Original

तं प्रक्रमन्तमाज्ञाय पिता स्नेहसमन्वितः ।उत्तमां गतिमास्थाय पृष्ठतोऽनुससार ह ॥ १८ ॥

Segmented

तम् प्रक्रमन्तम् आज्ञाय स्नेह-समन्वितः उत्तमाम् गतिम् आस्थाय पृष्ठतो ऽनुससार ह

Analysis

Word Lemma Parse
तम् तद् pos=n,g=m,c=2,n=s
प्रक्रमन्तम् आज्ञा pos=vi
आज्ञाय पितृ pos=n,g=m,c=1,n=s
स्नेह स्नेह pos=n,comp=y
समन्वितः समन्वित pos=a,g=m,c=1,n=s
उत्तमाम् उत्तम pos=a,g=f,c=2,n=s
गतिम् गति pos=n,g=f,c=2,n=s
आस्थाय आस्था pos=vi
पृष्ठतो पृष्ठतस् pos=i
ऽनुससार अनुसृ pos=v,p=3,n=s,l=lit
pos=i