Original

प्रियया कान्तया कान्तः पतमान इवोरसि ।चिरं भुक्त्वा वसुमतीं प्रियां कान्तामिव प्रभुः ।सर्वैरङ्गैः समाश्लिष्य प्रसुप्त इव सोऽभवत् ॥ ५४ ॥

Segmented

प्रियया कान्तया कान्तः पतमान इव उरसि चिरम् भुक्त्वा वसुमतीम् प्रियाम् कान्ताम् इव प्रभुः सर्वैः अङ्गैः समाश्लिष्य प्रसुप्त इव सो ऽभवत्

Analysis

Word Lemma Parse
प्रियया प्रिय pos=a,g=f,c=3,n=s
कान्तया कान्ता pos=n,g=f,c=3,n=s
कान्तः कान्त pos=n,g=m,c=1,n=s
पतमान पत् pos=va,g=m,c=1,n=s,f=part
इव इव pos=i
उरसि उरस् pos=n,g=n,c=7,n=s
चिरम् चिरम् pos=i
भुक्त्वा भुज् pos=vi
वसुमतीम् वसुमती pos=n,g=f,c=2,n=s
प्रियाम् प्रिय pos=a,g=f,c=2,n=s
कान्ताम् कान्त pos=a,g=f,c=2,n=s
इव इव pos=i
प्रभुः प्रभु pos=n,g=m,c=1,n=s
सर्वैः सर्व pos=n,g=n,c=3,n=p
अङ्गैः अङ्ग pos=n,g=n,c=3,n=p
समाश्लिष्य समाश्लिष् pos=vi
प्रसुप्त प्रस्वप् pos=va,g=m,c=1,n=s,f=part
इव इव pos=i
सो तद् pos=n,g=m,c=1,n=s
ऽभवत् भू pos=v,p=3,n=s,l=lan