Stotrarnava /779
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<page>
<p>॥ अनुबन्धः ॥
II
Variants in the Sivastotra, printed as the 10th Stotra among
the Sivastotras
</p>
<footnote>१०.
</footnote>
<p>॥ श्रीशिवशतकम् ॥
Page. Verse. Line
Printed reading
57
1
1
18
सिन्धुच्छलन-
Reading in the oriya ms.
सिन्धूच्चलन-
2
2
24
"
"
वास्तूभवतु
वास्तुं भजतु
4
29
"
"
शैवोऽयं
शैवोऽघं
30
دو
द्युतिक-
गुति च
58
6
8
द्रणक्तु
द्रिणक्तु
7
12
2
12
2
कारे हृदि
कारेर्हृदि
13
"
"
"
"
चितखिदे
चितिखिदे-
14
2
2
2
2
دو
भृङ्गा
भृङ्गी
15
"
"
न्यात्तवन्तो
न्याहरन्तो
9
23
भक्त-
دو
10 24
वात्रा-
"
"
25
"
"
सर्वशत्रोः
26
"
"
2
"
"
"
2
"
دو
دو
"
"
= 2
27
11.
28
"
"
59
12
12
3
23
15
15
دو
"
"
16
12
12
دو
सेवा हेवाक
-
-
नां नैत-
मध्येऽध्वानं
सहेलोल्ललित सुललितौ
ग्राव्णो जाय-
वीक्षा
-श्चरन्तः
-सवन-
"
"
"
"
18
27
"
"
28
"
"
पारि
"
"
دو
29
ވ
पूर्णे
60
19
4
प्राग्भारभारी
21
21
8
नोत्ताल-
"
"
भक्ति-
वत्रा -
सत्रशत्रोः
सेवा वाद-
न[य]तां दि-
नामेत-
मध्ये ध्यानं
सहेली सुललित ललितौ
ग्रावोज्जाग्र-
वीक्ष्य
श्वरन्त्यः
- पवन
पार
पुण्ये
प्राग्भागभागी
नोत्तान-
</p>
</page>
<p>॥ अनुबन्धः ॥
II
Variants in the Sivastotra, printed as the 10th Stotra among
the Sivastotras
<footnote>१०.
<p>॥ श्रीशिवशतकम् ॥
Page. Verse. Line
Printed reading
57
1
1
18
सिन्धुच्छलन-
Reading in the oriya ms.
सिन्धूच्चलन-
2
2
24
"
"
वास्तूभवतु
वास्तुं भजतु
4
29
"
"
शैवोऽयं
शैवोऽघं
30
دو
द्युतिक-
गुति च
58
6
8
द्रणक्तु
द्रिणक्तु
7
12
2
12
2
कारे हृदि
कारेर्हृदि
13
"
"
"
"
चितखिदे
चितिखिदे-
14
2
2
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2
دو
भृङ्गा
भृङ्गी
15
"
"
न्यात्तवन्तो
न्याहरन्तो
9
23
भक्त-
دو
10 24
वात्रा-
"
"
25
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सर्वशत्रोः
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دو
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"
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دو
सेवा हेवाक
-
-
नां नैत-
मध्येऽध्वानं
सहेलोल्ललित सुललितौ
ग्राव्णो जाय-
वीक्षा
-श्चरन्तः
-सवन-
"
"
"
"
18
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"
"
28
"
"
पारि
"
"
دو
29
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पूर्णे
60
19
4
प्राग्भारभारी
21
21
8
नोत्ताल-
"
"
भक्ति-
वत्रा -
सत्रशत्रोः
सेवा वाद-
न[य]तां दि-
नामेत-
मध्ये ध्यानं
सहेली सुललित ललितौ
ग्रावोज्जाग्र-
वीक्ष्य
श्वरन्त्यः
- पवन
पार
पुण्ये
प्राग्भागभागी
नोत्तान-
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