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श्रीसरस्वतीस्तोत्रम् सिद्धसारस्वतम्
 
६८५</ignore>
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सिद्धसारस्वतं नाम स्तोत्रं वक्ष्येऽहमुत्तमम् ।
 

उमा च भारती भद्रा वाणी च विजया जया ॥ १३ ॥
 
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वाणी सर्वगता गौरी कामाक्षी कमलप्रिया ।

सरस्वती च कमला मातङ्गी चेतना शिवा ॥ १४ ॥
 
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क्षेमङ्करी शिवानन्दी कुण्डली वैष्णवी तथा ।
 

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[ ऐ] </add><delete></delete>न्द्री मधुमती लक्ष्मीर्गिरिजा शाम्भवाम्बिका ॥ १५ ॥
 
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तारा पद्मावती हंसा पद्मवासा मनोन्मणी ।

अपर्णा ललिता देवी कौमारी कबरी तथा ॥ १६ ॥
 
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शाम्भवी सुमुखी नेत्री त्रिनेत्री विश्वरूपिणी ।
 

आर्या मृडानी हीङ्कारी साधनी सुमनाश्च हि ॥ १७ ॥
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सूक्ष्मा परापरा कार्तस्वरवर्णा हरिप्रिया ।
 

ज्वालामालिनिका चर्चा कन्या च कमलासना ॥ १८ ॥
 
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महालक्ष्मीर्महासिद्धिः स्वधा स्वाहा सुधामयी ।

त्रिलोकपावनी भर्त्री त्रिसन्ध्या त्रिपुरा त्रयी ॥ १९ ॥
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त्रिशक्तिस्त्रिपुरा दुर्गा ब्राह्मी त्रैलोक्यमोहिनी ।

त्रिपुष्करत्रिवर्गादौ त्रिवर्णा त्रिस्वधामयी ॥ २० ॥
 
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त्रिगुणा निर्गुणा नित्या निर्विकारा निरञ्जना ।

कामाक्षी कामिनी कान्ता कामदा कलहंसगा ॥ २१ ॥
 
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सहजा कालजा प्रज्ञा रमा मङ्गलसुन्दरी ।

वाग्विलासा विशालाक्षी सर्वविद्या सुमङ्गला <fix>॥</fix> २२ ॥
 
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काली महेश्वरी चैव भैरवी भुवनेश्वरी ।

अष्टोत्तरशतं नाम्नां वाग्भत्रि <delete>त्रि</delete><add>[त्रर्त्रा ]</add> पुरार्जितम् ॥ २३॥
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त्रिसन्ध्यं कीर्तयेद्यस्तु सर्वसिद्धिं लभेत सः ।

आयुरारोग्यमैश्वर्यं सुख सम्पत्तिवर्धनम् ॥ २४ ॥
 
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षट्कर्मसिद्धिदं स्तोत्रं साक्षात्त्रैलोक्यमोहनम् ।

सिद्धसारस्वतं चैव भवेद्विषयनाशनम् ॥ २५ ॥
 
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॥ इति श्रीसरस्वतीस्तोत्रं सिद्धसारस्वतं सम्पूर्णम् ॥
 
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