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श्रीशिवस्तोत्रेषु
 
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नारायणभुजस्तम्भन बादरायणभुजस्तम्भन कन्दर्पदपरुदर्पोविपिनदावानल त्रिपुरपयो-

राशिवाडवानल सनत्कुमारगर्वपर्वत भस्मसात्करणकारण नरसिंहदर्पप्रविमर्द-

नकारण ब्रह्मविष्णुमदाभिमाननिदानविघातन विद्युत्समानाद्यवसानक महादहन

जटिलितमहितोरुलिङ्गविग्रह कालकूटानुग्रह देव ॥ १ ॥
 
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लीलावलोकन ललाटलोचनप्रज्वलनज्वालावली भस्मीभूतनन्दादिगोमात्र-
स्त्र-
समूहदूरीभूतभक्तजनमलयातिसंहारकारणप्रवाह देव ॥ २ ॥
 
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विद्युन्मालिकासुर - -तारकासुर - -अन्धकासुर - -जलन्धरासुर-लालासुर -भस्मासुर-

जाटासुर - -रावणासुर - -व्यत्घ्रासुर - -गजासुरादिनानाजगत्कण्टकमहासुरमदप्रभञ्जन

प्रेतपतिमद्भञ्जन सहस्रलोकसाधारणजन्मजरामरणनिवारण । अपि च देव ॥ ३ ॥
 
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श्रीमन्महादेवी श्रीपर्वतप्रिय कैलासप्रिय अविमुक्तप्रिय केदारप्रिय पार्वतीप्रिय

कुमारप्रिय विनायकप्रिय नारायणप्रिय नन्दिकेश्वरप्रिय महाकालप्रिय कालरुद्रप्रिय

वीरभद्रप्रिय भृङ्गीरिटिप्रिय चण्डेश्वरप्रिय चण्डकीर्तिप्रिय गोकर्णभद्रकर्ण-

लम्बकर्णकुम्भकर्णवराहकर्ण गजकर्णघण्टाकर्णप्रिय महालय महाव्रत माहेन्द्र

महाबाहुप्रिय अतिहासाट्टहास गुहावास गुहेश्वर हाटकेश्वर भस्मेश्वर

अर्धनारीश्वर प्रिय - -<add>[त ] </add>जिह्व - -शतोदर -सहस्रोदर - वत्-वज्रमध्योदर - -जिह्मोदर -
-
लम्बोदर - -कुम्भोदरप्रिय हव्यवाहनसिंहूर्तकसंवर्तक मेघावर्तकप्रिय कुन्दतरुमुदक-

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पिंप</flag>लपिङ्गलमधुपिङ्गलप्रिय विश्वरूप-विरूपाक्ष-पञ्चाक्ष- शताक्ष- सहस्राक्षप्रिय

प्रपञ्चान्तक लोकान्तक यमहर मृत्युहरप्रिय यशस्वि भास्कर दक्ष भास्कर काष्काल-

कूटधूमकेतुप्रिय यमेहान्दोलक नीलकोकिल पूर्णभद्रसद्योजात ब्रह्मभक्षण विष-

भक्षण भृगुजटिलमुण्डधर शिखण्डधरप्रिय केशमहा केशीज्वलन सूर्यवर्ण

सोमवर्ण सूर्याक्ष सोमाक्ष सूर्यपेषण चन्द्रपेण इन्द्रेन्द्र यमेन्द्र मेरुपातन-

विन्ध्यपातनप्रिय शतमाय महामाय लिङ्गाक्ष पिङ्गलाक्ष पर्वतास्य पिशाचास्य

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प्रकुन्दकुन्ददन्तराद्रिसुन्दर सर्वभूतविजृम्भणप्रिय अर्धमुण्डार्धवक्त्रार्धनासिकार्ध-

देहसार्धं घटनार्ध भगललाट भगनन्दन भगनासिक भगनेत्र हरप्रिय वारिवाह-

वराहपिप्पलायुधाङ्गारकभक्षण द्विशिखत्रिशिखपञ्च शिख दीर्घ ह्रस्व स्थूलसूक्ष्म गुरु-

लघु वज्रपाणिचक्रपाणिप्रिय श्रेष्टविक्रमाद्रिसोम नन्दिनारायण श्रीधर श्रीपतिसर्वाङ्ग-

शिरश्छेद नारद नागदन्तपुष्पदन्तप्रिय ओंकारवषट्कारसुगमसूत्र पीठनलोक

सारयज्ञहर दक्षहर यूपोत्पाटनाग्निजिह्वा समुत्पाटन निकुम्भक्षेत्रज्ञ क्षेत्रभानु

कम्पप्रिय असितवामदेवचक्रायुधकूश्माण्डकङ्कणकाकपाद - कालविमर्दनप्रिय कट-

कटकङ्कटसङ्कटप्रिय एकवक्त्र- बहुवक्त्रास्यवक्त्र सिंहवक्त्रशार्दूलवक्त्र - हरि-

णवक्त्र- कोकिलवक्त्र- वक्त्रोलकवक्त्रानेकवक्त्रप्रिय शिष्टाष्टपुष्टविश्वंभरादिकष्ट-

विमर्दनप्रिय खण्डरुण्डाभरण चण्डाभरण फणिभूषण नानाप्रमथ-

गणनायकप्रिय कुञ्जरमुखप्रिय षडाननप्रिय ऋभूपमन्यु वागास्य श्वेत-

मुनिमार्कण्डेय प्रिय सनकसनन्दनसनत्कुमारप्रिय विभूतिप्रिय रुद्राक्षप्रिय

पञ्चामृतप्रिय पञ्चगव्यप्रिय चन्दन कुङ्कुमगोरोचनप्रिय नीलोत्पलरक्तोत्पलमहो-
 
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