Reports » अन्योक्तिमुक्तालता
Updated 2026-02-22 23:41
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Text
Devanagari text is well-formed ⚠ Partial (517/540)
Unexpected character ':' in text <र्नीलाम्भोजकुलैस्तथा विचकिलै: क्रान्तं च कान्तं च यत्।>
<l>र्नीलाम्भोजकुलैस्तथा विचकिलै: क्रान्तं च कान्तं च यत्।</l>
Unexpected character ':' in text <क्रौञ्च: किं च मदादुदञ्चति सरस्तन्मुञ्च कोऽयं ग्रहः।>
<l>क्रौञ्च: किं च मदादुदञ्चति सरस्तन्मुञ्च कोऽयं ग्रहः।</l>
Unexpected character ':' in text <हे नीप स्मरदीप दीपय तनौ टङ्कं नवैरङ्कुरै:।>
<l>हे नीप स्मरदीप दीपय तनौ टङ्कं नवैरङ्कुरै:।</l>
Unexpected character ':' in text <रूपं लक्ष्मीनगर तगर श्लाघ्यमुन्मीलयेथा:।>
<l>रूपं लक्ष्मीनगर तगर श्लाघ्यमुन्मीलयेथा:।</l>
Unexpected character ':' in text <कुन्दे दलितादरः सरसिजे संजातकौतूहल:>
<l>कुन्दे दलितादरः सरसिजे संजातकौतूहल:</l>
Unexpected character ':' in text <र्भङ्ग: किं नु तथा रथाङ्गमिथुनैः प्रत्यङ्गमङ्गीकृतः॥२४॥>
<l>र्भङ्ग: किं नु तथा रथाङ्गमिथुनैः प्रत्यङ्गमङ्गीकृतः॥२४॥</l>
Unexpected character ':' in text <वन्द्योऽयं विभुरम्भसां समभवद्गन्तं कौस्तुभ:।>
<l>वन्द्योऽयं विभुरम्भसां समभवद्गन्तं कौस्तुभ:।</l>
Unexpected character ':' in text <स्त्वं कन्दलेषु च दलेषु च सावहेल:।>
<l>स्त्वं कन्दलेषु च दलेषु च सावहेल:।</l>
Unexpected character ':' in text <एता: केरलसुन्दरीरदरुचः सन्त्येव मुक्तालता>
<l>एता: केरलसुन्दरीरदरुचः सन्त्येव मुक्तालता</l>
Unexpected character ':' in text <लीलालिङ्गनयोग्यमुग्रगरलग्राम: फणिग्रामणीः॥३५॥>
<l>लीलालिङ्गनयोग्यमुग्रगरलग्राम: फणिग्रामणीः॥३५॥</l>
Unexpected character ':' in text <कॢप्तो बालैर्बहुलमुकुलै: केलिकर्णावतंसः।>
<l>कॢप्तो बालैर्बहुलमुकुलै: केलिकर्णावतंसः।</l>
Unexpected character ':' in text <र्नि:स्यन्दै: सह वालवालवलये युक्तो निषेकक्रमः।>
<l>र्नि:स्यन्दै: सह वालवालवलये युक्तो निषेकक्रमः।</l>
Unexpected character ':' in text <म्लानिं मुञ्च मयूर दूरय भयं दर्पाञ्चित: पञ्चतां>
<l>म्लानिं मुञ्च मयूर दूरय भयं दर्पाञ्चित: पञ्चतां</l>
Unexpected character ':' in text <धत्ते धैर्यधुरां जगत्र्त्रयजयस्मेर: स येन स्मरः।>
<l>धत्ते धैर्यधुरां जगत्र्त्रयजयस्मेर: स येन स्मरः।</l>
Unexpected character ':' in text <रस्फोटि स्फटिकामल: करटिनां यस्मिन्नवाप्तोदये।>
<l>रस्फोटि स्फटिकामल: करटिनां यस्मिन्नवाप्तोदये।</l>
Unexpected character ':' in text <एतैर्जातै: किमिह बहुभिर्भोगिभि: किं तु मन्ये>
<l>एतैर्जातै: किमिह बहुभिर्भोगिभि: किं तु मन्ये</l>
Unexpected character ':' in text <क्रीडाताण्डवडम्बरः शिखिकुलै: केकारवव्याकुलैः।>
<l>क्रीडाताण्डवडम्बरः शिखिकुलै: केकारवव्याकुलैः।</l>
Unexpected character ':' in text <छाया सैव स एव सौरभभरस्ता एव पुष्पश्रिय:॥७९॥>
<l>छाया सैव स एव सौरभभरस्ता एव पुष्पश्रिय:॥७९॥</l>
Unexpected character ':' in text <हेलैव प्लवगप्रभोः कृतजगत्पारिप्लवो विप्लव:॥८०॥>
<l>हेलैव प्लवगप्रभोः कृतजगत्पारिप्लवो विप्लव:॥८०॥</l>
Unexpected character ':' in text <प्रारब्धोऽयमतानवैरभिनवैर्वा रिप्लवैर्विप्लव:॥९८॥>
<l>प्रारब्धोऽयमतानवैरभिनवैर्वा रिप्लवैर्विप्लव:॥९८॥</l>
Unexpected character ':' in text <मार्ग: पान्थ पतत्पतंगकिरणाङ्गारोऽयमङ्गीकृतः॥१०२॥>
<l>मार्ग: पान्थ पतत्पतंगकिरणाङ्गारोऽयमङ्गीकृतः॥१०२॥</l>
Unexpected character ':' in text <साश्चर्या : सरसाश्च सन्ति सरितः पाथः पतिप्रेयसि>
<l>साश्चर्या : सरसाश्च सन्ति सरितः पाथः पतिप्रेयसि</l>
Unexpected character ':' in text <क्व न भ्रमरयोषितां गलदहंकृतिर्हुकृति:॥१०६॥>
<l>क्व न भ्रमरयोषितां गलदहंकृतिर्हुकृति:॥१०६॥</l>
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Meter
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Verse 1
<lg n="1"> <l>मानं मुञ्च विपञ्चि पञ्चमरवन्यक्कारपारंगमा</l> <l>मा भूवन्कलकण्ठकण्ठकुहरे कुण्ठक्रमास्ते गिरः।</l> <l>प्राप्तः पञ्चशरप्रपञ्चशरणं यद्भृङ्गभङ्ङ्गीगुरु-</l> <l>र्बन्धूकप्रियबान्धवो धवलितश्यामाधवो माधवः॥१॥</l> </lg>
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Verse 6
<lg n="6"> <l>यस्मिन्नङ्कुरितं कुरङ्गकदृशां प्रेम्णा किमन्यद्ध्रुवं</l> <l>यत्रास्ते मदनस्य लुप्तरमणीमग्नक्रमो विक्रमः।</l> <l>पक्वं नागरखण्डपल्लवमिदं जाल्मैः फलश्रीदल-</l> <l>भ्रान्त्या हन्त न वीक्षितं न कलितं नास्वादितं नादृतम्॥६॥</l> </lg>
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Verse 7
<lg n="7"> <l>केनात्र कर्कशकरीरवनान्तराले</l> <l>बाले बलाद्बकुलकन्दलि रोपितासि।</l> <l>यत्राप्नुयुर्मधुलिहस्तव कोमलानि</l> <l>नो कुड्भलानि न दलानि न कन्दलानि॥७॥</l> </lg>
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Verse 9
<lg n="9"> <l>मद्गुमाद्यति यत्र यत्र भजते भङ्गिं बको यत्र स</l> <l>क्रौञ्च: किं च मदादुदञ्चति सरस्तन्मुञ्च कोऽयं ग्रहः।</l> <l>आस्ते बालमरालसालसलसद्दिक्कुञ्जरं पार्वती-</l> <l>कर्णोत्तंसितकाञ्चनाब्जलमुकुलं यन्मानसं ते सरः॥९॥</l> </lg>
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Verse 13
<lg n="13"> <l>कांतिं केतककोरकद्युतिसखीं राकामृगाङ्कस्य य-</l> <l>च्चञ्चचञ्चु चुलुम्पति प्रतिदिनं प्रेम्णा चकोरार्भकः।</l> <l>तन्मन्ये नयनामृतं रतिपतेर्मृत्युंजयेनार्थिना</l> <l>तेनेदं रमणीकपोलफलके लावण्यमालोकितम्॥१३॥</l> </lg>
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Verse 21
<lg n="21"> <l>आश्चर्यैकनिधिः स दुग्धजलधिर्मन्ये किमन्यद्यतो</l> <l>लेभे जन्म स लोकलोचनसुधासारस्तुषारद्युतिः।</l> <l>देवीकेलिकचग्रहेण ललिते गङ्गातरङ्गाङ्किते</l> <l>शङ्कं निरटङ्कि शंकरजटाजूटेऽपि येन स्थितिः॥२१॥</l> </lg>
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ये
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Verse 22
<lg n="22"> <l>कुन्दे दलितादरः सरसिजे संजातकौतूहल:</l> <l>कल्हार कलितस्पृहः किमपरं यः केतके कौतुकी।</l> <l>निर्माता किममर्त्यराजतरुणी लीलावतंसश्रियो</l> <l>योग्यस्तस्य मधुव्रतस्य ललिताकल्पः स कल्पद्रुमः॥२२॥</l> </lg>
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ल्पः
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स
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क
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ल्प
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द्रु
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Verse 23
<lg n="23"> <l>शुभ्रो वा मलिनोऽस्तु वा मृगमदः किं तावता तादृशः</l> <l>कोऽप्यस्यानवधिश्चमत्कृतिनिधिः सौगन्ध्यमेको गुणः।</l> <l>येनैव स्मरविभ्रमैकवसतिर्भाले कपोलस्थले</l> <l>दोर्मूले कुचमण्डले च कुरुते रङ्गं कुङ्गीदृशाम्॥२३॥</l> </lg>
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स्तु
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ति
L
|
नि
L
|
धिः
G
|
सौ
G
|
ग
G
|
न्ध्य
L
|
मे
G
|
को
G
|
गु
L
|
णः
G
|
|
ये
G
|
नै
G
|
व
G
|
स्म
L
|
र
L
|
वि
G
|
भ्र
L
|
मै
G
|
क
L
|
व
L
|
स
L
|
ति
G
|
र्भा
G
|
ले
G
|
क
L
|
पो
G
|
ल
G
|
स्थ
L
|
ले
G
|
|
दो
G
|
र्मू
G
|
ले
G
|
कु
L
|
च
L
|
म
G
|
ण्ड
L
|
ले
G
|
च
L
|
कु
L
|
रु
L
|
ते
G
|
र
G
|
ङ्गं
G
|
कु
G
|
ङ्गी
G
|
दृ
L
|
शाम्
G
|
Verse 24
<lg n="24"> <l>शान्तध्वान्तकलङ्क शंकरशिरोरत्न त्वमेणाङ्क चे-</l> <l>त्कंदर्पाङ्कुरकन्द कुन्दकलिकाकारैः करैरुद्गतः।</l> <l>तत्किं मीलितमम्बुजैर्विदलितं किं दन्तिदन्ताङ्कुरै-</l> <l>र्भङ्ग: किं नु तथा रथाङ्गमिथुनैः प्रत्यङ्गमङ्गीकृतः॥२४॥</l> </lg>
|
शा
G
|
न्त
G
|
ध्वा
G
|
न्त
L
|
क
L
|
ल
G
|
ङ्क
L
|
शं
G
|
क
L
|
र
L
|
शि
L
|
रो
G
|
र
G
|
त्न
G
|
त्व
L
|
मे
G
|
णा
G
|
ङ्क
L
|
चे
G
|
|
त्कं
G
|
द
G
|
र्पा
G
|
ङ्कु
L
|
र
L
|
क
G
|
न्द
L
|
कु
G
|
न्द
L
|
क
L
|
लि
L
|
का
G
|
का
G
|
रैः
G
|
क
L
|
रै
G
|
रु
G
|
द्ग
L
|
तः
G
|
|
त
G
|
त्किं
G
|
मी
G
|
लि
L
|
त
L
|
म
G
|
म्बु
L
|
जै
G
|
र्वि
L
|
द
L
|
लि
L
|
तं
G
|
किं
G
|
द
G
|
न्ति
L
|
द
G
|
न्ता
G
|
ङ्कु
L
|
रै
G
|
|
र्भ
G
|
ङ्ग
L
|
किं
G
|
नु
L
|
त
L
|
था
G
|
र
L
|
था
G
|
ङ्ग
L
|
मि
L
|
थु
L
|
नैः
G
|
प्र
G
|
त्य
G
|
ङ्ग
L
|
म
G
|
ङ्गी
G
|
कृ
L
|
तः
G
|
Verse 26
<lg n="26"> <l>येनाप्तः कमलाविलासकमले किंजल्कपानोत्सवो</l> <l>यो लीलां वितनोति नाभिनलिनोत्सङ्गे तथा शार्ङ्गिणः।</l> <l>तस्य स्यात्कुसुमान्तरे मधुलिहः कुत्राप्यहो न स्थिति-</l> <l>र्न प्रीतिर्न रतिर्न केलिसमयो नो विस्मयो न स्मयः॥२६॥</l> </lg>
|
ये
G
|
ना
G
|
प्तः
G
|
क
L
|
म
L
|
ला
G
|
वि
L
|
ला
G
|
स
L
|
क
L
|
म
L
|
ले
G
|
किं
G
|
ज
G
|
ल्क
L
|
पा
G
|
नो
G
|
त्स
L
|
वो
G
|
|
यो
G
|
ली
G
|
लां
G
|
वि
L
|
त
L
|
नो
G
|
ति
L
|
ना
G
|
भि
L
|
न
L
|
लि
L
|
नो
G
|
त्स
G
|
ङ्गे
G
|
त
L
|
था
G
|
शा
G
|
र्ङ्गि
L
|
णः
G
|
|
त
G
|
स्य
G
|
स्या
G
|
त्कु
L
|
सु
L
|
मा
G
|
न्त
L
|
रे
G
|
म
L
|
धु
L
|
लि
L
|
हः
G
|
कु
G
|
त्रा
G
|
प्य
L
|
हो
G
|
न
G
|
स्थि
L
|
ति
L
|
|
र्न
G
|
प्री
G
|
ति
G
|
र्न
L
|
र
L
|
ति
G
|
र्न
L
|
के
G
|
लि
L
|
स
L
|
म
L
|
यो
G
|
नो
G
|
वि
G
|
स्म
L
|
यो
G
|
न
G
|
स्म
L
|
यः
G
|
Verse 27
<lg n="27"> <l>अप्येतानि चुलुम्पितानि चुलकन्यायेन येन क्षणा-</l> <l>त्पारावारपयांसि येन विदधे विन्ध्योऽपि वन्ध्याकृतिः।</l> <l>सोऽपि क्वाऽपि भवत्तटे निवसति त्रैलोक्यमान्यो मुनि-</l> <l>स्तन्मन्ये तव नास्ति रोहण परः स्पर्धापरः क्ष्माधरः॥२७॥</l> </lg>
|
अ
G
|
प्ये
G
|
ता
G
|
नि
L
|
चु
L
|
लु
G
|
म्पि
L
|
ता
G
|
नि
L
|
चु
L
|
ल
L
|
क
G
|
न्या
G
|
ये
G
|
न
L
|
ये
G
|
न
G
|
क्ष
L
|
णा
G
|
|
त्पा
G
|
रा
G
|
वा
G
|
र
L
|
प
L
|
यां
G
|
सि
L
|
ये
G
|
न
L
|
वि
L
|
द
L
|
धे
G
|
वि
G
|
न्ध्यो
G
|
पि
L
|
व
G
|
न्ध्या
G
|
कृ
L
|
तिः
G
|
|
सो
G
|
पि
G
|
क्वा
G
|
पि
L
|
भ
L
|
व
G
|
त्त
L
|
टे
G
|
नि
L
|
व
L
|
स
L
|
ति
G
|
त्रै
G
|
लो
G
|
क्य
L
|
मा
G
|
न्यो
G
|
मु
L
|
नि
L
|
|
स्त
G
|
न्म
G
|
न्ये
G
|
त
L
|
व
L
|
ना
G
|
स्ति
L
|
रो
G
|
ह
L
|
ण
L
|
प
L
|
रः
G
|
स्प
G
|
र्धा
G
|
प
L
|
रः
G
|
क्ष्मा
G
|
ध
L
|
रः
G
|
Verse 28
<lg n="28"> <l>रोहत्सौरभविभ्रमाणि कमलासद्मानि पद्माकरे</l> <l>पद्मान्यत्र कियन्ति सन्ति नु नतिः का तेषु नुतिः।</l> <l>तत्साक्षादरविन्दमद्भुतलताकन्दं तु वन्देमहि</l> <l>त्रैलोक्यप्रभवः पुरा समभवद्यस्मात्पुराणः कविः॥२८॥</l> </lg>
|
रो
G
|
ह
G
|
त्सौ
G
|
र
L
|
भ
L
|
वि
G
|
भ्र
L
|
मा
G
|
णि
L
|
क
L
|
म
L
|
ला
G
|
स
G
|
द्मा
G
|
नि
L
|
प
G
|
द्मा
G
|
क
L
|
रे
G
|
|
प
G
|
द्मा
G
|
न्य
G
|
त्र
L
|
कि
L
|
य
G
|
न्ति
L
|
स
G
|
न्ति
L
|
नु
L
|
न
L
|
तिः
G
|
का
G
|
ते
G
|
षु
L
|
नु
L
|
तिः
G
|
||
|
त
G
|
त्सा
G
|
क्षा
G
|
द
L
|
र
L
|
वि
G
|
न्द
L
|
म
G
|
द्भु
L
|
त
L
|
ल
L
|
ता
G
|
क
G
|
न्दं
G
|
तु
L
|
व
G
|
न्दे
G
|
म
L
|
हि
G
|
|
त्रै
G
|
लो
G
|
क्य
G
|
प्र
L
|
भ
L
|
वः
G
|
पु
L
|
रा
G
|
स
L
|
म
L
|
भ
L
|
व
G
|
द्य
G
|
स्मा
G
|
त्पु
L
|
रा
G
|
णः
G
|
क
L
|
विः
G
|
Verse 29
<lg n="29"> <l>किं ताभिर्वितताभिरद्भुतकथाकन्थाभिरेतावता</l> <l>वन्द्योऽयं विभुरम्भसां समभवद्गन्तं कौस्तुभ:।</l> <l>चक्रे लग्नरमाघनस्तनतटीकर्पूरपत्राङ्कुरे</l> <l>यः श्रीवत्समनोहरे हृदि धृतिं देवस्य दैत्यद्रुहः॥२९॥</l> </lg>
|
किं
G
|
ता
G
|
भि
G
|
र्वि
L
|
त
L
|
ता
G
|
भि
L
|
र
G
|
द्भु
L
|
त
L
|
क
L
|
था
G
|
क
G
|
न्था
G
|
भि
L
|
रे
G
|
ता
G
|
व
L
|
ता
G
|
|
व
G
|
न्द्यो
G
|
यं
G
|
वि
L
|
भु
L
|
र
G
|
म्भ
L
|
सां
G
|
स
L
|
म
L
|
भ
L
|
व
G
|
द्ग
G
|
न्तं
G
|
कौ
G
|
स्तु
L
|
भ
L
|
||
|
च
G
|
क्रे
G
|
ल
G
|
ग्न
L
|
र
L
|
मा
G
|
घ
L
|
न
G
|
स्त
L
|
न
L
|
त
L
|
टी
G
|
क
G
|
र्पू
G
|
र
L
|
प
G
|
त्रा
G
|
ङ्कु
L
|
रे
G
|
|
यः
G
|
श्री
G
|
व
G
|
त्स
L
|
म
L
|
नो
G
|
ह
L
|
रे
G
|
हृ
L
|
दि
L
|
धृ
L
|
तिं
G
|
दे
G
|
व
G
|
स्य
L
|
दै
G
|
त्य
G
|
द्रु
L
|
हः
G
|
Verse 32
<lg n="32"> <l>पुष्पोत्करेषु च फलेषु च सावलेप-</l> <l>स्त्वं कन्दलेषु च दलेषु च सावहेल:।</l> <l>किं मुग्ध दग्धमकरोः सुरभेरगार-</l> <l>मङ्गारकार सहकारमकारणेन॥३२॥</l> </lg>
|
पु
G
|
ष्पो
G
|
त्क
L
|
रे
G
|
षु
L
|
च
L
|
फ
L
|
ले
G
|
षु
L
|
च
L
|
सा
G
|
व
L
|
ले
G
|
प
L
|
|
स्त्वं
G
|
क
G
|
न्द
L
|
ले
G
|
षु
L
|
च
L
|
द
L
|
ले
G
|
षु
L
|
च
L
|
सा
G
|
व
L
|
हे
G
|
ल
L
|
|
किं
G
|
मु
G
|
ग्ध
L
|
द
G
|
ग्ध
L
|
म
L
|
क
L
|
रोः
G
|
सु
L
|
र
L
|
भे
G
|
र
L
|
गा
G
|
र
L
|
|
म
G
|
ङ्गा
G
|
र
L
|
का
G
|
र
L
|
स
L
|
ह
L
|
का
G
|
र
L
|
म
L
|
का
G
|
र
L
|
णे
G
|
न
L
|
Verse 33
<lg n="33"> <l>याच्यस्ते खदिरः करीरविटपः सेव्योऽपि किं कुर्महे</l> <l>मार्गः संगत एष ते खरतरुर्यद्भैरवो मारवः।</l> <l>तनौत्मल्लीमुकुलं तदुत्पलकुलं सा यूथिकावीथिका</l> <l>तच्च लवङ्गमङ्ग भवतो हा भृङ्ग दूरं गतम्॥३३॥</l> </lg>
|
या
G
|
च्य
G
|
स्ते
G
|
ख
L
|
दि
L
|
रः
G
|
क
L
|
री
G
|
र
L
|
वि
L
|
ट
L
|
पः
G
|
से
G
|
व्यो
G
|
पि
L
|
किं
G
|
कु
G
|
र्म
L
|
हे
G
|
|
|
मा
G
|
र्गः
G
|
सं
G
|
ग
L
|
त
L
|
ए
G
|
ष
L
|
ते
G
|
ख
L
|
र
L
|
त
L
|
रु
G
|
र्य
G
|
द्भै
G
|
र
L
|
वो
G
|
मा
G
|
र
L
|
वः
G
|
|
|
त
L
|
नौ
G
|
त्म
G
|
ल्ली
G
|
मु
L
|
कु
L
|
लं
G
|
त
L
|
दु
G
|
त्प
L
|
ल
L
|
कु
L
|
लं
G
|
सा
G
|
यू
G
|
थि
L
|
का
G
|
वी
G
|
थि
L
|
का
G
|
|
त
G
|
च्च
L
|
ल
L
|
व
G
|
ङ्ग
L
|
म
G
|
ङ्ग
L
|
भ
L
|
व
L
|
तो
G
|
हा
G
|
भृ
G
|
ङ्ग
L
|
दू
G
|
रं
G
|
ग
L
|
तम्
L
|
Verse 34
<lg n="34"> <l>लीनः पाघरकंदरासु रचयनक्वापि स्थितिं भङ्गुरै-</l> <l>रङ्गैरङ्ग कुरङ्ग रङ्गसि कथंकारं विकाराकुलः।</l> <l>प्राप्तः पश्य विचेतुमुद्भटसटाटोपः सकोपः स्वयं</l> <l>गर्जत्कुञ्जरपुञ्जभञ्जनपटुः पञ्चाननः काननम्॥३४॥</l> </lg>
|
ली
G
|
नः
G
|
पा
G
|
घ
L
|
र
L
|
कं
G
|
द
L
|
रा
G
|
सु
L
|
र
L
|
च
L
|
य
L
|
न
G
|
क्वा
G
|
पि
G
|
स्थि
L
|
तिं
G
|
भ
G
|
ङ्गु
L
|
रै
G
|
|
र
G
|
ङ्गै
G
|
र
G
|
ङ्ग
L
|
कु
L
|
र
G
|
ङ्ग
L
|
र
G
|
ङ्ग
L
|
सि
L
|
क
L
|
थं
G
|
का
G
|
रं
G
|
वि
L
|
का
G
|
रा
G
|
कु
L
|
लः
G
|
|
|
प्रा
G
|
प्तः
G
|
प
G
|
श्य
L
|
वि
L
|
चे
G
|
तु
L
|
मु
G
|
द्भ
L
|
ट
L
|
स
L
|
टा
G
|
टो
G
|
पः
G
|
स
L
|
को
G
|
पः
G
|
स्व
L
|
यं
G
|
|
|
ग
G
|
र्ज
G
|
त्कु
G
|
ञ्ज
L
|
र
L
|
पु
G
|
ञ्ज
L
|
भ
G
|
ञ्ज
L
|
न
L
|
प
L
|
टुः
G
|
प
G
|
ञ्चा
G
|
न
L
|
नः
G
|
का
G
|
न
L
|
नम्
L
|
Verse 35
<lg n="35"> <l>एता: केरलसुन्दरीरदरुचः सन्त्येव मुक्तालता</l> <l>मल्लीमाल्यमयानि सौरभभरोद्दामानि दामानि च।</l> <l>किं नीतः शितिकण्ठ कण्ठनिकटं गौरीभुजाकन्दली-</l> <l>लीलालिङ्गनयोग्यमुग्रगरलग्राम: फणिग्रामणीः॥३५॥</l> </lg>
|
ए
G
|
ता
G
|
के
G
|
र
L
|
ल
L
|
सु
G
|
न्द
L
|
री
G
|
र
L
|
द
L
|
रु
L
|
चः
G
|
स
G
|
न्त्ये
G
|
व
L
|
मु
G
|
क्ता
G
|
ल
L
|
ता
G
|
|
म
G
|
ल्ली
G
|
मा
G
|
ल्य
L
|
म
L
|
या
G
|
नि
L
|
सौ
G
|
र
L
|
भ
L
|
भ
L
|
रो
G
|
द्दा
G
|
मा
G
|
नि
L
|
दा
G
|
मा
G
|
नि
L
|
च
L
|
|
किं
G
|
नी
G
|
तः
G
|
शि
L
|
ति
L
|
क
G
|
ण्ठ
L
|
क
G
|
ण्ठ
L
|
नि
L
|
क
L
|
टं
G
|
गौ
G
|
री
G
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भु
L
|
जा
G
|
क
G
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न्द
L
|
ली
G
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ली
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ला
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लि
G
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ङ्ग
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न
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यो
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ग्य
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मु
G
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ग्र
L
|
ग
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र
L
|
ल
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ग्रा
G
|
म
L
|
फ
L
|
णि
G
|
ग्रा
G
|
म
L
|
णीः
G
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Verse 37
<lg n="37"> <l>यत्केलिमन्थरमरालमरालबाल-</l> <l>शेवालकोमलमलं विमलं मृणालैः।</l> <l>तत्पश्य शुष्यति सरः प्रसरत्तुषार-</l> <l>रुद्धं विरुद्धविधिरेव विधिः किमन्यत्॥३७॥</l> </lg>
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य
G
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त्के
G
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म
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न्थ
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र
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म
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म
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रा
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बा
G
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ल
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शे
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वा
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ल
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को
G
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म
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म
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लं
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वि
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म
L
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लं
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मृ
L
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णा
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लैः
G
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त
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त्प
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श्य
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शु
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प्र
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स
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र
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त्तु
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र
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द्ध
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व
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वि
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धिः
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कि
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म
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न्यत्
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Verse 41
<lg n="41"> <l>यस्य भ्राम्यन्मकरनिकरक्लान्तमूर्तेरसार-</l> <l>स्तारक्षारव्यतिकरखरः सीकरोऽपि क्व पेयः।</l> <l>तत्ते पाथः पवनजनितोत्तालकल्लोलजालं</l> <l>ज्वालं ज्वालं ज्वलतु जलधे सर्वमौर्वानलेन॥४१॥</l> </lg>
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य
G
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स्य
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भ्रा
G
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म्य
G
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न्म
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क
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र
L
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नि
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क
L
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र
G
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क्ला
G
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न्त
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मू
G
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र्ते
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र
L
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सा
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र
L
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स्ता
G
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र
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क्षा
G
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र
G
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व्य
L
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ति
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क
L
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र
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रः
G
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सी
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क
L
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G
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पे
G
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G
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त्ता
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ल
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लं
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लं
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ज्वा
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लं
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ज्व
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तु
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ज
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ल
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स
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र्व
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मौ
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र्वा
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न
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ले
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न
L
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Verse 44
<lg n="44"> <l>केलिं कल्पय कोलबाल लवलीवल्लीदलान्याहर-</l> <l>नुल्लासैरभिगर्ज सैरिभ भज त्वं पङ्कतल्पोत्सवम्।</l> <l>म्लानिं मुञ्च मयूर दूरय भयं दर्पाञ्चित: पञ्चतां</l> <l>युष्मन्निर्मथनप्रपञ्चचतुरः प्राप्तः स पञ्चाननः॥४४॥</l> </lg>
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के
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यू
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दू
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L
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त
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ञ्च
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न
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प
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ञ्च
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तु
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प्तः
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प
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ञ्चा
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न
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नः
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Verse 47
<lg n="47"> <l>अक्षामं मणिदाम संवृणु ननु त्वं दर्शयेथा मुहु-</l> <l>र्मा मा मुग्धमनोहराः शशिकराकाराश्च हारस्रजः।</l> <l>एषा वैकटिक स्फुटैव पुरतः सा पामराणां पुरी</l> <l>यस्यां काचललन्तिकाङ्कितकुचोत्सङ्गाः कुरङ्गीदृशः॥४७॥</l> </lg>
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अ
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क्षा
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मं
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म
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L
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G
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ङ्गाः
G
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कु
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र
G
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ङ्गी
G
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दृ
L
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शः
G
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Verse 48
<lg n="48"> <l>यत्कर्णे च कुचान्तरे रचयितुं युक्तं कुरङ्गीदृशां</l> <l>धत्ते धैर्यधुरां जगत्र्त्रयजयस्मेर: स येन स्मरः।</l> <l>तन्मल्लीमुकुलं वनेऽत्र विजने केनापि नोत्तंसितं</l> <l>नाघ्रातं न निरूपितं न कलितं नोदञ्चितं नोम्भितम्॥४८॥</l> </lg>
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य
G
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त्क
G
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च
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कु
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G
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तं
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म्भि
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तम्
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Verse 51
<lg n="51"> <l>शोकात्कोककुलैरमीलि कमलैरम्लायि दन्ताङ्कुरै-</l> <l>रस्फोटि स्फटिकामल: करटिनां यस्मिन्नवाप्तोदये।</l> <l>तं दृष्ट्वैव कुरङ्गकेतनमहो मुग्धः स दुग्धाम्बुधिः</l> <l>किं मिथ्या नरिनर्ति चञ्चलवलत्कल्लोलदोः कन्दलः॥५१॥</l> </lg>
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शो
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का
G
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त्को
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क
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कु
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L
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ग्धा
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L
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च
G
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ञ्च
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ल
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व
L
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ल
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त्क
G
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ल्लो
G
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ल
L
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दोः
G
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क
G
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न्द
L
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लः
G
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Verse 54
<lg n="54"> <l>कंदर्पैककृपाणवल्लरि वने कमादकस्मादियं</l> <l>हे कालागुरुबालमञ्जरि हहा मोहादिह प्रारुहः।</l> <l>सह्यन्तामुपजातसौरभपरिष्वङ्गैस्तदङ्गैरिमाः</l> <l>कान्तैः कान्तपुरंध्रिकुन्तलभरच्छायैः कुठारच्छिदः॥५४॥</l> </lg>
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कं
G
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द
G
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G
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G
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रु
L
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बा
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ल
L
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म
G
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ञ्ज
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L
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ह
L
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हा
G
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मो
G
|
हा
G
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ह
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हः
G
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स
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ह्य
G
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मु
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प
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G
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त
L
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सौ
G
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र
L
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भ
L
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प
L
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रि
G
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ष्व
G
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ङ्गै
G
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स्त
L
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द
G
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ङ्गै
G
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रि
L
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माः
G
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का
G
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न्तैः
G
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का
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न्त
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पु
L
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G
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कु
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न्त
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भ
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च्छा
G
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यैः
G
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कु
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ठा
G
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र
G
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च्छि
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दः
G
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Verse 55
<lg n="55"> <l>लीलावासः कुसुमधनुषः कोऽपि यस्याधिवासः</l> <l>कुर्युर्यस्यास्तरुमुकुलकोसङ्गभङ्गं नताङ्ग्यः।</l> <l>सान्द्रे तस्मिन्नपि जडतया पङ्कशङ्कां वहन्तो</l> <l>हन्त खान्तं मृगमदरसे पामरा नार्पयन्ति॥५५॥</l> </lg>
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ली
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ला
G
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वा
G
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सः
G
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कु
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सु
L
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म
L
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ध
L
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नु
L
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षः
G
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को
G
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पि
L
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य
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स्या
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धि
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वा
G
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सः
G
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कु
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र्यु
G
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र्य
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स्या
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स्त
L
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रु
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मु
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कु
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को
G
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स
G
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ङ्ग
L
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भ
G
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ङ्गं
G
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न
L
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ता
G
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ङ्ग्यः
G
|
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सा
G
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न्द्रे
G
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त
G
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स्मि
G
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न्न
L
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L
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G
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G
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L
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ङ्कां
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व
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ह
G
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न्तो
G
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|
ह
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न्त
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खा
G
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न्तं
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मृ
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ग
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G
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G
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म
L
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G
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ना
G
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र्प
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य
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न्ति
L
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Verse 56
<lg n="56"> <l>ऊढापि द्युतरङ्गिणि त्रिजगतीवन्द्येन तेनाप्यहो</l> <l>मौलौ बालकुरङ्गकेतनकलालीलावतंसाङ्किते।</l> <l>तारक्षारकरं करालमकरं सश्वभ्रमभ्रकषं</l> <l>मुग्धे जाड्यनिधिं मुघा जलनिधिं यातासि चित्राः स्त्रियः॥५६॥</l> </lg>
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ऊ
G
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ढा
G
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पि
G
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द्यु
L
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त
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र
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ङ्गि
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त्रि
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L
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L
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क्षा
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क
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रं
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क
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रा
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ल
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म
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क
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रं
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स
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श्व
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भ्र
L
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म
G
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भ्र
L
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क
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षं
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मु
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ग्धे
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धिं
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नि
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धिं
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ता
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सि
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चि
G
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त्राः
G
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स्त्रि
L
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यः
G
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Verse 59
<lg n="59"> <l>एतैर्जातै: किमिह बहुभिर्भोगिभि: किं तु मन्ये</l> <l>मान्यः कोऽपि प्रभवति जगत्येकशेषः स शेषः ।</l> <l>यस्मिन्गौरी पृथुकुचत टीकुङ्कुमस्थासकाङ्के</l> <l>येन स्थाणोरुरसि रहितो हारवल्लीविलासः॥५९॥</l> </lg>
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ए
G
|
तै
G
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र्जा
G
|
तै
G
|
कि
L
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मि
L
|
ह
L
|
ब
L
|
हु
L
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भि
G
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र्भो
G
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गि
L
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भि
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किं
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तु
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म
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न्ये
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मा
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न्यः
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को
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ग
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त्ये
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शे
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षः
G
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स
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शे
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षः
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य
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स्मि
G
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न्गौ
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री
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पृ
L
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थु
L
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कु
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च
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टी
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कु
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ङ्कु
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म
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स्था
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स
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का
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ङ्के
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ये
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न
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स्था
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णो
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रु
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र
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सि
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र
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हि
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तो
G
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हा
G
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र
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व
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ल्ली
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वि
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ला
G
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सः
G
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Verse 62
<lg n="62"> <l>चूतं मुञ्च त्यज सरसिजं भृङ्ग मा गा लवङ्गं</l> <l>सङ्गं दूरीकुरु कुरबके केतके मा निषीद।</l> <l>लीलोत्तंसीकृतमुकुलकः स्वर्गसीमन्तिनीभि-</l> <l>र्यत्ते दैवात्परिसरगतः पारिजातः स जातः॥६२॥</l> </lg>
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चू
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तं
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मु
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ञ्च
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त्य
L
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ज
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स
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सि
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जं
G
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भृ
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मा
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गा
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ल
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व
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ङ्गं
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स
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ङ्गं
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दू
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री
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कु
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रु
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कु
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र
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के
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के
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त
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के
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मा
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ली
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त
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मु
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कु
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ल
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कः
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स्व
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र्ग
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सी
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म
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न्ति
L
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नी
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भि
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र्य
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त्ते
G
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दै
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वा
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त्प
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रि
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स
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र
L
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ग
L
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तः
G
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पा
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रि
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जा
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तः
G
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स
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जा
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तः
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Verse 63
<lg n="63"> <l>पश्यैताः कति न स्फुरन्ति सरितः सान्द्रारविन्दच्छद-</l> <l>च्छायाभिः शिशिराः खरातपविपन्निर्वापिका वापिकाः।</l> <l>माद्यन्मेदुरदर्दुरं बककुलैरप्याकुलं सेव्यते</l> <l>तत्कस्मादविचार्य सारस रसान्निःसारनीरं सरः॥६३॥</l> </lg>
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प
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श्यै
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ताः
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क
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ति
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न
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स्फु
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र
G
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न्ति
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स
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रि
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तः
G
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सा
G
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न्द्रा
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वि
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न्द
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च्छ
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द
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च्छा
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या
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भिः
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शि
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शि
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राः
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रा
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वि
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प
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न्नि
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र्वा
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पि
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का
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वा
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पि
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काः
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मा
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द्य
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न्मे
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दु
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र
L
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द
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र्दु
L
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रं
G
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ब
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क
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कु
L
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लै
G
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र
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प्या
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कु
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लं
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से
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व्य
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ते
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त
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त्क
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स्मा
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द
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वि
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चा
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र्य
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सा
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र
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स
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र
L
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सा
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न्निः
G
|
सा
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र
L
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नी
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रं
G
|
स
L
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रः
G
|
Verse 64
<lg n="64"> <l>ब्रूमः किंचन जह्नुपुत्रि जडिमा कस्मादियान्स्वीकृतः</l> <l>पाथोधाम्नि कृतः करालमकरासङ्गेऽपि यत्संगमः।</l> <l>यम्मौलौ कलितं शशाङ्ककलिकाकान्ते वृषाङ्कस्य त-</l> <l>त्पश्य खादु च हारदामशुचि च क्षारायते ते पयः॥६४॥</l> </lg>
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ब्रू
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मः
G
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किं
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च
L
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न
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ज
G
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ह्नु
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पु
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त्रि
L
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ज
L
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डि
L
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मा
G
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क
G
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स्मा
G
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या
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न्स्वी
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कृ
L
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तः
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पा
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थो
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धा
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म्नि
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कृ
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तः
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क
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रा
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ल
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म
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क
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रा
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स
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ङ्गे
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पि
L
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य
G
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त्सं
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ग
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मः
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म्मौ
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लौ
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क
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लि
L
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तं
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श
L
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शा
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ङ्क
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क
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लि
L
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का
G
|
का
G
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न्ते
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वृ
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षा
G
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ङ्क
G
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स्य
L
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त
L
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त्प
G
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श्य
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खा
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दु
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च
L
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हा
G
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र
L
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दा
G
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म
L
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शु
L
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चि
L
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च
G
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क्षा
G
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रा
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य
L
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ते
G
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ते
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प
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यः
G
|
Verse 71
<lg n="71"> <l>त्वं कालं नय कैरवेऽत्र विहरँल्लीलारविन्दे रस-</l> <l>न्कह्लारे निवसन्मधुव्रत पतन्नङ्केऽपि पङ्केरुहाम्।</l> <l>शेफालीमुकुलैरलायि बकुलैरम्लायि किं चामलै-</l> <l>स्तैर्मल्ली मुकुलैरमीलि दहनक्लान्ते वनान्ते यतः॥७१॥</l> </lg>
|
त्वं
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का
G
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लं
G
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न
L
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य
L
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कै
G
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र
L
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G
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त्र
L
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वि
L
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ह
L
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र
G
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ल्ली
G
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ला
G
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र
L
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वि
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न्दे
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स
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ह्ला
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रे
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व
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स
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न्म
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व्र
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त
L
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प
L
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त
G
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न्न
G
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ङ्के
G
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पि
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प
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ङ्के
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L
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हाम्
G
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शे
G
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फा
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ली
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मु
L
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कु
L
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लै
G
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L
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ला
G
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ब
L
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कु
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G
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र
G
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म्ला
G
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यि
L
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किं
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चा
G
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म
L
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लै
G
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स्तै
G
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र्म
G
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ल्ली
G
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मु
L
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कु
L
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लै
G
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र
L
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G
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द
L
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ह
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न
G
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क्ला
G
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न्ते
G
|
व
L
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ना
G
|
न्ते
G
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य
L
|
तः
G
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Verse 76
<lg n="76"> <l>बद्धः कोऽपि शिखामणिस्तव नवो मुक्तागुणो गुम्फितः</l> <l>कान्तः कृत्रिमपुत्रिके यदि कृतः कर्पूरपत्राङ्कुरः।</l> <l>तत्किंचिन्नयनाञ्जनं रतिपतिह्लादप्रदा सा गति-</l> <l>स्तन्मुग्धं हसितं सदामृतरसं मुञ्चमन्कुतः पञ्चमः॥७६॥</l> </lg>
|
ब
G
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द्धः
G
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को
G
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पि
L
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शि
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खा
G
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म
L
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णि
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स्त
L
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व
L
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न
L
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वो
G
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मु
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क्ता
G
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गु
L
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णो
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गु
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म्फि
L
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तः
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का
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न्तः
G
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कृ
G
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त्रि
L
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म
L
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पु
G
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त्रि
L
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के
G
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य
L
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दि
L
|
कृ
L
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तः
G
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क
G
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र्पू
G
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र
L
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प
G
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त्रा
G
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ङ्कु
L
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रः
G
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त
G
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त्किं
G
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चि
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न्न
L
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य
L
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ना
G
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ञ्ज
L
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नं
G
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र
L
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ति
L
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प
L
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ति
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ह्ला
G
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द
G
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प्र
L
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दा
G
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सा
G
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ग
L
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ति
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स्त
G
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न्मु
G
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ग्धं
G
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ह
L
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सि
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तं
G
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स
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दा
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मृ
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त
L
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र
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सं
G
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मु
G
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ञ्च
L
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म
G
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न्कु
L
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तः
G
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प
G
|
ञ्च
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मः
G
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Verse 82
<lg n="82"> <l>वल्लीभिर्ज्वलितं जलैरपगतं दावानलैरुद्गतं</l> <l>दर्भैरङ्कुरितं रवेरपि खरैर्यस्मिन्करैर्दीपितम्।</l> <l>तत्रैवासि मरौ शिरीष जगतीसारोऽपि सत्पल्लव-</l> <l>प्रस्तारोऽपि परिस्फुरत्परिमलोद्गारोऽपि हा रोपितः॥८२॥</l> </lg>
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व
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ल्ली
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भि
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र्ज्व
L
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लि
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तं
G
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ज
L
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L
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तं
G
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G
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रु
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L
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तं
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द
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र्भै
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G
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ङ्कु
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L
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तं
G
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र
L
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वे
G
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र
L
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पि
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ख
L
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रै
G
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र्य
G
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स्मि
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न्क
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G
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र्दी
G
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पि
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तम्
L
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त
G
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त्रै
G
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सि
L
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म
L
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रौ
G
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शि
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री
G
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ष
L
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ज
L
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ग
L
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ती
G
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सा
G
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रो
G
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पि
L
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G
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त्प
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ल्ल
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व
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प्र
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स्ता
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रो
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प
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रि
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स्फु
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त्प
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रि
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म
L
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लो
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द्गा
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रो
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पि
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हा
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रो
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पि
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Verse 102
<lg n="102"> <l>उन्मीलन्मुकुलो न चात्र बकुलो नावर्जकाः केतका</l> <l>नास्मिन्कोमलकुड्भला विचकिला नोद्दीपकाश्चम्पकाः।</l> <l>तत्किं मुग्ध मुधैव दग्धसिकतागर्भः सदर्भों मरो</l> <l>मार्ग: पान्थ पतत्पतंगकिरणाङ्गारोऽयमङ्गीकृतः॥१०२॥</l> </lg>
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उ
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न्मी
G
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ल
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न्मु
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कु
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लो
G
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न
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चा
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त्र
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कु
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न्को
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ड्भ
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ला
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कि
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ला
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नो
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द्दी
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प
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का
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श्च
G
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म्प
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काः
G
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त
G
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त्किं
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मु
G
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ग्ध
L
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मु
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धै
G
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व
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द
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ग्ध
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सि
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ता
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र्भः
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र्भों
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मा
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पा
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र
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णा
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ङ्गा
G
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रो
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य
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म
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ङ्गी
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कृ
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तः
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Verse 105
<lg n="105"> <l>साश्चर्या : सरसाश्च सन्ति सरितः पाथः पतिप्रेयसि</l> <l>क्षोणी विभ्रम वैजयन्ति तदपि त्वां ताम्रपर्णि स्तुमः।</l> <l>खच्छे निर्जितनारिकेलसलिलखादिम्नि यद्वारिणि</l> <l>प्राप्तः केतकपत्रगर्भरुचिभिर्मुक्ताफलैरुद्भवः॥१०५॥</l> </lg>
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सा
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र्या
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सा
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श्च
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स
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न्ति
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तः
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पा
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थः
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य
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सि
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क्षो
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पि
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प
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र्णि
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स्तु
L
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मः
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ख
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च्छे
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नि
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र्जि
L
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त
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ना
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रि
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स
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य
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द्वा
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प्तः
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त
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क
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प
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त्र
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ग
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र्भ
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रु
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चि
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भि
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र्मु
G
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क्ता
G
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फ
L
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लै
G
|
रु
G
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द्भ
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वः
G
|
Verse 106
<lg n="106"> <l>इयं यदि रदच्छदच्छविरपाटला पाटला</l> <l>नताङ्गि तव चेदियं रुचिरकिंचनं काञ्चनम्।</l> <l>किमन्यदमृतद्रवः श्रवणयोरिदं चेद्वचः</l> <l>क्व न भ्रमरयोषितां गलदहंकृतिर्हुकृति:॥१०६॥</l> </lg>
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इ
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यं
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य
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दि
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र
L
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द
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च्छ
L
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द
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च्छ
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वि
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पा
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ट
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पा
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ट
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ला
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ता
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चे
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च
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न्य
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मृ
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त
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द्र
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वः
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श्र
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व
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ण
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रि
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दं
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ति
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र्हु
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Verse 108
<lg n="108"> <l>या लक्ष्मीः स्मरकार्मुके स्फुरति या बाले प्रवाले रुचि-</l> <l>र्यो नीलाम्बुरुहच्छदे मृदुमरुत्प्रेङ्खोलिते विभ्रमः।</l> <l>या कान्तिः कनकाम्बुजेऽपि सकलं द्रष्टुं तदेकत्र चे-</l> <l>च्चेतः कन्दलिताद्भुतं तव सखे पश्याननं सुभ्रुवः॥१०८॥</l> </lg>
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क्ष्मीः
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का
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र्मु
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के
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स्फु
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र
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ति
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या
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बा
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ले
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प्र
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वा
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ले
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रु
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चि
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र्यो
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नी
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ला
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म्बु
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रु
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ह
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च्छ
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दे
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मृ
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दु
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म
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रु
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त्प्रे
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ङ्खो
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लि
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ते
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वि
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भ्र
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मः
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या
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का
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न्तिः
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क
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न
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का
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म्बु
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जे
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पि
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स
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क
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लं
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द्र
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ष्टुं
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त
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दे
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क
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त्र
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चे
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च्चे
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तः
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क
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न्द
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लि
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ता
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द्भु
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तं
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त
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व
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स
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खे
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प
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श्या
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न
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नं
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सु
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भ्रु
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वः
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