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इसी प्रकार के गायनों को एक पुस्तक लिखी गई है वह भी
आप लोगों के कर-कमलों में भेंट करूँगा । समय का इन्तजार करें ।
तथा अब आपसे बिदाई चाहता हूँ । ॐ शान्तिः शान्तिः, शान्तिः ।
 
इति जयपुरराज्यान्तर्गत-नवलगढ़-निवासि-काशीस्थ-
श्रीचन्द्रमहाविद्यालय-ज्यौतिषसामुद्रिकशास्त्राध्यापक-
पं० श्रीबैजनाथशर्मकृत-सोदाहरणभाषाटीकया
समलंकृतस्तत्त्वबोधः समाप्तः ।
 
पुस्तकप्राशिस्थानम्--
 
मास्टर खेलाड़ीलाल ऐण्ड सन्स,
संस्कृत बुकडिपो,
कचौड़ीगली, बनारस सिटी।