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Updated 2026-02-22 23:41

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Unexpected character '(' in text <अच्युत भगवान् की तरह तीनों लोकों में पूज्य सदाचार विजयी हो। अच्युत भगवान् की भाँति सदाचार भी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करता है। भगवान् और सदाचार दोनों श्री-सम्पन्न होकर सौभाग्यशाली हैं। अच्युत भगवान् सत्या (सत्यभामा) में अनुरक्त हैं तो सदाचार सत्य में आसक्त है ॥ १ ॥>
<p n="1">अच्युत भगवान् की तरह तीनों लोकों में पूज्य सदाचार विजयी हो। अच्युत भगवान् की भाँति सदाचार भी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करता है। भगवान् और सदाचार दोनों श्री-सम्पन्न होकर सौभाग्यशाली हैं। अच्युत भगवान् सत्या (सत्यभामा) में अनुरक्त हैं तो सदाचार सत्य में आसक्त है ॥ १ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <मनुष्य को ब्राह्ममुहूर्त में आलस्य छोड़कर जाग जाना चाहिए । गुणों का आश्रय लेनेवाली श्री (शोभा) प्रातःकाल खिले हुए (जागे हुए) कमल पर जा विराजती है ॥ २ ॥>
<p n="2">मनुष्य को ब्राह्ममुहूर्त में आलस्य छोड़कर जाग जाना चाहिए । गुणों का आश्रय लेनेवाली श्री (शोभा) प्रातःकाल खिले हुए (जागे हुए) कमल पर जा विराजती है ॥ २ ॥</p>
Unexpected character '<' in text <अच्छी तरह पैर धोकर ही जप, होम और देवताओं का पूजन करना चाहिए । पैरों को अपवित्र रखने के कारण ही राजा नल के शरीर में <error>कलियुग</error><fix>कलिपुरुष</fix> ने प्रवेश किया ॥ ८ ॥>
<p n="8">अच्छी तरह पैर धोकर ही जप, होम और देवताओं का पूजन करना चाहिए । पैरों को अपवित्र रखने के कारण ही राजा नल के शरीर में &lt;error&gt;कलियुग&lt;/error&gt;&lt;fix&gt;कलिपुरुष&lt;/fix&gt; ने प्रवेश किया ॥ ८ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <मनुष्य को चाहिए कि परायी स्त्री पर अनुराग और स्त्रियों पर विश्वास न करे। राम-पत्नी सीता की कामना रखने से ही रावण का वध हुआ तथा पत्नी (पर विश्वास करने) के कारण ही विदूरथ मारा गया ॥ १० ॥>
<p n="10">मनुष्य को चाहिए कि परायी स्त्री पर अनुराग और स्त्रियों पर विश्वास न करे। राम-पत्नी सीता की कामना रखने से ही रावण का वध हुआ तथा पत्नी (पर विश्वास करने) के कारण ही विदूरथ मारा गया ॥ १० ॥</p>
Unexpected character '(' in text <करे । प्रमत्त होने के कारण ही वृष्णिवंश के लोग (एक दूसरे पर) तृण का प्रहार कर-कर के मर गए ॥ ११ ॥>
<pb n="5"/>करे । प्रमत्त होने के कारण ही वृष्णिवंश के लोग (एक दूसरे पर) तृण का प्रहार कर-कर के मर गए ॥ ११ ॥
Unexpected character '(' in text <सत्त्वगुण से पूर्ण व्यक्ति को चाहिए कि वह त्याग (दान) के बदले कुछ पाने की इच्छा न करे । कर्ण ने इन्द्र को अपने कुण्डलों का दान दिया परन्तु उसने शक्ति की याचना की इसलिए कर्ण में मलिनता आ गयी ॥ १९ ॥>
<p n="19">सत्त्वगुण से पूर्ण व्यक्ति को चाहिए कि वह त्याग (दान) के बदले कुछ पाने की इच्छा न करे । कर्ण ने इन्द्र को अपने कुण्डलों का दान दिया परन्तु उसने शक्ति की याचना की इसलिए कर्ण में मलिनता आ गयी ॥ १९ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <ब्राह्मणों का कभी अपमान न करना चाहिए, क्योंकि (अपमानित) ब्राह्मणों का शाप ही असह्य दुःखकारक होता है। ब्राह्मण के शाप से ही राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने काट लिया और वह ब्राह्मण की शापाग्नि में भस्म हो गया ॥ २० ॥>
<p n="20">ब्राह्मणों का कभी अपमान न करना चाहिए, क्योंकि (अपमानित) ब्राह्मणों का शाप ही असह्य दुःखकारक होता है। ब्राह्मण के शाप से ही राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने काट लिया और वह ब्राह्मण की शापाग्नि में भस्म हो गया ॥ २० ॥</p>
Unexpected character '(' in text <दूसरों की प्राण-रक्षा के लिए तत्पर तथा दयावान् अवश्य होना चाहिए । शिबि ने कपोत (कबूतर) की रक्षा के लिए श्येन पक्षी (बाज) को अपना शरीर ही दे डाला ॥ २३ ॥>
<p n="23">दूसरों की प्राण-रक्षा के लिए तत्पर तथा दयावान् अवश्य होना चाहिए । शिबि ने कपोत (कबूतर) की रक्षा के लिए श्येन पक्षी (बाज) को अपना शरीर ही दे डाला ॥ २३ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <कठोर तपस्या में लीन व्यक्तियों की भी इन्द्रियों पर विश्वास न करना चाहिए। (महातपस्वी होते हुए भी) विश्वामित्र ने उत्सुक हो कर मेनका अप्सरा को गले लगा लिया था ॥ ३६ ॥>
<p n="36">कठोर तपस्या में लीन व्यक्तियों की भी इन्द्रियों पर विश्वास न करना चाहिए। (महातपस्वी होते हुए भी) विश्वामित्र ने उत्सुक हो कर मेनका अप्सरा को गले लगा लिया था ॥ ३६ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <स्वामी की सेवा में लीन निर्दोष भक्त (सेवक) का बहिष्कार न करना चाहिये। सती (निर्दोष) सीता को छोड़कर राम बहुत शोकातुर हुये थे ॥ ४४ ॥>
<p n="44">स्वामी की सेवा में लीन निर्दोष भक्त (सेवक) का बहिष्कार न करना चाहिये। सती (निर्दोष) सीता को छोड़कर राम बहुत शोकातुर हुये थे ॥ ४४ ॥</p>
Unexpected character '<' in text <मनुष्य को मृत्यु के बाद पुनः स्मरण की जाने पर यश रूपी शरीर को जीवित रखने वाली प्रसिद्धि की रक्षा करनी चाहिए। राजा इन्द्रद्युम्न मरने के बाद स्वर्ग गया। पुण्य क्षीण हो जाने के बाद जब वह फिर मृत्युलोक में आया तो एक दीर्घजीवी <error>कछुये</error><fix>कछुवे</fix> ने उसके यश का पुनः विस्तार किया, जिससे वह फिर स्वर्ग का हिस्सेदार बना ॥ ४५ ॥>
<p n="45">मनुष्य को मृत्यु के बाद पुनः स्मरण की जाने पर यश रूपी शरीर को जीवित रखने वाली प्रसिद्धि की रक्षा करनी चाहिए। राजा इन्द्रद्युम्न मरने के बाद स्वर्ग गया। पुण्य क्षीण हो जाने के बाद जब वह फिर मृत्युलोक में आया तो एक दीर्घजीवी &lt;error&gt;कछुये&lt;/error&gt;&lt;fix&gt;कछुवे&lt;/fix&gt; ने उसके यश का पुनः विस्तार किया, जिससे वह फिर स्वर्ग का हिस्सेदार बना ॥ ४५ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <सतियों की तपस्या से प्रज्वलित क्रोधाग्नि को कुपित न करना चाहिए । रावण के वध के लिए वेदवती ने अपना शरीर छोड़ (कर सीता के रूप में जन्म लिया और अन्त में उसे समूल नष्ट कर) दिया ॥>
<p n="66">सतियों की तपस्या से प्रज्वलित क्रोधाग्नि को कुपित न करना चाहिए । रावण के वध के लिए वेदवती ने अपना शरीर छोड़ (कर सीता के रूप में जन्म लिया और अन्त में उसे समूल नष्ट कर) दिया ॥</p>
Unexpected character '<' in text <धर्म, अर्थ और काम की साधना इतनी मात्रा में करनी चाहिए कि वे एक दूसरे के बाधक न बन <error>जायँ</error><fix>जाय</fix> । सगर आदि प्राचीन>
<p n="69">धर्म, अर्थ और काम की साधना इतनी मात्रा में करनी चाहिए कि वे एक दूसरे के बाधक न बन &lt;error&gt;जायँ&lt;/error&gt;&lt;fix&gt;जाय&lt;/fix&gt; । सगर आदि प्राचीन<pb n="18"/>महापुरुष, राजा महाराजा इसी त्रिवर्ग की उचित नियमित साधना करने वाले थे ॥ ६६ ॥</p>
Unexpected character '<' in text <प्रतिलोम विवाह से उन्नति की आशा न रखनी चाहिए। ययाति ने शुक्र की कन्या से विवाह करने से ही म्लेच्छता प्राप्त की ॥ <fix>८६ ॥</fix>>
<p n="86">प्रतिलोम विवाह से उन्नति की आशा न रखनी चाहिए। ययाति ने शुक्र की कन्या से विवाह करने से ही म्लेच्छता प्राप्त की ॥ &lt;fix&gt;८६ ॥&lt;/fix&gt;</p>
Unexpected character '<' in text <मनुष्य को क्रमशः ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास इन चार आश्रमों में जाना चाहिए । ययाति आदि प्राचीन राजाओं ने इसी क्रम से एक आश्रम के बाद दूसरे आश्रम में प्रवेश <error>किया था</error><fix>किये थे</fix> ॥ ९२ ॥>
<p n="92">मनुष्य को क्रमशः ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास इन चार आश्रमों में जाना चाहिए । ययाति आदि प्राचीन राजाओं ने इसी क्रम से एक आश्रम के बाद दूसरे आश्रम में प्रवेश &lt;error&gt;किया था&lt;/error&gt;&lt;fix&gt;किये थे&lt;/fix&gt; ॥ ९२ ॥</p>
Unexpected character '(' in text <वृद्धावस्था आ जाने पर मोक्ष प्राप्त करने का उपाय करना चाहिए जिससे दुबारा न वृद्ध होना पड़े, न पैदा होना पड़े । विदुर ने पुनर्जन्म का बीज (शुभाशुभ कर्म) ज्ञानरूपी अग्नि में भस्म कर डाला था ॥ ९६ ॥>
<p n="96">वृद्धावस्था आ जाने पर मोक्ष प्राप्त करने का उपाय करना चाहिए जिससे दुबारा न वृद्ध होना पड़े, न पैदा होना पड़े । विदुर ने पुनर्जन्म का बीज (शुभाशुभ कर्म) ज्ञानरूपी अग्नि में भस्म कर डाला था ॥ ९६ ॥</p>
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