
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मं
G
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G
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व
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पु
G
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र्ज
G
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ग्रा
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हा
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भ
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य
L
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दम्
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Verse 13
<lg n="13"> <l>सूक्ष्मं स्यादगुणं हैमं स्यात्सगुणम् ।</l> <l>देवस्यादिविभोरेवं द्वे वपुषी ॥ १३ ॥</l> </lg>
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सू
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क्ष्मं
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स्या
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द
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गु
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णं
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है
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मं
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स्या
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त्स
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गु
L
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णम्
L
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दे
G
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व
G
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स्या
G
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दि
L
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वि
L
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भो
G
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रे
G
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वं
G
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द्वे
G
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व
L
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पु
L
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षी
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Verse 14
<lg n="14"> <l>भाषामात्रवपुः पूर्वं स्यादवपुः ।</l> <l>अन्यद्बुद्धिमतां ध्यानग्राह्यवपुः ॥ १४ ॥</l> </lg>
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भा
G
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षा
G
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मा
G
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त्र
L
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व
L
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पुः
G
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पू
G
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र्वं
G
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स्या
G
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द
L
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व
L
|
पुः
G
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अ
G
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न्य
G
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द्बु
G
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द्धि
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म
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तां
G
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ध्या
G
|
न
G
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ग्रा
G
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ह्य
L
|
व
L
|
पुः
G
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Verse 15
<lg n="15"> <l>बिभ्रद्भाति जगत्साम्राज्यं गगने ।</l> <l>हैमोऽसौ पुरुषः सिद्धानां भुवने ॥ १५ ॥</l> </lg>
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बि
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भ्र
G
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द्भा
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ति
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ज
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ग
G
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त्सा
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म्रा
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पु
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षः
G
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सि
G
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द्धा
G
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नां
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भु
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व
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ने
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Verse 16
<lg n="16"> <l>इन्द्रो वेदविदां भाषायां सपरः ।</l> <l>नाथस्तन्त्रविदां व्याहारेषु हरः ॥ १६ ॥</l> </lg>
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इ
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न्द्रो
G
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वे
G
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द
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वि
L
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दां
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भा
G
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षा
G
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यां
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स
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प
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रः
G
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ना
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व्या
G
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हा
G
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रे
G
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षु
L
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ह
L
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रः
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Verse 17
<lg n="17"> <l>प्रत्युष्णांशुतया तन्वा बिम्बितया ।</l> <l>प्रत्यण्डं प्रभुतां धत्ते सोऽद्भुतया ॥ १७ ॥</l> </lg>
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प्र
G
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त्यु
G
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ष्णां
G
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शु
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त
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या
G
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त
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न्वा
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बि
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म्बि
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त
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या
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प्र
G
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त्य
G
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ण्डं
G
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प्र
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भु
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तां
G
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ध
G
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त्ते
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सो
G
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द्भु
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त
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या
G
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Verse 18
<lg n="18"> <l>अभ्रे राजति यो बिभ्राणो भुवनम् ।</l> <l>शुभ्रागे च विभुः सभ्राजिष्णुयशाः ॥ १८ ॥</l> </lg>
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अ
G
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भ्रे
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रा
G
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ज
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ति
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यो
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भु
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व
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नम्
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शु
G
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भ्रा
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गे
G
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च
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वि
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भुः
G
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स
G
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भ्रा
G
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जि
G
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ष्णु
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य
L
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शाः
G
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Verse 19
<lg n="19"> <l>गौरोऽयं गगने शुक्लः शुभ्रनगे ।</l> <l>एकेयं तु भिदा मायारूपकृता ॥ १९ ॥</l> </lg>
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गौ
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रो
G
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यं
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ग
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ग
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ने
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शु
G
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क्लः
G
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शु
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भ्र
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न
L
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गे
G
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ए
G
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के
G
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यं
G
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तु
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भि
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दा
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मा
G
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या
G
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रू
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प
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कृ
L
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ता
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Verse 20
<lg n="20"> <l>रुद्रः शुक्लगिरावग्निर्वा स पुमान् ।</l> <l>ईशो व्योम्नि लसन्निन्द्रो वा सुमहान् ॥ २० ॥</l> </lg>
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रु
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द्रः
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शु
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क्ल
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गि
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रा
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व
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ग्नि
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शो
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म्नि
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ल
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स
G
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न्नि
G
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न्द्रो
G
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वा
G
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सु
L
|
म
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हान्
G
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Verse 21
<lg n="21"> <l>हैमं भूतपते शुक्लं वा शिव ते ।</l> <l>रूपं यः स्मरति प्राज्ञोऽयं जयति ॥ २१ ॥</l> </lg>
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है
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मं
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शु
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क्लं
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वा
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शि
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व
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ते
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रू
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पं
G
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यः
G
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स्म
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र
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ति
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प्रा
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ज्ञो
G
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यं
G
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ज
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य
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ति
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Verse 22
<lg n="22"> <l>अभ्रे ये मरुतः शुभ्रे भूभृति ते ।</l> <l>क्लेशानां दमना ईशान प्रमथाः ॥ २२ ॥</l> </lg>
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अ
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भ्रे
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ये
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म
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रु
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तः
G
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शु
G
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भ्रे
G
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भू
G
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भृ
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ति
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ते
G
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क्ले
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शा
G
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नां
G
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द
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म
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ना
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G
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शा
G
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न
G
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प्र
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म
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थाः
G
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Verse 23
<lg n="23"> <l>दासोऽहं मरुतः पातारो जगतः ।</l> <l>भूता वा भवतां स्तोता पापहृताम् ॥ २३ ॥</l> </lg>
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दा
G
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सो
G
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हं
G
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म
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रु
L
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तः
G
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पा
G
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G
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L
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G
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भू
G
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ता
G
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G
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भ
L
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व
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तां
G
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स्तो
G
|
ता
G
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पा
G
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प
L
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हृ
L
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ताम्
G
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Verse 24
<lg n="24"> <l>पायान्मामभितस्तिष्ठन्तं तपसि ।</l> <l>बिभ्राणः स शिवः कारुण्यं मनसि ॥ २४ ॥</l> </lg>
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पा
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या
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न्मा
G
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म
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भि
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त
G
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स्ति
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ष्ठ
G
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न्तं
G
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त
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भ्रा
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णः
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शि
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वः
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का
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रु
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ण्यं
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म
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न
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सि
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Verse 25
<lg n="25"> <l>गातारं गणपं गायत्रैर्मुकुलैः ।</l> <l>ईशो यो जयतात्सर्वैश्चापि बलैः ॥ २५ ॥</l> </lg>
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गा
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ता
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रं
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ग
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ण
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पं
G
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गा
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य
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त्रै
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कु
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लैः
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ई
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शो
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यो
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ज
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य
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ता
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त्स
G
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र्वै
G
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श्चा
G
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ब
L
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लैः
G
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