Original

भ्रात्रा त्वया श्रेयसि दैशिकेन पित्रा फलस्थेन ततैव मात्रा ।हतोऽभविष्यं यदि न व्यमोक्ष्यं सार्थात् परिभ्रष्ट इवाकृतार्थः ॥ ४१ ॥

Segmented

भ्रात्रा त्वया श्रेयसि दैशिकेन पित्रा फल-स्थेन तथा एव मात्रा हतो ऽभविष्यम् यदि न व्यमोक्ष्यम् सार्थात् परिभ्रष्ट इव अकृतार्थः

Analysis

Word Lemma Parse
भ्रात्रा भ्रातृ pos=n,g=m,c=3,n=s
त्वया त्वद् pos=n,g=,c=3,n=s
श्रेयसि श्रेयस् pos=n,g=n,c=7,n=s
दैशिकेन दैशिक pos=a,g=m,c=3,n=s
पित्रा पितृ pos=n,g=m,c=3,n=s
फल फल pos=n,comp=y
स्थेन स्थ pos=a,g=m,c=3,n=s
तथा तथा pos=i
एव एव pos=i
मात्रा मातृ pos=n,g=f,c=3,n=s
हतो हन् pos=va,g=m,c=1,n=s,f=part
ऽभविष्यम् भू pos=v,p=1,n=s,l=lrn
यदि यदि pos=i
pos=i
व्यमोक्ष्यम् विमुच् pos=v,p=1,n=s,l=lrn
सार्थात् सार्थ pos=n,g=m,c=5,n=s
परिभ्रष्ट परिभ्रंश् pos=va,g=m,c=1,n=s,f=part
इव इव pos=i
अकृतार्थः अकृतार्थ pos=a,g=m,c=1,n=s