Original

द्रोणं मोहाद्युधा पार्थ यज्जिगीषसि तन्मृषा ।न हि शुश्रुम वातेन मेरुमुन्मथितं गिरिम् ॥ १५ ॥

Segmented

द्रोणम् मोहाद् युधा पार्थ यत् जिगीषसि तत् मृषा न हि शुश्रुम वातेन मेरुम् उन्मथितम् गिरिम्

Analysis

Word Lemma Parse
द्रोणम् द्रोण pos=n,g=m,c=2,n=s
मोहाद् मोह pos=n,g=m,c=5,n=s
युधा युध् pos=n,g=f,c=3,n=s
पार्थ पार्थ pos=n,g=m,c=8,n=s
यत् यत् pos=i
जिगीषसि जिगीष् pos=v,p=2,n=s,l=lat
तत् तद् pos=n,g=n,c=1,n=s
मृषा मृषा pos=i
pos=i
हि हि pos=i
शुश्रुम श्रु pos=v,p=1,n=p,l=lit
वातेन वात pos=n,g=m,c=3,n=s
मेरुम् मेरु pos=n,g=m,c=2,n=s
उन्मथितम् उन्मथ् pos=va,g=m,c=2,n=s,f=part
गिरिम् गिरि pos=n,g=m,c=2,n=s