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सुभाषितनीव्यां
 
पृष्ठम्
 
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कटूनामिह सार्थत्वात्
 
जनयत्यनले दाहं
 
५९
 
कठिनः कृशमूलच
 
४०
 
जनित्वापि महागोत्रे
 
२४
 
कलकण्ठगलास्वाद्ये
 
कलङ्किनि जले
 
९८
 
जलाशयस्य घोषेण
 
९ १
 
६५ जातिमात्रशरणा:
 
३७
 
काकानां कोकिलानां
 
९५ जोषमेकपदे
 

 
कामाधिकरणप्राह्यः
 
कामं लिखतु
 
कुतश्चिदचलस्थानात्
 
केन चिद्दान्तकृत्येन
क्षोभितो विबुधैः
 
१५.
 

 
૭૪
 
तदेव गृह्यताम्
 
१४
 
८९.
 
तमः स्वभावमलिनं
 
३७
 
२५ तमिस्राचारिणां
 
७२
 

 
तरतु विवित्सयाधि
 
४५
 

 
तान् घ्नन्ति हन्त
 
१०
 
गतियोंम्ना
 
१९.
 
त्वचं मांस जीवं
 
८३
 
गरुत्मति सुपक्षतां
 
५.३
 

 
गुणजालप्रकर्षे
 
३१
 
दष्टसारङ्ग
 
१६
 

 
दुष्टैरारोपितः
 
३६
 
घोरास्त्य कमिधांवैराः
 
चकोरानादर
 
४३
 
दृष्टपका प्रतिपदं
 
४०
 
देशकालविशेषेण
 
५७
 
२६ द्विजराजाइ
 
३१
 

 
छन्दः प्रत्ययशुद्धात्मा
 
छिद्रं जनयताम्
 
छलिनं सत्कथानर्हम्
 
द्विजस्य सिंतपक्षस्य
 
२६ धर्मसेतुनिविष्टानां
 
५८ धुर्याणामपि
 
३५
 
९.६
 

 
४९
 
१७