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श्लोकानुक्रमणिका ॥
 
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पृष्ठम्
 
पृष्ठम्
 

 
अमित्रे विश्वासः
 
४५
 
अकिञ्चित्कारिणाम्
 
२७
 
अमृतस्यन्दिनं
 
६०
 
अङ्गयुक्तः
 
७३
 
अवक्रस्तारकाधीशः
 
३२
 
अण्डजाः
 
१५ अव्यवस्थितत्रृत्तानां
 
३५
 
अधिकोन्नतैरपि
 
२७
 
अस्तु तावत्
 
१६
 
अनङ्गीकृतकामानां
 
५०
 
अहार्यः सर्वमध्यस्थः
 
५१
 
अनन्तख्याति संपत्र:
 
५०
 
अहार्येण
 
६०
 
अनाकलितमानुष्याः
 
૪૪
 
५३
 
अनिर्घातं धाराधरम्
 
८४
 

 
अनिःशेषितदातव्यं
 
८३
 
आत्मार्थ युक्त
 
२३
 
अनुकर्तुमहोतुं
 
५२ आभिमुख्यदशा
 
७९
 
अनुज्झित सुहृद्भावः
 
५९
 
आलोकावधि यद्वशेन
 
३८
 
अनेक मुखपापात्मा
 
२५
 
अपलिधियः
 
८७
 
इहैव भुवने जातम्
 
९७
 
अपार्थेतरयुक्तानां
 
९१
 

 
अपि निर्मुक्तभोगेन
 

 
उत्पथा दुर्मदाः
 
२४
 
अपि सत्पथ
 
१६
 

 
अपि सन्तापशमनाः
 
४१
 
एकयापि कलया
 
१०१
 
अपुनर्देहशब्दार्थ
 
८२ एकयैव गुरोर्दया
 
अप्यनावर्जिताः
 
७९