Stotrarnava /731
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श्रीसरस्वतीस्तोत्रम् सिद्धसारस्वतम्
सिद्धसारस्वतं नाम स्तोत्रं वक्ष्येऽहमुत्तमम् ।
उमा च भारती भद्रा वाणी च विजया जया ॥ १३ ॥
वाणी सर्वगता गौरी कामाक्षी कमलप्रिया ।
सरस्वती च कमला मातङ्गी चेतना शिवा ॥ १४ ॥
क्षेमङ्करी शिवानन्दी कुण्डली वैष्णवी तथा ।
[ ऐ] इन्द्री मधुमती लक्ष्मीर्गिरिजा शाम्भवाम्बिका ॥ १५ ॥
तारा पद्मावती हंसा पद्मवासा मनोन्मणी ।
अपर्णा ललिता देवी कौमारी कबरी तथा ॥ १६ ॥
शाम्भवी सुमुखी नेत्री त्रिनेत्री विश्वरूपिणी ।
आर्या मृडानी हीङ्कारी साधनी सुमनाच हि ॥ १७ ॥
सूक्ष्मा परापरा कार्तस्वरवर्णा हरिप्रिया ।
ज्वालामालिनिका चर्चा कन्या च कमलासना ॥ १८ ॥
महालक्ष्मीर्महासिद्धिः स्वधा स्वाहा सुधामयी ।
त्रिलोकपावनी भर्त्री त्रिसन्ध्या त्रिपुरा त्रयी ॥ १९ ॥
त्रिशक्तिस्त्रिपुरा दुर्गा ब्राह्मी त्रैलोक्यमोहिनी ।
त्रिपुष्करत्रिवर्गादौ त्रिवर्णा त्रिस्वधामयी ॥ २० ॥
त्रिगुणा निर्गुणा नित्या निर्विकारा निरञ्जना ।
कामाक्षी कामिनी कान्ता कामदा कलहंसगा ॥ २१ ॥
सहजा कालजा प्रज्ञा रमा मङ्गलसुन्दरी ।
वाग्विलासा विशालाक्षी सर्वविद्या सुमङ्गला २२ ॥
काली महेश्वरी चैव भैरवी भुवनेश्वरी ।
अष्टोत्तरशतं नाम्नां वाग्भत्रि [त्र च ] पुरार्जितम् ॥ २३॥
त्रिसन्ध्यं कीर्तयेद्यस्तु सर्वसिद्धिं लभेत सः ।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं सुख सम्पत्तिवर्धनम् ॥ २४ ॥
षट्कर्मसिद्धिदं स्तोत्रं साक्षात्त्रैलोक्यमोहनम् ।
सिद्धसारस्वतं चैव भवेद्विषयनाशनम् ॥ २५ ॥
॥ इति श्रीसरस्वतीस्तोत्रं सिद्धसारस्वतं सम्पूर्णम् ॥
६८५
सिद्धसारस्वतं नाम स्तोत्रं वक्ष्येऽहमुत्तमम् ।
उमा च भारती भद्रा वाणी च विजया जया ॥ १३ ॥
वाणी सर्वगता गौरी कामाक्षी कमलप्रिया ।
सरस्वती च कमला मातङ्गी चेतना शिवा ॥ १४ ॥
क्षेमङ्करी शिवानन्दी कुण्डली वैष्णवी तथा ।
[ ऐ] इन्द्री मधुमती लक्ष्मीर्गिरिजा शाम्भवाम्बिका ॥ १५ ॥
तारा पद्मावती हंसा पद्मवासा मनोन्मणी ।
अपर्णा ललिता देवी कौमारी कबरी तथा ॥ १६ ॥
शाम्भवी सुमुखी नेत्री त्रिनेत्री विश्वरूपिणी ।
आर्या मृडानी हीङ्कारी साधनी सुमनाच हि ॥ १७ ॥
सूक्ष्मा परापरा कार्तस्वरवर्णा हरिप्रिया ।
ज्वालामालिनिका चर्चा कन्या च कमलासना ॥ १८ ॥
महालक्ष्मीर्महासिद्धिः स्वधा स्वाहा सुधामयी ।
त्रिलोकपावनी भर्त्री त्रिसन्ध्या त्रिपुरा त्रयी ॥ १९ ॥
त्रिशक्तिस्त्रिपुरा दुर्गा ब्राह्मी त्रैलोक्यमोहिनी ।
त्रिपुष्करत्रिवर्गादौ त्रिवर्णा त्रिस्वधामयी ॥ २० ॥
त्रिगुणा निर्गुणा नित्या निर्विकारा निरञ्जना ।
कामाक्षी कामिनी कान्ता कामदा कलहंसगा ॥ २१ ॥
सहजा कालजा प्रज्ञा रमा मङ्गलसुन्दरी ।
वाग्विलासा विशालाक्षी सर्वविद्या सुमङ्गला २२ ॥
काली महेश्वरी चैव भैरवी भुवनेश्वरी ।
अष्टोत्तरशतं नाम्नां वाग्भत्रि [त्र च ] पुरार्जितम् ॥ २३॥
त्रिसन्ध्यं कीर्तयेद्यस्तु सर्वसिद्धिं लभेत सः ।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं सुख सम्पत्तिवर्धनम् ॥ २४ ॥
षट्कर्मसिद्धिदं स्तोत्रं साक्षात्त्रैलोक्यमोहनम् ।
सिद्धसारस्वतं चैव भवेद्विषयनाशनम् ॥ २५ ॥
॥ इति श्रीसरस्वतीस्तोत्रं सिद्धसारस्वतं सम्पूर्णम् ॥
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