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१०६
 
सुभाषितनीव्यां
 
पृष्टम
 
पृष्टम्
 
येषां हिरण्यकशिपु
 
८१
 
मतामेत्र खपुष्पत्वं
 
४७
 

 
सत्पथं छादयन
 
१७
 
रत्नाभरण
 
९९. सदसन्तौ
 

 
सदानवोक्किमहितः
 
१२
 
वदान्यथ
 
८३ सन्नियोगेन
 
૪૮
 
विक्रमाक्रान्त
 
05.
 
सर्वेषामुत्तरा
 
..
 
विदधातु धाम
विधिमन्तरेण
 
६१
 
सुदर्शनभृता
 
१९
 
१००
 
सुवर्णमपि दुर्वर्ण
 
९६
 
विधौ लब्धधृतिः
विबुधमहिते
विभुबन्धं प्राप्य
विशुद्धवर्ण
 

 
सुवृत्तस्यावदातस्य
 
६३
 
७७
 
सूत्रं रत्नसमावेशात्
 
६६
 
६८ स्थलपरिशेषित
 

 
८८
 
स्नेहः शैत्यम्
 
२३
 
विषमो गुणभेदेन
विषयेष्वपि
 
६४
 
स्फटिकः स्वभाव
 
६१
 
स्वच्छ खादु
 
९७
 

 
स्वतश्चतन्य
 
शिक्षके हरिताकारो
 
सतः सत्त्वविहीनानाम्
 
६५ स्वदृष्टिप्रतिघातेन
 

 

 

 
४१
 
हरिकर पुष्कर हंस