Original

दुःशासनस्य पापस्य यन्मया न हृतं शिरः ।तन्मे दहति कल्याणि हृदि शल्यमिवार्पितम् ।मा धर्मं जहि सुश्रोणि क्रोधं जहि महामते ॥ ४ ॥

Segmented

दुःशासनस्य पापस्य यत् मया न हृतम् शिरः तत् मे दहति कल्याणि हृदि शल्यम् इव अर्पितम् मा धर्मम् जहि सुश्रोणि क्रोधम् जहि महामते

Analysis

Word Lemma Parse
दुःशासनस्य दुःशासन pos=n,g=m,c=6,n=s
पापस्य पाप pos=a,g=m,c=6,n=s
यत् यद् pos=n,g=n,c=1,n=s
मया मद् pos=n,g=,c=3,n=s
pos=i
हृतम् हृ pos=va,g=n,c=1,n=s,f=part
शिरः शिरस् pos=n,g=n,c=1,n=s
तत् तद् pos=n,g=n,c=1,n=s
मे मद् pos=n,g=,c=6,n=s
दहति दह् pos=v,p=3,n=s,l=lat
कल्याणि कल्याण pos=a,g=f,c=8,n=s
हृदि हृद् pos=n,g=n,c=7,n=s
शल्यम् शल्य pos=n,g=n,c=1,n=s
इव इव pos=i
अर्पितम् अर्पय् pos=va,g=n,c=1,n=s,f=part
मा मा pos=i
धर्मम् धर्म pos=n,g=m,c=2,n=s
जहि हा pos=v,p=2,n=s,l=lot
सुश्रोणि सुश्रोणी pos=n,g=f,c=8,n=s
क्रोधम् क्रोध pos=n,g=m,c=2,n=s
जहि हा pos=v,p=2,n=s,l=lot
महामते महामति pos=a,g=f,c=8,n=s